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क्या लॉकर में रखा सामान देख सकता है बैंक? चोरी या गायब होने पर क्या हैं मुआवजे के नियम

अगर आपका भी सामान बैंक के लॉकर में रखा है तो आपके मन में भी ये सवाल जरूर आता होगा कि क्या बैंक आपके लॉकर में रखा सामान देख सकते हैं क्या? आइए आपको बताते हैं बैंक लॉकर को लेकर क्या है RBI के नियम।

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Bank Locker Rules

क्या बैंक को पता होता है कि आपके लॉकर के अंदर सोना है या सिर्फ कागजात? और अगर खुदा-न-खास्ता बैंक में चोरी हो जाए, तो क्या आपको आपके गहनों की पूरी कीमत वापस मिलेगी? बैंक लॉकर को सबसे सुरक्षित ठिकाना मानने वाले करोड़ों ग्राहकों के इन सवालों पर खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने बैंकिंग नियमों और गोपनीयता (Privacy) के उन पहलुओं को उजागर किया है, जिन्हें जानना हर लॉकर धारक के लिए बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं, आपके कीमती सामान की सुरक्षा और मुआवजे का असली सच।

बैंक लॉकर को आमतौर पर कीमती गहनों, महत्वपूर्ण दस्तावेजों और नकदी को सुरक्षित रखने का सबसे भरोसेमंद जरिया माना जाता है। लेकिन कई बार ग्राहकों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या बैंक को पता होता है कि उनके लॉकर के अंदर क्या रखा है? या फिर, अगर बैंक में चोरी हो जाए या लॉकर टूट जाए, तो उन्हें कितना मुआवजा मिलेगा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बताया कि बैंकिंग नियमों के तहत ग्राहकों की गोपनीयता सर्वोपरि है और बैंक आपके लॉकर के भीतर झांक नहीं सकते।

क्या बैंक देख सकता है आपके लॉकर का सामान?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए स्पष्ट किया कि बैंक अधिकारियों के पास यह अधिकार नहीं है कि वे किसी ग्राहक के लॉकर में रखे सामान को देख सकें या उसका रिकॉर्ड रखें। यदि कोई बैंक ऐसा करने की कोशिश करता है, तो यह बैंकिंग गोपनीयता नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। बैंक केवल लॉकर की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, न कि उसके भीतर रखी गई सामग्री की सूची बनाने के लिए। यही कारण है कि जब आप लॉकर रूम में जाते हैं, तो बैंक अधिकारी आपको अकेले छोड़ देता है ताकि आप पूरी गोपनीयता के साथ अपना सामान रख सकें या निकाल सकें।

मुआवजे का क्या है नियम?

बैंक को यह जानकारी नहीं होती कि लॉकर के अंदर सोना है, नकदी है या सिर्फ कागज, इसलिए सामान की वास्तविक कीमत के आधार पर बीमा (Insurance) देना व्यावहारिक रूप से असंभव है। वित्त मंत्री ने समझाया कि अगर किसी कारणवश लॉकर टूट जाता है, बैंक में चोरी हो जाती है या बिल्डिंग गिरने जैसी स्थिति में सामान का नुकसान होता है, तो मुआवजे के लिए एक 'मानक मानक' (Standard Formula) तय किया गया है। वर्तमान नियमों के अनुसार, बैंक ग्राहक को उसके सालाना लॉकर किराये का 100 गुना मुआवजा देने के लिए बाध्य है। उदाहरण के तौर पर, यदि आपके लॉकर का सालाना किराया ₹2,000 है, तो नुकसान की स्थिति में बैंक आपको अधिकतम ₹2 लाख तक का हर्जाना देगा।

बीमा क्यों नहीं मिलता?

अक्सर लोग सवाल करते हैं कि बैंक हमारे सामान का पूरा बीमा क्यों नहीं करवाता? इसका सीधा जवाब वित्त मंत्री ने दिया कि बीमा के लिए सामान का मूल्यांकन (Valuation) जरूरी है। यदि बैंक सामान की जांच नहीं कर सकता, तो वह उसकी कीमत का अंदाजा भी नहीं लगा सकता। ऐसे में हर लॉकर के लिए अलग-अलग बीमा पॉलिसी बनाना मुमकिन नहीं है। इसीलिए सरकार और आरबीआई ने सालाना किराये के 100 गुना वाले फॉर्मूले को सबसे सटीक और निष्पक्ष माना है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में ग्राहक को एक तय राशि मिल सके।

ग्राहकों के लिए सुरक्षा के टिप्स

भले ही बैंक 100 गुना मुआवजे की बात करता है, लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि ग्राहकों को अपने कीमती सामान का निजी तौर पर बीमा (Private Insurance) कराना चाहिए। कई साधारण 'होम इंश्योरेंस' पॉलिसियों में बैंक लॉकर के सामान को कवर करने का विकल्प भी मिलता है। इसके अलावा, ग्राहकों को समय-समय पर अपना लॉकर ऑपरेट करते रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बैंक के रिकॉर्ड में उनका विवरण अपडेटेड है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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