Post Retirement Emergency Fund: रिटायरमेंट (Retirement) हर व्यक्ति जीवन का एक ऐसा पड़ाव है, जब नियमित सैलरी बंद हो जाती है और रोजमर्रा के खर्चों के लिए बचत व निवेश पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में केवल अच्छी-खासी रिटायरमेंट कॉर्पस होना ही काफी नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि आपके पास जरूरत के समय तुरंत इस्तेमाल की जा सकने वाली पर्याप्त नकदी (Liquidity) भी हो। अगर आपकी सारी बचत लंबी अवधि के निवेश में फंसी होगी, तो अचानक आने वाले खर्चों को पूरा करने में परेशानी हो सकती है।
जानकारों की मानें तो रिटायरमेंट के बाद हर व्यक्ति को अपनी नियमित जरूरतों और इमरजेंसी को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त राशि (Post Retirement Emergency Fund) आसानी से उपलब्ध रखने की योजना बनानी चाहिए। इससे आर्थिक तनाव कम रहता है और निवेश को समय से पहले तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती-
क्यों जरूरी है पर्याप्त नकदी?
रिटायरमेंट के बाद आय का नियमित स्रोत कम या बंद हो सकता है। ऐसे में मेडिकल खर्च, घर की मरम्मत, यात्रा या किसी पारिवारिक जरूरत के लिए अचानक पैसों की जरूरत पड़ सकती है। अगर आपके पास पर्याप्त नकदी नहीं होगी, तो आपको शेयर, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश नुकसान में बेचने पड़ सकते हैं। इसी वजह से जानकार सलाह देते हैं कि रिटायरमेंट के बाद कुछ राशि हमेशा ऐसी जगह रखें, जहां से जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा निकाला जा सके।
कितनी नकदी रखना माना जाता है सही
आमतौर पर सलाह दी जाती है कि रिटायर व्यक्ति के पास कम से कम 12 से 24 महीनों के नियमित खर्च के बराबर राशि आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। यह राशि आपकी मासिक जरूरतों, स्वास्थ्य, दूसरे आय के स्रोत और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करती है।
उदाहरण के लिए अगर किसी परिवार का मासिक खर्च 50,000 रुपये है, तो उसके पास लगभग 6 लाख से 12 लाख रुपये तक की राशि ऐसी होनी चाहिए, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।
पैसा कहां रखें?
पूरी राशि केवल बचत खाते में रखना जरूरी नहीं है। इसके बजाय इसे अलग-अलग सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध विकल्पों में बांटा जा सकता है जैसे सेविंग्स अकाउंट, शॉर्ट-टर्म फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), लिक्विड म्यूचुअल फंड और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट। इस तरह आपको जरूरत पड़ने पर पैसा भी आसानी से मिलेगा और कुछ हद तक बेहतर रिटर्न भी प्राप्त हो सकता है।
मेडिकल इमरजेंसी के लिए अलग व्यवस्था रखें
बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य से जुड़े खर्च भी बढ़ सकते हैं। इसलिए केवल नकदी रखना ही काफी नहीं है, बल्कि पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस और अलग मेडिकल इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) भी होना चाहिए। कोई बड़ी मेडिकल जरूरत सामने आती है, तो इससे आपकी रिटायरमेंट बचत पर अचानक बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
