China Warning to US: चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी लगाने के खिलाफ चेतावनी दी है और उसे चीन के ईरान के साथ द्विपक्षीय संबंधों में दखल न देने की हिदायत दी है। रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून की यह चेतावनी सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी शुरू होने के ठीक उसी समय आई।
जून ने कहा, 'हमारे ईरान के साथ व्यापार और ऊर्जा समझौते हैं; हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे हमारे मामलों में दखल नहीं देंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य चीन के लिए खुला रहेगा।
चीन के लिए क्यों जरूरी खुला होर्मुज?
यह जलमार्ग बीजिंग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उसकी लगभग 40 प्रतिशत तेल और कम से कम 30 प्रतिशत LNG जरूरतों की आपूर्ति करता है। इसलिए, चीन खाड़ी में स्थित इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष-विराम पर जोर दे रहा है।
चीन पर क्यों निशाना साध दिया अमेरिका ने?
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप की नौसैनिक नाकाबंदी का निशाना चीनी युआन हो सकता है, जिसका इस्तेमाल कुछ जहाज खाड़ी के अहम समुद्री रास्ते (चोकपॉइंट) से गुजरने के लिए करते हैं। इसे दशकों पुरानी पेट्रोडॉलर व्यवस्था के लिए एक चुनौती और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने का एक जरिया माना जाता है।
चीन ने संघर्ष-विराम का समर्थन किया
इस बीच, चीन के विदेश मंत्रालय ने संघर्ष-विराम के लिए अपने समर्थन को दोहराते हुए तर्क दिया है कि जलमार्ग की सुरक्षा, स्थिरता और बिना किसी रुकावट के आवाजाही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों को पूरा करती है।
SCMP ने प्रवक्ता गुओ जियाकुन के हवाले से कहा, 'जलडमरूमध्य से होकर नौकायन में आने वाली रुकावटों का मूल कारण ईरान से जुड़ा संघर्ष है, और इस मुद्दे को सुलझाने का तरीका यह है कि जल्द से जल्द संघर्ष-विराम किया जाए और शत्रुता समाप्त की जाए।'
उन्होंने यह भी कहा कि चीन मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने में सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां चीन, अमेरिका के साथ अपने प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा कर रहा है।
ट्रंप ने नाकेबंदी की घोषणा की
11 अप्रैल को ईरान के साथ हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के किसी ठोस नतीजे पर पहुंचे बिना ही टूट जाने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना, रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के रास्ते ईरानी बंदरगाहों तक समुद्री पहुंच की नाकेबंदी करेगी।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (Centcom) ने कहा कि इस नाकेबंदी का निशाना वे सभी जहाज होंगे जो ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश कर रहे होंगे या वहां से बाहर निकल रहे होंगे। एक बयान में, Centcom ने आगे कहा कि यह कदम ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों का उपयोग करने वाले 'सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू किया जाएगा।'
अमेरिकी सेना ने कहा कि इस नाकेबंदी से, जलडमरूमध्य के रास्ते गैर-ईरानी गंतव्यों तक या वहां से आने-जाने वाले तटस्थ जहाजों की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं आएगी।
हालांकि, तटस्थ जहाजों की अभी भी जांच और तलाशी (right of visit and search) ली जा सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उनमें कोई प्रतिबंधित माल (contraband cargo) तो नहीं है; वहीं, नाकेबंदी वाले क्षेत्र में बिना अनुमति के प्रवेश करने या वहां से बाहर निकलने वाले जहाजों को रोका जा सकता है, उनका मार्ग बदला जा सकता है, और उन्हें कब्जे में लिया जा सकता है।
ईरान के मुद्दे पर ट्रंप बनाम चीन
चल रहे इस संघर्ष के मुद्दे पर चीन और अमेरिका एकमत नहीं हैं। 28 फरवरी को शत्रुता शुरू होने के बाद, बीजिंग ने ईरान पर हुए इजरायल-अमेरिका के हमले की निंदा की थी।
वहीं, अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर बीजिंग, ईरान के साथ इस तरह से जुड़ता है जो अमेरिका के हितों के खिलाफ हो, तो उसके लिए परेशान पैदा हो सकती हैं।
ट्रंप ने बीजिंग को यह भी धमकी दी है कि अगर वह तेहरान को हथियार सप्लाई करता है, तो उस पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीजिंग, ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम की खेप भेजने की तैयारी कर रहा हो सकता है। हालांकि, चीन ने ऐसी रिपोर्टों को बेबुनियाद आरोप और दुर्भावनापूर्ण जोड़-तोड़ बताकर खारिज कर दिया है।
