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डूबते बाजार और भागते क्रूड के बीच क्यों 9% तक उछले ONCG और Oil India के शेयर?

शेयर बाजार में बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स-निफ्टी से लेकर तमाम स्टॉक में गिरावट है। लेकिन, इस बीच ONGC और Oil India के शेयरो में 9% तक की तेजी आई है।

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सरकार के फैसले शेयरों में तेजी

Share Market फिर से मार्च वाले रास्ते पर बढ़ता दिख रहा है, जहां पूरे बाजार में चौतरफा बिकवाली हावी है। क्रूड के दाम बाजार में पैनिक सेलिंग की सबसे बड़ी वजह है। हालांकि, क्रूड प्राइस में तेजी के चलते शुरू हुई व्यापक बिकवाली के दौर में भी कुछ शेयर बाजार से उल्टी दिशा में दौड़ रहे हैं। आज मंगलवार 12 मई को खासतौर पर ONGC और Oil India ने निवेशकों का ध्यान खींचा है।

Oil India में जहां करीब 9% का उछाल आया, वहीं ONGC करीब 6% तेजी में कारोबार कर रहा है। इनके अलावा और भी एनर्जी सेक्टर के शेयरों में मजबूती दिखी, खासतौर पर जो ऑयल और गैस एक्सप्लोरेशन, ड्रिलिंग और उत्पादन से जुड़े कारोबार करते हैं। इन शेयरों में उछाल के पीछे हाल में ही ड्रिलिंग और तेल खोज से जुड़े नियमों के आए बदलावों को अहम माना जा रहा है।

सरकार ने क्या बदला?

केंद्र सरकार ने 8 मई की अधिसूचना में Crude oil और Natural Gas के रॉयल्टी स्ट्रक्चर को नया रूप दिया। सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक ऑनशोर क्रूड ऑयल पर प्रभावी रॉयल्टी घटकर 10% और ऑफशोर क्रूड पर 8% रह गई है। प्राकृतिक गैस के लिए भी नए फ्लैट डिडक्शन फॉर्मुला के तहत लाया गया है। इससे गैस पर भी प्रभावी रॉयल्टी करीब 8% हो जाएगी। DSF और HELP ब्लॉक्स में डीपवाटर और अल्ट्रा डीप वाटर क्षेत्रों के लिए पहले सात साल शून्य रॉयल्टी और उसके बाद क्रमशः 5% तथा 2% की व्यवस्था रखी गई है।

ONGC और Oil India में आया उछाल?

इस बदलाव का सीधा फायदा अपस्ट्रीम कंपनियों को मिलेगा, जो ऑयल-गैस एक्सप्लोरेशन और ड्रिलिंग का काम करती हैं। इससे इन कंपनियों की रॉयल्टी घटने से उनकी लागत कम होती है और प्रॉफिट मार्जिन बढ़ने की उम्मीद बनती है। CLSA ने इस कदम को ONGC के लिए 7% से 9% तक और Oil India के लिए 9% से 11% तक फेयर वैल्यू बूस्ट बताया है। यही वजह रही कि बाजार में गिरावट के बावजूद दोनों सरकारी तेल कंपनियों के शेयर खरीदारी के केंद्र में आ गए।

बाजार के लिहाज से इसका मतलब क्या है

तेल महंगा होने से आमतौर पर आयात बिल, रुपये और महंगाई पर दबाव बढ़ता है। लेकिन, इसी दबाव के बीच अगर सरकार घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देती है, तो अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए यह संरचनात्मक राहत बन जाती है। इसलिए आज की ट्रेडिंग में बाजार भले ही कमजोर रहा, लेकिन ONGC और Oil India ने नीति-आधारित रैली के दम पर निवेशकों का ध्यान खींच लिया।

क्रूड उत्पादन को बड़ा बूस्ट

सरकार के इस फैसले को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश के अपस्ट्रीम सेक्टर के लिए बड़ा बूस्ट बताया है। उन्होंने कहा कि ऑयल फील्ड (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) अधिनियम यानी ORD Act के तहत रॉयल्टी रेशनलाइजेशन से भारत के ऑयल & गैस रिजीम में नई शुरुआत होगी।

पुरी के मुताबिक रिवाइज्ड फ्रेमवर्क का मकसद पुरानी विसंगतियों को खत्म कर रेगुलेटरी स्पष्टता देना है, ताकि एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन सेक्टर में निवेश बढ़ सके। सरकार ने क्रूड, गैस और केसिंग हेड कॉन्डेसेट पर रॉयल्टी कैल्कुलेशन का नया तरीका लागू किया है, जिससे कंपनियों के लिए पॉलिसी ज्यादा स्थिर बनेगी।

Groww shares लुढ़का

जहां, ऑयल गैस एक्सप्लोरेशन से जुड़े इन शेयरों में तेजी है। वहीं, ब्रोकरेज सर्विस देने वाली ग्रो के शेयरों में 4 फीसदी तक गिरावट हुई है। Groww Shares Price Decline के पीछे असल में 4750 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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