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Loan लेना हुआ महंगा! Canara Bank ने बढ़ा दी ब्याज दरें; महंगी हुई होम लोन की EMI

अगर आप Canara Bank के मौजूदा ग्राहक हैं या बैंक से लोन लेने की योजना बना रहे हैं तो आपकी जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। बैंक ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट को बढ़ा दिया है।

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Canara Bank (Photo: iStock)

Canara Bank ने अपने सभी लोन अवधि के लिए एमसीएलआर (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) में बदलाव किया है। बैंक ने सभी अवधि की MCLR दरों में 5 बेसिस प्वाइंट (0.05 प्रतिशत) की बढ़ोतरी की है। बैंक की ओर से BSE फाइलिंग में इसकी जानकारी दी गई। नई MCLR दरें 12 मई 2026 से लागू हो गई हैं। इस बदलाव का असर फ्लोटिंग ब्याज दर वाले होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की EMI पर पड़ सकता है।

कितनी बढ़ी ब्याज दर

Canara Bank Hikes Lending Rates

Canara Bank (Photo: iStock)

Canara Bank ने ओवरनाइट MCLR को 7.85% से बढ़ाकर 7.90% कर दिया है, जबकि 1 महीने की MCLR अब 7.95% हो गई है, जो पहले 7.90% थी। सबसे ज्यादा ध्यान 1 साल की MCLR पर रहता है, क्योंकि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे कई रिटेल लोन इसी से जुड़े होते हैं। अब 1 साल की MCLR 8.70% से बढ़कर 8.75% हो गई है। इसका असर आने वाले समय में कुछ ग्राहकों की EMI पर पड़ सकता है।

एमसीएलआर की अवधिपुरानी ब्याज दर (%)नई ब्याज दर (%)
ओवरनाइट7.857.90
एक महीना7.907.95
तीन महीने8.158.20
6 महीने8.508.55
1 साल8.708.75
2 साल8.959.00
3 साल9.009.05

कब से लागू होंगी नई दरें?

Canara Bank के अनुसार, जिन ग्राहकों ने MCLR से जुड़े फ्लोटिंग रेट लोन लिए हैं, उनकी ब्याज दर और EMI में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि इसका असर तुरंत सभी ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि यह उनके लोन की रीसेट डेट और एग्रीमेंट की शर्तों पर निर्भर करेगा। बैंक ने अपनी वेबसाइट पर जानकारी देते हुए बताया है कि नई MCLR दरें 12 मई 2026 या उसके बाद मंजूर किए गए नए लोन, पहली बार जारी किए गए कर्ज और रिन्यू या रीसेट किए गए लोन पर लागू होंगी। साथ ही, जो ग्राहक MCLR आधारित ब्याज दर पर स्विच करना चाहते हैं, उनके लिए भी ये नई दरें इसी तारीख से लागू होंगी।

MCLR क्या होता है?

MCLR यानी Marginal Cost of Funds Based Lending Rate वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जिस पर बैंक ग्राहकों को लोन देते हैं। आसान भाषा में समझें तो यह वह बेस रेट है, जिसके आधार पर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसी कई फ्लोटिंग ब्याज दर वाली EMI तय होती हैं। अगर बैंक MCLR बढ़ाता है, तो लोन की ब्याज दर और EMI भी बढ़ सकती है, जबकि MCLR घटने पर EMI कम होने की संभावना रहती है। बैंक समय-समय पर अपनी फंडिंग लागत और बाजार की स्थिति के अनुसार MCLR में बदलाव करते हैं।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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