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अब नहीं होगी तेल और गैस की कमी? अरब सागर में उत्पादन बढ़ाने का काम शुरू, ONGC ने BP से मिलाया हाथ

Crude Oil Natural Gas Production: ONGC ने पश्चिमी समुद्री तेल-गैस क्षेत्रों का उत्पादन बढ़ाने के लिए ब्रिटेन की BP को तकनीकी सेवा प्रदाता बनाया है, जिससे 2027 से उत्पादन में वृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है।

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ओएनजीसी ने उत्पादन बढ़ाने के लिए BP के साथ बढ़ाई साझेदारी (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Crude Oil Natural Gas Production : पश्चिम एशिया संकट की वजह से देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसी बीच भारत की सरकारी तेल और गैस कंपनी Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) ने अपने पश्चिमी समुद्री तेल और गैस क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने के लिए ब्रिटेन की ऊर्जा कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम (BP) को तकनीकी सेवा प्रोवाइडल (TSP) नियुक्त किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य पुराने और परिपक्व हो चुके तेल-गैस क्षेत्रों से अधिक उत्पादन हासिल करना है, ताकि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय बोली प्रक्रिया के बाद हुआ चयन

ओएनजीसी ने बताया कि BP की भारतीय इकाई BP Exploration Services India Limited को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए चुना गया है। यह कंपनी मुंबई ऑफशोर बेसिन के पश्चिमी समुद्री क्षेत्रों में उत्पादन सुधारने का काम करेगी। हालांकि, इस समझौते में मुंबई हाई फील्ड शामिल नहीं है, क्योंकि उसके लिए पहले से अलग कॉन्ट्रैक्ट किया जा चुका है। मुंबई ऑफशोर बेसिन भारत का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण तेल-गैस उत्पादन क्षेत्र माना जाता है। यहां से देश के बड़े हिस्से की घरेलू तेल और गैस जरूरतें पूरी होती हैं।

मुंबई हाई में पहले से काम कर रही है BP

ओएनजीसी ने जनवरी 2025 में मुंबई हाई फील्ड के लिए भी BP को तकनीकी सेवा प्रदाता बनाया था। मुंबई हाई भारत का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र है और यह अकेले ओएनजीसी के पश्चिमी समुद्री उत्पादन का करीब 38 प्रतिशत हिस्सा देता है। कंपनी के अनुसार, शुरुआती महीनों में इस साझेदारी के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। उत्पादन में लगातार हो रही गिरावट अब कम हुई है और उत्पादन स्थिर होने लगा है। इसके पीछे बेहतर कुआं प्रबंधन, रिजर्वायर मॉनिटरिंग, आधुनिक तकनीक और उत्पादन सुविधाओं में सुधार जैसी पहलें जिम्मेदार हैं।

10 साल में तेल उत्पादन 10.8 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य

ओएनजीसी का कहना है कि BP की मदद से अगले 10 वर्षों में पश्चिमी समुद्री क्षेत्रों से कच्चे तेल का उत्पादन करीब 10.8 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। अनुमान के अनुसार कुल उत्पादन 46.25 मिलियन टन से बढ़कर 51.26 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। वहीं प्राकृतिक गैस उत्पादन में भी बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। गैस उत्पादन 82.68 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) से बढ़कर 108.69 BCM तक पहुंच सकता है, यानी करीब 31.5 प्रतिशत की वृद्धि। अगर तेल और गैस दोनों को मिलाकर देखा जाए तो कुल उत्पादन करीब 24 प्रतिशत बढ़कर 160 मिलियन टन ऑयल इक्विवेलेंट तक पहुंच सकता है।

2027 से दिखना शुरू होगा असर

ओएनजीसी के मुताबिक इस परियोजना का असर वित्त वर्ष 2027 से दिखना शुरू होगा, जबकि इसका पूरा प्रभाव वित्त वर्ष 2030 के बाद नजर आएगा। समझौते के तहत शुरुआती दो वर्षों तक BP को तय शुल्क दिया जाएगा। इसके बाद अतिरिक्त उत्पादन से होने वाली कमाई में से लागत निकालने के बाद कंपनी को हिस्सेदारी मिलेगी।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा सहारा

ओएनजीसी देश के कुल घरेलू कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा संभालती है। ऐसे में इस साझेदारी को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। कंपनी का कहना है कि नए तेल और गैस क्षेत्रों की खोज के साथ-साथ पुराने क्षेत्रों से ज्यादा उत्पादन निकालना भी उतना ही जरूरी है। इसी रणनीति के तहत वैश्विक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के जरिए पुराने क्षेत्रों की क्षमता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

पश्चिमी समुद्री क्षेत्र से जुड़ी बड़ी उम्मीदें

मुंबई ऑफशोर बेसिन में कुल 43 ब्लॉक हैं, जिनमें से 28 ब्लॉक ओएनजीसी को नामांकन के आधार पर दिए गए थे। इनमें मुंबई हाई और विशाल बसीन गैस फील्ड भी शामिल हैं। ओएनजीसी का मानना है कि BP के साथ यह नई साझेदारी पश्चिमी समुद्री क्षेत्रों की पूरी क्षमता को सामने लाने में मदद करेगी। इससे न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ेगा बल्कि भारत की आयात पर निर्भरता कम करने में भी सहायता मिलेगी।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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