China economy growth: पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के बीच चीन की अर्थव्यवस्था ने 2026 की पहली तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया है। जनवरी से मार्च के बीच देश का सकल घरेलू उत्पाद (China GDP growth) 5% बढ़ा, जो पिछली तिमाही के 4.5% से अधिक है। यह आंकड़ा बाजार के अनुमान (4.8%) से भी बेहतर रहा। हालांकि, यह वृद्धि मुख्य रूप से निर्यात पर आधारित रही, जबकि घरेलू मांग कमजोर बनी हुई है। सरकारी लक्ष्य के अनुसार चीन ने इस साल विकास दर का लक्ष्य 4.5% से 5% के बीच रखा है, जो पिछले कई दशकों में सबसे सतर्क लक्ष्य माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार को धीमी होती घरेलू मांग और वैश्विक व्यापार तनावों की चिंता है।
निर्यात मजबूत, लेकिन घरेलू मांग कमजोर
पहली तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ा सहारा निर्यात से मिला। इस दौरान निर्यात में 14.7% की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले कुछ वर्षों में सबसे तेज़ वृद्धि में से एक है। चीन की फैक्ट्रियों ने वैश्विक बाजार में मजबूत मांग का फायदा उठाया। लेकिन दूसरी तरफ घरेलू खपत कमजोर रही। खुदरा बिक्री (Retail Sales) केवल 2.4% की दर से बढ़ी, जो उम्मीद से कम है। मार्च में तो यह वृद्धि घटकर 1.7% रह गई। इसका मतलब है कि चीन के अंदर लोग अभी भी खर्च करने में सावधानी बरत रहे हैं, खासकर महंगी चीजों जैसे गाड़ियां खरीदने में।
उद्योग और निवेश का मिला-जुला प्रदर्शन
औद्योगिक उत्पादन में 5.7% की वृद्धि हुई, जो अनुमान से थोड़ी बेहतर है। इससे पता चलता है कि चीन की मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी भी मजबूत बना हुआ है और आर्थिक विकास में मुख्य भूमिका निभा रहा है। लेकिन निवेश के मोर्चे पर स्थिति कमजोर रही। पूरे देश में फिक्स्ड एसेट इन्वेस्टमेंट केवल 1.7% बढ़ा, जो उम्मीद से कम है। खासकर रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ी गिरावट देखी गई, जहां निवेश 11.2% तक गिर गया। यह चीन के लंबे समय से चल रहे प्रॉपर्टी संकट को दिखाता है।

निर्यात के दम पर चीन की अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार, लेकिन घरेलू मांग की कमजोरी और ऊर्जा संकट ने बढ़ाई चिंता (तस्वीर-istock)
महंगाई और ऊर्जा संकट का असर
हाल ही में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और मध्य-पूर्व के तनाव ने चीन की अर्थव्यवस्था पर असर डाला है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से उत्पादन लागत बढ़ी है और कई देशों में व्यापार धीमा हुआ है। चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है, इस स्थिति से प्रभावित हुआ है। हालांकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कुल ऊर्जा आपूर्ति में ईरान और संबंधित क्षेत्रों से आने वाले तेल का हिस्सा सीमित है, इसलिए इसका घरेलू अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ा है। फिर भी, मार्च में फैक्ट्री-गेट प्राइस (थोक कीमतें) में बढ़ोतरी देखी गई, जो तीन साल में पहली बार हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि लागत बढ़ने का दबाव अब उद्योगों पर पड़ रहा है।
भविष्य की चुनौतियां
एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन की अर्थव्यवस्था अभी असंतुलित स्थिति में है। एक तरफ उत्पादन और निर्यात मजबूत हैं, लेकिन दूसरी तरफ घरेलू मांग कमजोर है। यही असंतुलन लंबे समय में विकास को धीमा कर सकता है। इसके अलावा, अगर वैश्विक तेल संकट या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो चीन के निर्यात बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है। इससे फैक्ट्रियों की कमाई और आर्थिक गति दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
चीन की अर्थव्यवस्था ने साल की शुरुआत मजबूत तरीके से की है, लेकिन यह मजबूती मुख्य रूप से निर्यात पर आधारित है। घरेलू खपत, निवेश और रियल एस्टेट सेक्टर अभी भी कमजोर हैं। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार घरेलू मांग बढ़ाने और बाहरी जोखिमों से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है।
