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क्या शादीशुदा बेटी मायके में रख सकती है अपना सोना या गहने?

शादी के बाद भी कई महिलाएं अपने सोने के गहने मायके में सुरक्षित रखती हैं। लेकिन क्या ऐसा करने पर इनकम टैक्स विभाग सवाल उठा सकता है? दिल्ली ITAT के एक अहम फैसले ने इस मामले में स्थिति साफ की है।

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क्या शादीशुदा बेटी मायके में रख सकती है अपना सोना?

शादी हो गई तो क्या बेटी का अपने मायके पर हक खत्म हो जाता है? और क्या शादी के बाद भी वह अपने सोने के गहने माता-पिता के घर रख सकती है? अगर इनकम टैक्स विभाग को मायके में बेटी के गहने मिल जाएं, तो क्या उन पर टैक्स लग सकता है? इस सवाल पर ITAT ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसे हर बेटी और उसके परिवार को जानना चाहिए। शादी के बाद बेटी अपने गहने मायके में रख सकती है। सिर्फ इस आधार पर कि वह शादी के बाद पति के घर रहती है और उसके गहने माता-पिता के घर मिले हैं, उन्हें पिता की अघोषित संपत्ति नहीं माना जा सकता। दिल्ली स्थित इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने एक मामले में यह बात स्पष्ट की है। ट्रिब्यूनल ने आयकर विभाग की ओर से की गई 92 लाख रुपये की टैक्स संबंधी बढ़ोतरी को रद्द कर दिया। इस मामले में एक व्यक्ति के घर से मिले करीब 3.9 किलो गहनों को लेकर विवाद हुआ था। करदाता का कहना था कि ये गहने उसकी दिवंगत पत्नी और तीन शादीशुदा बेटियों के हैं।

आयकर विभाग ने क्यों उठाए थे सवाल?

यह मामला जनवरी 2019 का है, जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक व्यक्ति के घर की तलाशी के दौरान करीब 21 लाख रुपये नकद और 3.9 किलो गहने बरामद किए थे। इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने गहनों के स्रोत पर सवाल उठाए। करदाता ने बताया कि ये गहने उसकी पत्नी और बेटियों को शादी के दौरान परिवार और ससुराल पक्ष से उपहार में मिले थे। लेकिन विभाग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। उसका कहना था कि शादीशुदा बेटियां अपने पति के साथ रहती हैं, इसलिए उनके गहने मायके में नहीं होने चाहिए। विभाग ने 1,600 ग्राम गहनों को सही माना, लेकिन बाकी 2.3 किलो गहनों को अघोषित निवेश मानते हुए 92 लाख रुपये की अतिरिक्त आय जोड़ दी।

बेटी के गहनों के मालिकाना हक के लिए दिए गए ये सबूत

करदाता ने ITAT के सामने अपने पक्ष में कई सबूत पेश किए। इसमें परिवार के सदस्यों और बेटियों के ससुराल पक्ष के लोगों के हलफनामे शामिल थे। इन हलफनामों में बताया गया कि बेटियों को उनकी शादी के दौरान 1974, 2001, 2004 और 2005 में गहने उपहार में मिले थे। इसके अलावा शादी की तस्वीरें भी पेश की गईं, जिनमें गहनों की पहचान की जा सकती थी। करदाता ने यह भी बताया कि उसके परिवार ने सालों में करीब 5.93 करोड़ रुपये की आय पर टैक्स दिया है। यानी परिवार की आर्थिक स्थिति भी गहनों के मालिकाना हक और उनके पुराने होने की दलील को समर्थन देती है।

ITAT ने क्यों रद्द की 92 लाख रुपये की टैक्स मांग?

ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत में शादीशुदा बेटियों का अपना स्त्रीधन या गहने मायके में रखना सामान्य पारिवारिक परंपरा है। ऐसा कोई कानूनी नियम नहीं है, जो किसी व्यक्ति को अपने रिश्तेदारों के गहने घर में रखने से रोकता हो। ITAT ने हलफनामों, शादी की तस्वीरों और परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आयकर विभाग की दलील को सही नहीं माना। साथ ही, विभाग ने गहनों का स्वतंत्र मूल्यांकन भी नहीं कराया था। इन आधारों पर ट्रिब्यूनल ने 92 लाख रुपये की पूरी टैक्स बढ़ोतरी रद्द कर दी।

सोने के गहनों पर CBDT का क्या नियम है?

CBDT के 11 मई 1994 के सर्कुलर के मुताबिक, इनकम टैक्स की तलाशी के दौरान आमतौर पर शादीशुदा महिला के 500 ग्राम, अविवाहित महिला के 250 ग्राम और पुरुष सदस्य के 100 ग्राम तक गहने जब्त नहीं किए जाते। हालांकि, यह सोना रखने की अधिकतम सीमा या पूरी तरह टैक्स-फ्री छूट नहीं है। सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि सोना रखने की कोई तय सीमा नहीं है, बशर्ते उसके खरीदने, उपहार में मिलने या विरासत में मिलने का स्रोत समझाया जा सके। इसलिए गहनों के बिल, शादी की तस्वीरें, उपहार से जुड़े दस्तावेज और दूसरे सबूत संभालकर रखना फायदेमंद है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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