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Budget 2025: क्या बजट 2025 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए होगा गेम-चेंजर? जानिए क्या मिलने वाली हैं बड़ी सौगातें!

India Budget 2025 For Electric Vehicle Industry: भारत का बजट 2025 इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। जानिए बजट में EV उद्योग के लिए संभावित सब्सिडी, GST में कटौती और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर क्या हो सकता है।

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India Budget 2025

Photo : Times Now Digital

India Budget 2025 For Electric Vehicle Industry: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा फरवरी 2025 में प्रस्तुत होने वाला केंद्रीय बजट भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग के लिए एक अहम मील का पत्थर बन सकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में गति को देखते हुए, आगामी बजट से इस क्षेत्र को बल मिल सकता है। सरकार की आगामी नीतियों और प्रोत्साहनों का प्रमुख उद्देश्य पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों को इलेक्ट्रिक विकल्पों से बदलना है और इसी दिशा में बजट 2025 महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अब तक के बजट में इलेक्ट्रिक वाहन के लिए क्या हुआ

इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने 'फास्टर अडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स' (FAME) योजना शुरू की थी, जो 2015 से लागू है। FAME-I और FAME-II ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण सब्सिडी दिए थे। हालांकि, FAME-III की योजना को आगे नहीं बढ़ाया गया और इसके स्थान पर पीएम-ई ड्राइव योजना शुरू की गई, जो 2024 में लागू हुई थी।

GST में कमी की आवश्यकता

इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग लगातार जीएसटी में कमी की मांग कर रहा है, खासकर EV बैटरियों पर, ताकि इन महत्वपूर्ण घटकों पर अन्य ऑटोमोटिव भागों के समान कर दर लागू की जा सके। यह उत्पादन लागत को घटाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुलभ बनाने में मदद करेगा।

EV इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बजट उपाय

भारत में EV चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता एक प्रमुख बाधा है। वित्त मंत्री सीतारमण इस इन्फ्रास्ट्रक्चर को "इन्फ्रास्ट्रक्चर उद्योग" के अंतर्गत वर्गीकृत कर सकती हैं, जिससे चार्जिंग नेटवर्क स्थापित करने की लागत कम हो सकती है। इसके अलावा, EVs के लिए सस्ती वित्तपोषण योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना भी एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

उपभोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन

इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए कर क्रेडिट और अन्य वित्तीय प्रोत्साहन की आवश्यकता है। उच्च प्रारंभिक लागत को कम करने के लिए कम ब्याज दर पर ऋण और अतिरिक्त सब्सिडी की पेशकश की जा सकती है।

वैश्विक EV मंच पर भारत की स्थिति

भारत को अपनी बैटरी निर्माण क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है। चीन वैश्विक बैटरी बाजार में प्रभुत्व रखता है, जबकि भारत को इस क्षेत्र में अपनी स्थिति स्थापित करने के लिए और समर्थन की आवश्यकता है। सरकार 2025 के बजट में बैटरी उत्पादन सुविधाओं को प्रोत्साहित करने के लिए नीतियां ला सकती है।

भारत का EV निर्माण वैश्विक मानकों के साथ मेल खाता

भारत को अपनी EV निर्माण नीतियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके और प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण हो सके।

इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की विशाल संभावना

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार 2030 तक ₹20 लाख करोड़ का हो सकता है और इस उद्योग में लगभग पांच करोड़ रोजगार सृजित हो सकते हैं। इस तेजी से बढ़ते उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए बजट 2025 में उपयुक्त योजनाओं और नीतियों की उम्मीद की जा रही है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के सामने चुनौतियां

इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के सामने कई चुनौतियाँ हैं, जिनमें प्रमुख हैं - अवसंरचना की कमी और उच्च लागत। इन समस्याओं को हल करने के लिए बजट में कुछ महत्वपूर्ण उपायों की आवश्यकता है।

Ashish Kushwaha
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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