10 मिनट में डिलीवरी पर ब्रेक लग गया है। आपको बता दें कि भारत में 10 मिनट में समानों की डिलीवरी काफी तेजी से लोकप्रिय हुआ, लेकिन साथ ही इसके विरोध भी बढ़ गए थे। Zepto और Blinkit जैसी कंपनियों के साथ जुड़े गिग वकर्स ने इस मॉडल के विरोध में आवाज बुलंद किया था। आप राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस डिलीवरी बॉय की सुरक्षा को लेकर संसद में मुद्दा उठाया था। उसके बाद सरकार ने इस मामले में हस्तक्षेप की बात कही थी। इसके बाद इस मसले पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडविया ने ब्लिंकिट,जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के अधिकारियों से बात की थी और डिलीवरी के लिए समय सीमा हटाने की बात कही थी। सभी कंपनी ने सरकार को अस्वासन दिया कि वो अपने ब्रांड ऐड से डिलीवरी की समय सीमा हटाएंगे। अब इसकी शुरुआत Blinkit ने कर दी है। बलिंकिट ने अपने सभी ब्रांड ऐड से 10 मिनट में डिलीवरी की बात हटा दी है। यानी आगे से कंपनी 10 मिनट का टाइमलाइन डिलीवरी में फिक्स नहीं करेगी।
क्यों हुआ था लोकप्रिय यह मॉडल?
कोरोना महामारी के समय ई-कॉमर्स का क्विक कॉमर्स (Q-Commerce) मॉडल लोकप्रिय हुआ था। उस वक्त लोग घर से निकल नहीं रहे थे और कंपनियां कम समय में घर पर सामान पहुंचा रही थी। उसके बाद यह मॉडल काफी तेजी से लोकप्रिय हुआ। क्विक कॉमर्स (Q-Commerce) के तहत कंपनियां अपने ग्राहकों को बेहद कम समय में रोजमर्रा की जरूरत का सामान पहुंचाती है, जो पारंपरिक ई-कॉमर्स की तुलना में बहुत तेज है। ऐप/वेबसाइट के जरिए ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट जैसी कंपनियां इस बिजनेस में लीडर हैं। ये कंपनियां डार्क स्टोर्स तथा AI-संचालित लॉजिस्टिक्स का इस्तेमाल करती हैं।
नए साल की पूर्व संध्या पर किया था राष्ट्रव्यापी हड़ताल
भारत में 10 मिनट में डिलीवरी को लेकर नए साल की पूर्व संध्या यानी 31 दिसंबर, 2025 को गिग वर्कर्स ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल किया था, जिसमें देशभर से करीब दो लाख से अधिक राइडर्स शामिल हुए थे। गिग वर्कर्स उचित भुगतान, सुरक्षा और सम्मान की मांग करते हुए उनके यूनियन ने मांग किया था कि 10 मिनट में डिलीवरी की समय-सीमा खत्म किया जाए। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसी कंपनियों ने डार्क स्टोर्स या डार्क वेयरहाउस पर भारी निवेश किया है।
