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8th Pay Commission से 3.5 फिटमेंट फैक्टर की मांग, जानिए सरकारी खजाने पर कितना पड़ेगा असर?

8वें वेतन आयोग पर चर्चाएं लगातार जोर पकड़ रही हैं। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 8वें वेतन आयोग को अपनी प्रतिक्रियाएं जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 जून कर दी गई है।

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8वां वेतन आयोग

देशभर में काम करने वाले लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स 8th Pay Commission लागू होने का इंतजार बेसब्री से कर रहे हैं। नए पे कमीशन लागू होने से उनकी सैलरी और पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती हैं इसके लिए इस बार फिटमेंट फैक्टर 3.5 रखने की मांग की गई है। अगर केंद्र सरकार इस फिटमेंट फैक्टर को मान लेती है तो सरकारी खजाने पर कितना बोझ पड़ेगा? सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है। आइए सबकुछ जानते हैं।

कितना बढ़ेगा सरकारी खजाने पर बोझ

कर्मचारियों की सैलरी राजस्व खर्च का एक बड़ा हिस्सा होता है। इसलिए वेतन आयोग की सिफारिशों का सरकार के वित्तीय हिसाब-किताब पर असर पड़ता है। उदाहरण के लिए, सातवें केंद्रीय वेतन आयोग ने सैलरी, भत्ते और पेंशन में 23.55 प्रतिशत की बढ़ोतरी की सिफारिश की थी, जिससे केंद्र सरकार पर हर साल 1.02 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा था। इसी तरह, अगर 8वें CPC के अनुसार सैलरी और पेंशन में 20-25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो केंद्र को हर साल 1.4 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त चाहिए होंगे। केंद्रीय बजट 2025-26 के अनुसार, 2025-26 के लिए केंद्र सरकार का सैलरी बिल लगभग 2.95 लाख करोड़ रुपये और पेंशन लगभग 2.74 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

राज्यों पर कितना बढ़ेगा बोझ

राज्य सरकारों के लिए, जो लगभग 1.9 करोड़ लोगों को रोजगार देती हैं, कुल सैलरी और पेंशन बिल पहले से ही 9-10 लाख करोड़ रुपये है। अगर 70 प्रतिशत राज्य पिछले वेतन आयोग की तरह ही सैलरी में बदलाव लागू करती हैं, तो उनकी कुल सालाना लागत 2.3-2.5 लाख करोड़ रुपये बढ़ जाएगी। कुल मिलाकर, केंद्र और राज्यों को हर साल 3.7-3.9 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त बोझ का सामना करना पड़ सकता है, जो 2025-26 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 1.1-1.2 प्रतिशत है।

विशेषज्ञ क्या लगा रहे अनुमान?

कर्मचारी यूनियनों की मांग को देखते हुए विशेषज्ञ मोटे तौर पर 2.5 से 3 के फिटमेंट फैक्टर की उम्मीद कर रहे हैं। कर्मचारी यूनियनों ने आर्थिक चुनौतियों, बढ़ती महंगाई और उन्हें जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उनके कारण काफी अधिक संशोधन की मांग की है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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