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Credit Score vs Credit Report: क्या है अंतर और क्यों एक गलती पड़ सकती है आपकी जेब पर भारी?

बैंक किसी भी व्यक्ति को लोन देने से पहले क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते हैं। इसके बाद ही लोन देने का फैसला करते हैं।

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बैंक लोन

Credit Score vs Credit Report: आज के समय में होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के लिए बेहतर क्रेडिट स्कोर होना बहुत जरूरी है। बैंक लोन की प्रक्रिया की शुरुआत ही क्रेडिट स्कोर चेक कर करते हैं। अगर क्रेडिट स्कोर खराब है और आपकी कमाई बहुत अच्छी है तो भी बैंक लोन देने से मना कर देते हैं। इसलिए बेहतर क्रेडिट स्कोर के लिए समय पर ईएमआई का भुगतान करने समेत कई बातों का ख्याल रखना चाहिए। आज हम आपको बता रहे हैं कि क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट में क्या फर्क होता है? बहुत सारे लोग इन दोनों को एक ही मान बैठते हैं, जबकि ऐसा है नहीं। आइए समझते हैं इनके बीच के फर्क को और कैसे इसे आप बेहतर बना सकते हैं।

क्रेडिट स्कोर क्या है?

भारत में जाने-माने क्रेडिट ब्यूरो, Equifax, Experian, CIBIL और CRIF High Mark क्रेडिट रिपोर्ट देते हैं। Credit Score 300-850 के बीच का तीन अंकों का एक नंबर होता है, जो कर्ज देने वालों के लिए आपके क्रेडिट रिस्क को तय करता है। यह आपके पिछले क्रेडिट व्यवहार से तय होता है और दिखाता है कि आप आर्थिक रूप से कितने जिम्मेदार हैं। कर्ज देने वाले अक्सर, कर्ज लेने के इच्छुक लोगों की क्रेडिट योग्यता का मूल्यांकन '5 Cs' का इस्तेमाल करके करते हैं। :

क्रेडिट रिपोर्ट क्या है?

आपकी क्रेडिट रिपोर्ट एक विस्तृत दस्तावेज, जो आपके क्रेडिट इतिहास का विवरण दर्ज करता है, उसे क्रेडिट रिपोर्ट कहा जाता है। इसमें पिछले डिफॉल्ट, संबंधित खाते, कर्ज और लंबित लोन, भुगतान और हाल के लेनदेन सूचीबद्ध होते हैं। यह लोन देने वालों को आपके क्रेडिट इतिहास और दीर्घकालिक वित्तीय व्यवहार की पूरी विस्तार से समीक्षा करने में मदद करता है।

क्रेडिट रिपोर्ट में मुख्य रूप से चार सेक्शन होते हैं, जो किसी व्यक्ति की वित्तीय साख का पूरा लेखा-जोखा पेश करता है। इसमें सबसे पहले पर्सनल जानकारी होती है, जिसमें कर्ज लेने वाले का नाम, जन्मतिथि, पैन (PAN) और संपर्क विवरण शामिल होते हैं। इसके बाद क्रेडिट अकाउंट का सेक्शन आता है, जहां मौजूदा और पिछले सभी लोन, क्रेडिट कार्ड, उनकी लिमिट और रीपेमेंट की समय-सीमा की विस्तृत जानकारी दी गई होती है। रिपोर्ट का सबसे संवेदनशील हिस्सा पेमेंट हिस्ट्री है, जो देरी से किए गए भुगतान, चूकी हुई तारीखों, डिफॉल्ट या सेटल किए गए अकाउंट का पूरा रिकॉर्ड दिखाता है। अंत में, हार्ड इंक्वायरी का सेक्शन होता है, जो यह दर्शाता है कि किसी बैंक या संस्था ने लोन आवेदन के दौरान आपकी क्रेडिट प्रोफ़ाइल का कितनी बार 'हार्ड चेक' किया है।

लोन लेने के लिए दोनों क्यों महत्वपूर्ण है?

बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि लोन लेने के लिए क्रेडिट स्कोर से लेकर क्रेडिट रिपोर्ट दोनों जरूरी है। ऐसा इसलिए कि बैंक लोन देने में सबसे पहले क्रेडिट स्कोर चेक करते हैं। उसके बाद वह क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते हैं। क्रेडिट रिपोट लोन दिलाने में काफी अहम होता है। अगर यह साफ-सुथरा है तो बैंक आसानी से लोन दे देते हैं। वहीं इसमें समस्या होने पर बैंक लोन देने से मना कर सकते हैं।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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