Delhi Flood And Lesson From Singapore Model: दिल्ली की बाढ़ ने एक बार फिर हमारे शहर कों प्लानिंग और आपदा नियंत्रण पर सवाल खड़े कर दिए है। परेशान करने वाली बात यह है कि दिल्ली के हालात पिछले 45 साल में कुछ नहीं बदले। साल 1978 में भी लाल किले के चारों तरफ बाढ़ का पानी लग गया था और आज 2023 में जब हम अमृतकाल में हैं, तब भी वैसे हालात है। इन वर्षों में राजधानी दिल्ली का विस्तार तो हुआ, उसे फ्लाईओवर का शहर कहा जाने लगा लेकिन पानी प्रबंधन को लेकर हालात में कोई सुधार नहीं दिखा।
घनी आबादी, बाढ़ और जलवायु परिवर्तन के खतरे से दुनिया भर के कई देश जूझ रहे हैं। लेकिन उसमें से कुछ देश ऐसे हैं जिन्होंने दिल्ली से ज्यादा बाढ़ के खतरे को बेहतर तरीके से मैनेज किया है। सिंगापुर का ड्रेनेज और कैनाल सिस्टम आज पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। ऐसे में इस तरह के मॉडल को अपनी जरूरतों के अनुसार बदलाव कर दिल्ली और भारत के दूसरे शहरों को बचाया जा सकता है।
2011-12 में बनाया खास सिस्टम
सिंगापुर विषुवत रेखा के पास स्थित है, वह समुद्र से भी घिरा हुआ है। और उसका साइज दिल्ली (1483 वर्ग किमी) की तुलना में करीब आधा (726 वर्ग किमी) है। ऐसे में उसे भारी और कम समय कहीं ज्यादा बारिश का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उसने बचने के लिए साल 2010-11 में एक खास प्लानिंग की। और उसके लिए उसने बारिश के पानी और इस्तेमाल होने वाला पानी का दो अलग-अलग सिस्टम तैयार किया। जिसे सोर्स-पॉथ वे-रिसेप्टर (Source-Pathway-Receptor) का नाम दिया गया।

सिंगापुर का ड्रेनेज सिस्टम
8000 किलोमीटर लंबा ड्रेनेज सिस्टम
सिंगापुर की जल प्रबंधन सिस्टम PUB के अनुसार, देश में 8000 किलोमीटर लंबा नाला, नहर और नदी का सिस्टम है। जिसमें 2014 से 0.2 हेक्टेअर या उससे ज्यादा के एरिया वाली इमारत के लिए नया सोर्स सिस्टम अनिवार्य कर दिया गया। जिसका काम था बारिश और तूफान के पानी के फ्लो को धीमा करना था।
- इसी तरह पॉथ-वे में बारिश और बाढ़ के पानी की क्षमता 10-50 फीसदी बढ़ाई गई।
- रिसेप्टर सिस्टम के जरिए घरों, इमारतों में बाढ़ के पानी को रोकने के लिए बैरिअर लगाए गए।
- इसके अलावा 90 करोड़ लीटर गंदे पानी को रोजाना ट्रीट कर इस्तेमाल करने का सिस्टम तैयार हुआ।
- इसका फायदा यह हुआ कि बाढ़ और बारिश के पानी का प्रबंधन बेहतर हो सका और सिंगापुर दुनिया के देशों के लिए मिसाल भी बना।
