बिजनेस

डूबने से बच जाती दिल्ली ! अगर सिंगापुर की तरह 15 साल पहले शुरू की होती प्लानिंग

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Jul 17, 2023, 03:44 PM IST

Delhi Flood And Lesson From Singapore Model: घनी आबादी, बाढ़ और जलवायु परिवर्तन के खतरे से दुनिया भर के कई देश जूझ रहे हैं। लेकिन उसमें से कुछ देश ऐसे हैं जिन्होंने दिल्ली से ज्यादा बाढ़ के खतरे को बेहतर तरीके से मैनेज किया है। सिंगापुर का ड्रेनेज और कैनाल सिस्टम आज पूरी दुनिया के लिए मिसाल है।

Image

सिंगापुर मॉडल बदल सकता है दिल्ली की सूरत

Delhi Flood And Lesson From Singapore Model: दिल्ली की बाढ़ ने एक बार फिर हमारे शहर कों प्लानिंग और आपदा नियंत्रण पर सवाल खड़े कर दिए है। परेशान करने वाली बात यह है कि दिल्ली के हालात पिछले 45 साल में कुछ नहीं बदले। साल 1978 में भी लाल किले के चारों तरफ बाढ़ का पानी लग गया था और आज 2023 में जब हम अमृतकाल में हैं, तब भी वैसे हालात है। इन वर्षों में राजधानी दिल्ली का विस्तार तो हुआ, उसे फ्लाईओवर का शहर कहा जाने लगा लेकिन पानी प्रबंधन को लेकर हालात में कोई सुधार नहीं दिखा।

घनी आबादी, बाढ़ और जलवायु परिवर्तन के खतरे से दुनिया भर के कई देश जूझ रहे हैं। लेकिन उसमें से कुछ देश ऐसे हैं जिन्होंने दिल्ली से ज्यादा बाढ़ के खतरे को बेहतर तरीके से मैनेज किया है। सिंगापुर का ड्रेनेज और कैनाल सिस्टम आज पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। ऐसे में इस तरह के मॉडल को अपनी जरूरतों के अनुसार बदलाव कर दिल्ली और भारत के दूसरे शहरों को बचाया जा सकता है।

2011-12 में बनाया खास सिस्टम

सिंगापुर विषुवत रेखा के पास स्थित है, वह समुद्र से भी घिरा हुआ है। और उसका साइज दिल्ली (1483 वर्ग किमी) की तुलना में करीब आधा (726 वर्ग किमी) है। ऐसे में उसे भारी और कम समय कहीं ज्यादा बारिश का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उसने बचने के लिए साल 2010-11 में एक खास प्लानिंग की। और उसके लिए उसने बारिश के पानी और इस्तेमाल होने वाला पानी का दो अलग-अलग सिस्टम तैयार किया। जिसे सोर्स-पॉथ वे-रिसेप्टर (Source-Pathway-Receptor) का नाम दिया गया।

सिंगापुर का ड्रेनेज सिस्टम

सिंगापुर का ड्रेनेज सिस्टम

8000 किलोमीटर लंबा ड्रेनेज सिस्टम

सिंगापुर की जल प्रबंधन सिस्टम PUB के अनुसार, देश में 8000 किलोमीटर लंबा नाला, नहर और नदी का सिस्टम है। जिसमें 2014 से 0.2 हेक्टेअर या उससे ज्यादा के एरिया वाली इमारत के लिए नया सोर्स सिस्टम अनिवार्य कर दिया गया। जिसका काम था बारिश और तूफान के पानी के फ्लो को धीमा करना था।

  • इसी तरह पॉथ-वे में बारिश और बाढ़ के पानी की क्षमता 10-50 फीसदी बढ़ाई गई।
  • रिसेप्टर सिस्टम के जरिए घरों, इमारतों में बाढ़ के पानी को रोकने के लिए बैरिअर लगाए गए।
  • इसके अलावा 90 करोड़ लीटर गंदे पानी को रोजाना ट्रीट कर इस्तेमाल करने का सिस्टम तैयार हुआ।
  • इसका फायदा यह हुआ कि बाढ़ और बारिश के पानी का प्रबंधन बेहतर हो सका और सिंगापुर दुनिया के देशों के लिए मिसाल भी बना।
प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

और पढ़ें
End of Article