Budget 2026: आज पेश होगा इकोनॉमिक सर्वे, जानें इसे क्यों कहते हैं प्री-बजट?
- Authored by: रिचा त्रिपाठी
- Updated Jan 29, 2026, 08:23 AM IST
Budget 2026 एक फरवरी को पेश करने से पहलाज संसद के पटल पर एक जरूरी दस्तावेज पेश होने जा रहा है। इसे इकोनॉमिक सर्वे कहते हैं। हिंदी में इसे आर्थिक समीक्षा या आर्थिक सर्वेक्षण भी कहा जाता है। इसे प्री-बजट भी कहा जाता है। लेकिन ये होता क्या है क्यों पेश किया जाता है और इसमें क्या क्या होता है आइए आसान भाषा में आपको समझाते है।
Economic Survey
Economic Survey 2026: भारत में हर साल बजट से पहले देश की इकोनॉमिक हालात को समझने के लिए एक जरुरी सरकारी डॉक्यूमेंट पेश किया जाता है, जिसे इकोनॉमिक सर्वे कहा जाता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी रविवार को फाइनेंशियल ईयर 26-27 का यूनियन बजट 2026 पेश करने वाली है। लेकिन बजट से पहले आज संसद में एक और डॉक्यूमेंट पेश होना है जिसका नाम है इकोनॉमिक सर्वे। हिंदी में इसे आर्थिक समीक्षा या आर्थिक सर्वेक्षण भी कहा जाता है। इसे प्री-बजट भी कहा जाता है।
इकोनॉमिक सर्वे असल में सरकार का परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट होता है, जो ये बताता है कि सरकार के पिछले बजट का देश की इकोनॉमी पर क्या असर रहा है? लेकिन बात यहीं नहीं खत्म होती, ये सरकार के परफॉर्मेंस रिपोर्ट के साथ-साथ देश की इकोनॉमी की भी परफॉर्मेंस रिपोर्ट होती है। डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स के इकोनॉमिक डिविजन चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर की देखरेख में इकोनॉमिक सर्वे को तैयार करते हैं जबकि वित्त मंत्री इसे संसद में रिलीज करती हैं।
इकॉनिमिक सर्वे में क्या-क्या होता है?
यह रिपोर्ट बीते वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें विकास दर, महंगाई, रोजगार, निवेश और सरकारी नीतियों का आकलन शामिल होता है। इकोनॉमिक सर्वे 2026 इस साल संसद में 29 जनवरी 2026 को पेश किया जाना है, जो यूनियन बजट 2026 से ठीक पहले आएगा और बजट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
आसान शब्दों में कहें तो इकोनॉमिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था का एक 'सालाना रिपोर्ट कार्ड' है। जिस तरह स्कूल में परीक्षा के बाद रिजल्ट आता है, वैसे ही इकोनॉमिक सर्वे यह बताता है कि बीते एक साल में देश की आर्थिक स्थिति कैसी रही। इसमें पिछले एक साल के आर्थिक विकास (GDP Growth), महंगाई की दर, विदेशी मुद्रा भंडार, खेती और औद्योगिक उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण आंकड़ों का विस्तृत लेखा-जोखा होता है। यह दस्तावेज वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की देखरेख में आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार किया जाता है।
बजट से पहले ही क्यों आता है सर्वे?
परंपरा के अनुसार, आर्थिक सर्वेक्षण हमेशा केंद्रीय बजट पेश होने से ठीक एक दिन या कुछ दिन पहले पेश किया जाता है। चूंकि इस साल 1 फरवरी 2026 को आम बजट पेश होना है, इसलिए उससे तीन दिन पहले यानी 29 जनवरी को यह रिपोर्ट पेश की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार और जनता को यह बताना है कि देश की असली आर्थिक तस्वीर क्या है। बजट में सरकार भविष्य की योजनाएं (खर्च और कमाई) बताती है, जबकि सर्वे यह बताता है कि पुरानी योजनाओं ने कैसा प्रदर्शन किया। इससे बजट की घोषणाओं को समझने में मदद मिलती है।
इस बार का सर्वे क्यों है खास?
2026 का इकोनॉमिक सर्वे कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। दुनिया भर में चल रही भू-राजनीतिक उथल-पुथल और सप्लाई चेन की समस्याओं के बीच भारत अपनी विकास दर को कैसे बनाए रखता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस सर्वे में मुख्य आर्थिक सलाहकार देश की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) का अनुमान पेश करेंगे। इसके अलावा, यह भी पता चलेगा कि सरकार राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने के लिए क्या कदम उठा रही है। निवेशकों के लिए यह सर्वे एक दिशा-निर्देश की तरह काम करता है, जिससे उन्हें बाजार के रुख का अंदाजा मिलता है।
रिपोर्ट के दो हिस्से
आमतौर पर इकोनॉमिक सर्वे दो भागों में बंटा होता है। पहले भाग में अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्रों जैसे कृषि, सेवा क्षेत्र और विनिर्माण (Manufacturing) की विस्तृत समीक्षा होती है और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा की जाती है। दूसरे भाग में पिछले साल के आंकड़ों (Stats) और डेटा पर जोर दिया जाता है। यह सर्वे केवल सरकारी आंकड़ों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि यह सरकार को सुधारों के लिए सुझाव भी देता है। हालांकि, सरकार इन सुझावों को मानने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है, लेकिन बजट बनाने में इनका बड़ा योगदान होता है।
आम आदमी के लिए इसका मतलब
शायद आप सोचें कि एक आम नागरिक के लिए इन भारी-भरकम आंकड़ों का क्या मतलब? असल में, इकोनॉमिक सर्वे ही वह जरिया है जिससे हमें पता चलता है कि आने वाले समय में खाने-पीने की चीजें महंगी होंगी या सस्ती। अगर सर्वे में कृषि उत्पादन घटने की बात कही जाती है, तो यह खाद्य महंगाई बढ़ने का संकेत होता है। इसी तरह, नौकरियों और बेरोजगारी के आंकड़े भी इसी रिपोर्ट से साफ होते हैं। यानी आपकी नौकरी से लेकर आपकी थाली तक, सब कुछ इसी सर्वे के इशारों पर निर्भर करता है।
इसे प्री-बजट क्यों कहते हैं?
इकोनॉमिक सर्वे को 'प्री-बजट' कहने का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह बजट के लिए एक मजबूत आधार और दिशा तैयार करता है। इसे बजट की "नींव" माना जा सकता है। जिस तरह कोई भी नया भविष्य का प्लान बनाने से पहले पिछले प्रदर्शन का हिसाब-किताब देखना जरूरी होता है, ठीक उसी तरह सरकार बजट (जो भविष्य का लेखा-जोखा है) पेश करने से पहले इकोनॉमिक सर्वे के जरिए देश का 'आर्थिक रिपोर्ट कार्ड' पेश करती है।इसे बजट से पहले इसलिए पेश किया जाता है ताकि संसद और देश की जनता को यह पता चल सके कि सरकार की पुरानी नीतियों ने कैसा काम किया है। जब हमें पिछले साल की कमियों और मजबूती का पता चलता है, तभी हम बजट में होने वाली नई घोषणाओं के तर्क को समझ पाते हैं। एक तरह से, इकोनॉमिक सर्वे वह 'डायग्नोस्टिक रिपोर्ट' है जिसे देखकर वित्त मंत्री बजट रूपी 'उपचार' तय करती हैं। यही कारण है कि बजट प्रक्रिया की शुरुआत हमेशा इस महत्वपूर्ण प्री-बजट दस्तावेज से होती है, जो आने वाली बड़ी घोषणाओं के लिए एक आर्थिक पृष्ठभूमि (Background) तैयार कर देता है
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