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Climate Change: दुनिया का तापमान बढ़ने से ग्लोबल GDP को लगेगा झटका, आ सकती है 40% की गिरावट

Climate Change Impact on Economy: ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर्स की एक टीम ने मंगलवार को कहा कि अगर वैश्विक स्तर पर तापमान में 4 डिग्री की वृद्धि होती है तो दुनिया की जीडीपी में वर्ष 2100 तक करीब 40 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल सकती है। इसमें पिछले अनुमान के मुकाबले 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

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तापमान बढ़ने से ग्लोबल GDP को लगेगा झटका

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • बढ़ता तापमान दुनिया के लिए खतरा
  • ग्लोबल इकोनॉमी होगी प्रभावित
  • जीडीपी घट सकती है 40 फीसदी

Climate Change Impact on Economy: ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर्स की एक टीम ने मंगलवार को कहा कि अगर वैश्विक स्तर पर तापमान में 4 डिग्री की वृद्धि होती है तो दुनिया की जीडीपी में वर्ष 2100 तक करीब 40 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल सकती है। इसमें पिछले अनुमान के मुकाबले 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (यूएनएसडब्ल्यू) के इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट रिस्क एंड रिस्पॉन्स (आईसीआरआर) के नए अनुमान के मुताबिक, रिसर्च के परिणाम वैश्विक तापमान को 1.7 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का समर्थन करते हैं, जो कि पेरिस समझौते जैसे तीव्र डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के अनुरूप है और पिछले मॉडलों के तहत समर्थित 2.7 डिग्री सेल्सियस से काफी कम है।

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ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्कतें

मुख्य रिसर्चर डॉ. टिमोथी नील ने कहा, "अर्थशास्त्री पारंपरिक रूप से क्लाइमेट डैमेज की लागत का आकलन करने के लिए मौसम की घटनाओं की तुलना आर्थिक विकास से करते हुए ऐतिहासिक आंकड़ों को देखते रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि वे इस बात का हिसाब देने में विफल रहे हैं कि वर्तमान में आर्थिक झटकों से निपटने के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्कतें उत्पन्न हो रहा है।

गर्म मौसम है मुसीबत

डॉ. नील के मुताबिक, "आने वाले समय में मौसम गर्म होने का प्रभाव भी सप्लाई चेन पर देखने को मिलेगा।" उन्होंने आगे कहा कि इन नुकसानों को ध्यान में नहीं रखा गया है, इसलिए पहले के आर्थिक मॉडल ने अनजाने में यह निष्कर्ष निकाला है कि गंभीर जलवायु परिवर्तन भी अर्थव्यवस्था के लिए कोई बड़ी समस्या नहीं है।

लोकल-ऑन्ली डैमेज मॉडल का उपयोग आर्थिक पूर्वानुमान में किया गया है जिसने प्रमुख शक्तियों की जलवायु नीतियों को आकार दिया है और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ठंडे देशों को होगा फायदा

डॉ. नील ने कहा, "यह माना जाता है कि रूस या कनाडा जैसे कुछ ठंडे देशों को जलवायु परिवर्तन से लाभ होगा, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला निर्भरता का मतलब है कि कोई भी देश इससे अछूता नहीं है।"

स्टडी में बताया गया कि हालांकि, अभी भी काम किया जाना बाकी है क्योंकि उनके शोध में जलवायु अनुकूलन, जैसे मानव प्रवास, को शामिल नहीं किया गया है, जो राजनीतिक और तार्किक रूप से जटिल है और इसके लिए अभी तक पूरी तरह से मॉडल नहीं बनाया गया है। (इनपुट - आईएएनएस)

Kashid Hussain
काशिद हुसैन author

<p>काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की बिजनेस टीम में वह शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और आर्थिक जगत से जुड़ी सभी तरह की स्टोरी और वेब स्टोरी करते हैं। रिसर्च आधारित स्टोरी के लिए नए एंगल तलाश करना और रीडर्स की रुचि के अनुसार कॉपी लिखने पर फोकस रहता है। शेयर बाजार में खास रुचि है और इससे जुड़ी रियल टाइम खबरें कम समय में लगाने में विशेषज्ञता है। मीडिया में काम करने का 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें गुडरिटर्न्स और शेयर मंथन वेबसाइटों के अलावा निवेश मंथन पत्रिका में भी काम किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन के बाद आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो एंव टेलीविजन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ग्रेजुएशन के दौरान सहारा समय और सिटी न्यूज में इंटर्नशिप के साथ-साथ अखबार और वेबसाइट के लिए लिखना शुरू कर दिया था। काशिद को किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और क्रिकेट में रुचि है। बिजनेस के अलावा खेल जगत और इंटरनेशनल खबरों में भी रुचि है।<br></p>

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