Budget 2026: बड़े सुधारों की जरूरत, अर्थशास्त्रियों ने वित्त मंत्री के सामने रखीं ये अहम मांगे
- Edited by: आलोक कुमार
- Updated Jan 12, 2026, 03:51 PM IST
Budget 2026 expectations ( Budget 2026 se Ummeden बजट 2026 से उम्मीदें): रोजगार से जुड़े एक सवाल के जवाब में भानुमूर्ति ने कहा कि आम आदमी के लिए सबसे बड़ा लाभ रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न होना हो सकता है। चूंकि भारत में इस समय आर्थिक वृद्धि मजबूत है, इसलिए इस गति को बनाए रखने वाली नीतियां आम आदमी के लिए आवश्यक हो सकती हैं।
बजट 2026
Budget 2026: अगले महीने पेश होने वाले आम बजट से पहले अर्थशास्त्रियों की राय है कि बजट में रोजगार बढ़ाने के उपाय और छोटे उद्योगों पर नए सिरे से ध्यान दिए जाने के साथ-साथ बैंकिग क्षेत्र में सुधार होने चाहिए। उनका यह भी कहना है कि पिछले साल 12 लाख रुपये तक आय पर आयकर से राहत के बाद प्रत्यक्ष करों पर कोई बड़ी घोषणा की उम्मीद नहीं है। हालांकि सीमा शुल्क पर कुछ नीति लाई जा सकती है।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार एक फरवरी को लोकसभा में 2026-27 का बजट करेंगी। यह पहली बार होगा जब बजट रविवार को पेश किया जाएगा।
बजट को लेकर उम्मीदों के बारे में जाने-माने अर्थशास्त्री एवं मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक एन आर भानुमूर्ति ने कहा कि बजट में सरकार को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्रों पर नए सिरे से ध्यान दिए जाने के साथ-साथ बैंकिग क्षेत्र में सुधारों का खाका पेश करना चाहिए। बजट दीर्घकालीन लक्ष्यों के साथ सुधारों पर केंद्रित 2047 के एजेंडे के लिए एक दृष्टि पत्र हो सकता है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के तहत हालांकि देश में कुछ बड़े बैंकों की जरूरत बतायी जा रही है और इसके लिए विलय की बातें हो रही हैं। हालांकि मेरा मानना है कि देश में और बैंकों की जरूरत है ताकि जरूरतमंदों को बैंक से जुड़ी सुविधाओं के साथ कर्ज आसानी से सुलभ हो सके। इसका कारण अभी वित्तीय समावेश में हमें लंबा सफर तय करना है।
एक अन्य सवाल के जवाब में भानुमूर्ति ने कहा कि एमएसएमई में कर्ज कोई अब समस्या नहीं है। बैंक कर्ज देने के लिए तैयार हैं लेकिन वह उन्हें मिल नहीं पा रहा है। एमएसएमई में छोटे स्तरों पर पुनर्गठन की जरूरत है, ताकि उन्हें संगठित क्षेत्र में लाया सके। छोटे उद्यमों में संचालन के स्तर पर पंजीकरण, ऑडिट और डिजिटल बुनियादी ढांचे से लेकर छोटे-छोटे स्तरों पर व्यवस्था को दुरूस्त करने की जरूरत है।
राजकोषीय मजबूती पर रहेगा फोकस
राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) में प्रोफेसर लेखा चक्रवर्ती ने कहा कि मेरा मानना है कि बजट में राजकोषीय मजबूती को प्राथमिकता दी जाएगी। राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 4.4 प्रतिशत या उससे थोड़ा कम पर बनाए रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा, कृत्रिम मेधा (एआई) और रेलवे में पूंजीगत व्यय पर जोर दिया जाएगा। निजी निवेश को बढ़ावा देने, छोटे उद्यमों को समर्थन देने, उपभोग को गति देने और नीतिगत स्थिरता के लिए कर प्रशासन सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
युवाओं के बीच रोजगार एक बड़ा मुद्दा
रोजगार से जुड़े एक सवाल के जवाब में भानुमूर्ति ने कहा कि आम आदमी के लिए सबसे बड़ा लाभ रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न होना हो सकता है। चूंकि भारत में इस समय आर्थिक वृद्धि मजबूत है, इसलिए इस गति को बनाए रखने वाली नीतियां आम आदमी के लिए आवश्यक हो सकती हैं।
म्यूनिख स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस की प्रबंधन संचालन मंडल की सदस्य की भी भूमिका निभा रही, लेखा चक्रवर्ती ने कहा, रोजगार से जुड़ी योजनाओं, अप्रेंटिसशिप और महिलाओं से जुड़े कार्यक्रमों के लिए आवंटन में वृद्धि की संभावना है। निजी पूंजीगत व्यय में पुनरुद्धार महत्वपूर्ण है। ऐसे में उपभोग और निवेश को बढ़ावा देने के उपाय अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन कर सकते हैं। सतत विकास के लिए शिक्षा और कृत्रिम मेधा/हरित क्षेत्रों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण रोजगार पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक होगा।
प्रत्यक्ष करों पर कोई बड़ी घोषणा नहीं होगी
प्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर पूछे गये सवाल के जवाब में भानुमूर्ति ने कहा, कि करों के संबंध में, चूंकि सरकार प्रत्यक्ष करों और जीएसटी सुधारों पर पहले ही काफी काम कर चुकी है और वर्तमान में सीमा शुल्क सुधारों पर काम कर रही है। इसलिए मेरा मानना है कि प्रत्यक्ष करों पर कोई बड़ी घोषणा नहीं होगी जबकि सीमा शुल्क पर कुछ नीति लाई जा सकती है।
लोकलुभावन घोषणाएं भी होने की संभावना
एक अन्य सवाल के जवाब में लेखा चक्रवर्ती ने कहा, 2026 में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव (असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल आदि) के मद्देनजर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, कल्याणकारी योजनाओं में सुधार या कमजोर समूहों के लिए लक्षित नकद सहायता जैसे कुछ लोकलुभावन उपायों से इनकार नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हालांकि, सरकार की वित्तीय सूझ-बूझ वाली रणनीति को देखते हुए, ये उपाय व्यापक नकद सहायता के बजाय सीमित और क्षेत्र-विशेष (जैसे कृषि या महिला) तक सीमित होने की संभावना है।
भानुमूर्ति ने कहा कि चुनाव वाले राज्यों को देखते हुए, पिछले रुझानों के अनुसार राज्य सरकारें विशेष रूप से महिलाओं के लिए कुछ नकद हस्तांतरण योजनाओं पर विचार कर सकती हैं। हालांकि इस मामले में केंद्रीय बजट की भूमिका सीमित हो सकती है।
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