बजट 2026

Share Buyback Rule:एक अक्टूबर से लागू होगा शेयरों के बॉयबैक का नियम, माना जाएगा डिविडेंड, देना होगा ज्यादा टैक्स

Share Buyback: बॉयबैक पर लाभांश के रूप में कर लगाने से निवेशकों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। अभी तक इसपर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है। अब इसका इस्तेमाल केवल वहीं कंपनियां करेंगी, जहां उन्हें वास्तव में पूंजी में कमी की जरूरत महसूस होगी, न कि मुनाफे के वितरण के लिए ऐसा करेंगी।

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शेयर बॉयबैक

Share Buyback:शेयर बॉयबैक ( Share Buyback) पर नया टैक्स सिस्टम एक अक्टूबर से लागू होगा। यानी एक अक्टूबर से अगर कोई निवेशक शेयर बॉयबैक का फायदा लेता है तो उसे डिविडेंड माना जाएगा। और उस आधार पर टैक्स लगेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस संबंध में कहा है कि एक अक्टूबर से शेयरों की पुनर्खरीद पर शेयरधारकों को मिलने वाले लाभांश के समान कर लगाया जाएगा।इसके अलावा, इन शेयरों को हासिल करने के लिए शेयरधारक जिस राशि का भुगतान करेंगे, उसे उनके पूंजीगत लाभ या हानि की गणना में जोड़ा जाएगा।

वित्त मंत्री ने बजट में क्या किया ऐलान

सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा इक्विटी के लिए मैं प्राप्तकर्ता के हाथों में शेयरों की पुनर्खरीद यानी बॉयबैक से हुई आय पर कर लगाने का प्रस्ताव करती हूं। इसके तहत कंपनियों के शेयरों की पुनर्खरीद से होने वाली आय को प्राप्तकर्ता निवेशक को मिले लाभांश के रूप में माना जाएगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत इसे कंपनियों को हुई अतिरिक्त आमदनी मानकर इस पर आयकर लगाया जाता है।विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार के इस कदम से निवेशकों पर बोझ बढ़ सकता है। इसके अलावा पुनर्खरीद में कमी आ सकती है।

आम निवेशक पर बढ़ेगा टैक्स बोझ

कर और परामर्श फर्म एकेम ग्लोबल के कर भागीदार अमित माहेश्वरी ने कहा कि बॉयबैक पर लाभांश के रूप में कर लगाने से निवेशकों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। अभी तक इसपर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है, लेकिन संशोधन के बाद उच्च कर दायरे वाले करदाताओं को अधिक कर देना होगा।उन्होंने कहा कि अब इसका इस्तेमाल केवल वहीं कंपनियां करेंगी, जहां उन्हें वास्तव में पूंजी में कमी की जरूरत महसूस होगी, न कि मुनाफे के वितरण के लिए।आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के सीईओ (निवेश सेवाएं) रूप भूतरा ने कहा कि आगे चलकर पुनर्खरीद में कमी हो सकती है और कंपनियां इसके बजाय पूंजीगत व्यय के लिए अतिरिक्त पूंजी आवंटित करने का रास्ता चुन सकती हैं।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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