Budget 2026: कल पेश होगा दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का बजट, इन आंकड़ों पर रहेगी नजर
- Authored by: रिचा त्रिपाठी
- Updated Jan 31, 2026, 06:01 PM IST
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना लगातार 9वां बजट पेश कर इतिहास रचने जा रही हैं। भारत चूंकि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, इसलिए इस 'बही-खाते' पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। यह बजट केवल सरकारी आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि भारत को ग्लोबल महाशक्ति बनाने का ब्लूप्रिंट होगा।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना लगातार 9वां बजट पेश कर एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं। इस बार सभी की निगाहें बहुप्रतीक्षित सीमा शुल्क सुधारों पर टिकी होंगी। सीतारमण ने 2019 में अपने पहले बजट में दशकों से चले आ रहे चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटे पारंपरिक 'बही-खाता' का अनुकरण किया था। पिछले चार वर्षों की तरह इस साल का बजट भी कागज रहित रूप में पेश किया जाएगा।
इन आंकड़ों पर रहेगी बजट में नजर
राजकोषीय घाटा: सरकार के कुल खर्च और आय के बीच का अंतर राजकोषीय घाटा कहलाता है। चालू वित्त वर्ष (2025-26) के लिए इसके जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया गया है। बजट में 4.5 प्रतिशत से नीचे का लक्ष्य हासिल करने के बाद, बाजार अब कर्ज-जीडीपी अनुपात में कमी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सटीक आंकड़ों का इंतजार कर रहा है। उम्मीद है कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए चार प्रतिशत के राजकोषीय घाटे की घोषणा कर सकती है।
पूंजीगत व्यय: चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार का नियोजित पूंजीगत व्यय 11.2 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है। निजी क्षेत्र के निवेशकों की सावधानी को देखते हुए, सरकार आगामी बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च को बनाए रख सकती है और इसमें 10-15 प्रतिशत की वृद्धि कर सकती है। यह राशि 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है।
कर्ज की रूपरेखा: वित्त मंत्री ने 2024-25 के बजट भाषण में कहा था कि वित्त वर्ष 2026-27 से राजकोषीय नीति का प्रयास केंद्र सरकार के कर्ज को जीडीपी के प्रतिशत के रूप में कम करने का होगा। बाजार यह देखना चाहेगा कि सरकार कर्ज-जीडीपी अनुपात को कब तक 60 प्रतिशत के लक्ष्य तक लाने की बात कहती है। 2024 में यह अनुपात 85 प्रतिशत था, जिसमें केंद्र का हिस्सा 57 प्रतिशत था।
उधारी: वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार की सकल उधारी का बजट 14.80 लाख करोड़ रुपये था। सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए बाजार से कर्ज लेती है। उधारी का आंकड़ा देश की आर्थिक सेहत और राजस्व संग्रह की स्थिति का संकेत देता है।
कर राजस्व: वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में सकल कर राजस्व का लक्ष्य 42.70 लाख करोड़ रुपये रखा गया था, जो पिछले वर्ष से 11 प्रतिशत अधिक है। इसमें 25.20 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर (आयकर और कॉरपोरेट कर) और 17.5 लाख करोड़ रुपये अप्रत्यक्ष कर (सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और जीएसटी) से आने का अनुमान है।
जीएसटी: वित्त वर्ष 2025-26 में जीएसटी संग्रह 11 प्रतिशत बढ़कर 11.78 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। सितंबर 2025 से दरों में की गई कटौती के बाद राजस्व वृद्धि में तेजी आने की उम्मीद है, इसलिए वित्त वर्ष 2026-27 के अनुमानों पर विशेष ध्यान रहेगा।
जीडीपी वृद्धि : वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की मौजूदा कीमतों पर जीडीपी वृद्धि (वास्तविक जीडीपी + मुद्रास्फीति) का अनुमान 10.1 प्रतिशत है, जबकि वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, मुद्रास्फीति कम रहने के कारण मौजूदा कीमतों पर जीडीपी को घटाकर आठ प्रतिशत कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह अनुमान 10.5 से 11 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है।
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