क्या है पूरा मामला
मामले में सवाल उठाया गया कि क्या कनाडाई प्रांत सस्केचेवान में एक किसान 2021 में एक अनाज खरीदार को 87 मीट्रिक टन फ्लैक्स बेचने के लिए सहमत हुआ था। खरीदार ने कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए थे और किसान को इसकी एक तस्वीर भेजी थी, जिसने जवाब में "थम्स-अप इमोजी'' भेज दी थी। इसी इमोजी को कॉन्ट्रैक्ट को स्वीकार करने वाला माना गया है।
कनाडाई समाज के लिए नई हकीकत
फैसला सुनाने वाले न्यायाधीश ने इसे "कनाडाई समाज में नई वास्तविकता" कहा, जिसका सामना अदालतों को करना होगा क्योंकि अब ज्यादातर लोग अपनी भावनाओं को दिल, मुस्कुराते चेहरे और फायर इमोजी के साथ व्यक्त करते हैं। यहां तक कि लोग गंभीर बिजनेस लेनदेन या पर्सनल विवादों में भी ऐसा करते हैं।
क्या है विवाद
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार किसान, क्रिस एक्टर का कहना है कि थम्स-अप इमोजी ने बस इस बात की पुष्टि करती है की कि उन्हें फ्लैक्स का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। उन्हें लगा कि फुल कॉन्ट्रैक्ट फैक्स या ईमेल के जरिए भेजा जाएगा।
वहीं अनाज खरीदार, केंट मिकलेबोरो ने बताया कि उन्होंने एक्टर के सेलफोन पर कॉन्ट्रैक्ट की तस्वीर भेजी और लिखा कि कृपया फ्लैक्स कॉन्ट्रैक्ट की पुष्टि करें। जवाब में एक्टर ने थम्स-अप इमोजी भेज दी, जिसे उन्हों कॉन्ट्रैक्ट को स्वीकार करना मान लिया।
क्या रही जज की दलील
फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति टी.जे. कीन ने डिक्शनरी.कॉम की थम्स-अप इमोजी की परिभाषा का हवाला दिया, जिसके मुताबिक इसे डिजिटल कम्युनिकेशन में सहमति, मंजूरी या प्रोत्साहन व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है।
