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Diamond Industry: संकट में डायमंड इंडस्ट्री, ऑर्डर कम होने से बिगड़े हालात-GTRI

Diamond Industry: रूस एक प्रमुख कच्चा हीरा उत्पादक है, उस पर प्रतिबंधों ने व्यापार को और जटिल बना दिया है तथा वैश्विक हीरा व्यापार को धीमा कर दिया है। जीटीआरआई के अनुसार दुबई हीरे का उत्पादन नहीं करता है, फिर भी भारत के कच्चे हीरे के आयात में इसकी हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।

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डायमंड इंडस्ट्री में संकट

Diamond Industry:भारत का हीरा क्षेत्र गंभीर संकट का सामना कर रहा है क्योंकि पिछले तीन वर्षों में आयात तथा निर्यात दोनों में भारी गिरावट आने से भुगतान में चूक, कारखाने बंद होने और बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने की स्थिति उत्पन्न हो गई हैं। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने यह बात कही है।आर्थिक शोध संस्थान के अनुसार निर्यात आय में वृद्धि हुई है, लेकिन ऑर्डर में कमी तथा प्रयोगशाला में बनने वाले हीरों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण अप्रसंस्कृत कच्चे हीरों का भंडार बढ़ रहा है।

कितना बड़ा है संकट

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि इससे भुगतान में चूक, कारखाने बंद होने और बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। दुख की बात यह है कि गुजरात के हीरा उद्योग से जुड़े 60 से अधिक लोगों ने आत्महत्या की है, जो भारत के हीरा उद्योग पर पड़ रहे गंभीर वित्तीय तथा भावनात्मक दबाव को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान तथा क्षेत्र के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।

लैब डायमंड की बढ़ी डिमांड

आर्थिक शोध संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में 18.5 अरब अमेरिकी डॉलर से 2023-024 में 14 अरब अमरीकी डॉलर तक कच्चे हीरे के आयात में 24.5 प्रतिशत की गिरावट कमजोर वैश्विक बाजारों और कम प्रसंस्करण ऑर्डर को दर्शाती है।उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष ने वैश्विक हीरा आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित किया है। रूस एक प्रमुख कच्चा हीरा उत्पादक है, उस पर प्रतिबंधों ने व्यापार को और जटिल बना दिया है तथा वैश्विक हीरा व्यापार को धीमा कर दिया है।श्रीवास्तव ने कहा कि प्रयोगशाला में तैयार किए गए हीरों की ओर उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग प्राकृतिक हीरों की मांग को प्रभावित कर रही है।ऐसा माना जाता है कि प्रयोगशाला में बने हीरे अधिक किफायती तथा टिकाऊ होते हैं।

जीटीआरआई ने यह भी कहा कि दुबई हीरे का उत्पादन नहीं करता है, फिर भी भारत के कच्चे हीरे के आयात में इसकी हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।दुबई...बोत्सवाना, अंगोला, दक्षिण अफ्रीका, रूस से कच्चे हीरे आयात करता है और इन्हें फिर भारत में निर्यात करता है।भारतीय हीरा उद्योग में 7,000 से अधिक कंपनियां शामिल हैं जो हीरे की कटाई, उन्हें तराशने और निर्यात जैसी विभिन्न गतिविधियों में शामिल हैं।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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