भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने साफ कहा है कि मौजूदा वित्त वर्ष (FY27) में भारत के सामने सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती चालू खाता घाटा (CAD) संभालना और रुपये को और गिरने से बचाना होगा। CII के सालाना इवेंट में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट केवल जियो-पॉलिटकल तनाव नहीं है, बल्कि भारत के लिए “लाइव बैलेंस ऑफ पेमेंट्स स्ट्रेस टेस्ट” है।
रिकॉर्ड लो पर रुपया, कच्चे तेल ने बढ़ाई टेंशन
मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 95.62 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। इससे पहले बीते हफ्ते 95.4325 का रिकॉर्ड लो बना था। अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव तेजी से बढ़ा है। इसे लकेर CEA ने कहा कि चालू खाता घाटा, उसकी फंडिंग और रुपये को और फिसलने से रोकना FY27 की सबसे बड़ी “मैक्रोइकॉनॉमिक इम्परेटिव” होगी।
हर मोर्चे पर चिंता
भारत अपनी जरूरत का करीब 87% कच्चा तेल आयात करता है और युद्ध से पहले इसमें से लगभग 46% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रूट से आती थी। इसके अलावा LPG आयात का 90% से ज्यादा और प्राकृतिक गैस आयात का करीब 95% हिस्सा भी इसी रूट से जुड़ा रहा है। सिर्फ ऊर्जा ही नहीं, भारत खाद उद्योग के लिए जरूरी अमोनिया और सल्फर जैसे फर्टिलाइजर इनपुट्स के लिए भी खाड़ी देशों पर निर्भर है। इतना ही नहीं, भारत को मिलने वाली कुल विदेशी रेमिटेंस का लगभग 38% हिस्सा भी गल्फ देशों से आता है।
‘सप्लाई शॉक’ से महंगाई का खतरा
CEA ने पश्चिम एशिया संकट को “सिग्निफिकेंट सप्लाई शॉक और पॉसिबल डिमांड शॉक” बताया। उन्होंने कहा कि जुलाई 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स सालाना आधार पर 82.1% और युद्ध शुरू होने के बाद 51.3% तक चढ़ चुके हैं। उधर यूरिया मिडिल ईस्ट फ्यूचर्स भी एक साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ चुके हैं। इसका सीधा असर भारत के कृषि सेक्टर और खाद सब्सिडी बिल पर पड़ सकता है।
होर्मुज संकट ने बढ़ाया फ्रेट और इंश्योरेंस कॉस्ट
ईरान और ओमान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टैंकर मूवमेंट बुरी तरह प्रभावित हुआ है। CEA के मुताबिक मई 2026 की शुरुआत तक 7-दिन की एवरेज टैंकर ट्रैफिक घटकर सिर्फ 9 रह गई, जबकि फरवरी में यह 341 थी। मिडिल ईस्ट से चीन तक जाने वाले VLCC फ्रेट रेट्स भी युद्ध शुरू होने के बाद 70% से ज्यादा बढ़ गए हैं। इसका असर भारत की आयात लागत और महंगाई दोनों पर दिख सकता है।
PM Modi की ‘गोल्ड इम्पोर्ट’ अपील का भी जिक्र
CEA ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने और लोकल प्रोडक्ट अपनाने की बात कही थी। सरकार मानती है कि सोने का भारी आयात विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ाता है, खासकर तब जब कच्चे तेल की कीमतें ऊंची हों और रुपया कमजोर हो रहा हो।
