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6000 डॉलर तक पहुंचा सरचार्ज! बासमती निर्यात पर लगा 'मनमाना' टैक्स

बासमती चावल किसान एवं निर्यातक विकास मंच (BRFEDF) ने सरकार से कहा है कि बिना किसी पूर्व सूचना के लगाए जा रहे भारी सरचार्ज और अपारदर्शी शुल्कों के कारण व्यापार ठप होने की कगार पर है।

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Basmati rice export (Photo: iStock)

बासमती चावल के निर्यात से जुड़े व्यापारियों की समस्याएं इन दिनों काफी बढ़ गई हैं। बासमती चावल किसान एवं निर्यातक विकास मंच (बीआरएफईडीएफ) ने सरकार से अपील की है कि वह बढ़ते और अनियमित निर्यात शुल्क पर तुरंत हस्तक्षेप करे। मंच का कहना है कि ये शुल्क न केवल मनमाने हैं, बल्कि इनमें पारदर्शिता की भी कमी है, जिससे निर्यात से जुड़े व्यापारियों की परेशानी बढ़ रही है।

War Risk Surcharge को लेकर बढ़ रही परेशानी

पीटीआई (भाषा) की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंच के अनुसार, सबसे बड़ी समस्या War Risk Surcharge को लेकर है। यह शुल्क प्रति कंटेनर 800 डॉलर से बढ़कर 6,000 डॉलर तक पहुंच गया है। इतना ही नहीं, कई बार यह शुल्क बिना किसी पूर्व सूचना के लगा दिया जाता है या माल भेजने के बाद अचानक बढ़ा दिया जाता है। कुछ मामलों में तो कुल शुल्क माल की कीमत का 60 से 70 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।

स्थिति व्यापार के लिए बेहद नुकसानदायक

BRFEDF की चेयरपर्सन प्रियंका मित्तल ने कहा कि निर्यातकों को ऐसे खर्च उठाने पड़ रहे हैं, जिन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है। उनका मानना है कि यह स्थिति व्यापार के लिए बेहद नुकसानदायक है और इससे छोटे निर्यातक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

बीआरएफईडीएफ की चेयरपर्सन प्रियंका मित्तल ने एक बयान में कहा, "निर्यातकों से उन परिस्थितियों के लिए असीमित वित्तीय बोझ उठाने को कहा जा रहा है जिन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है।"

शिपिंग कंपनियां भी बदल रही अपने फैसले

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण शिपिंग कंपनियां भी अपने फैसले बदल रही हैं। कई बार माल को तय बंदरगाहों की जगह जेबेल अली (यूएई), सोहर और सलालाह (ओमान) जैसे दूसरे बंदरगाहों पर भेज दिया जाता है। कुछ मामलों में कंटेनर को बीच में ही रोक दिया जाता है या वापस भेज दिया जाता है, जिससे निर्यातकों की परेशानी और बढ़ जाती है।

निर्यातकों का कहना है कि इन सभी बदलावों और फैसलों का आर्थिक बोझ पूरी तरह उन पर ही डाला जा रहा है, जबकि इन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता। ऐसे में कई व्यापारियों के सामने यह स्थिति आ गई है कि वे माल छोड़ने तक पर विचार कर रहे हैं।

भारत के समुद्री व्यापार पर पड़ रहा नकारात्मक असर

मंच ने सरकार से मांग की है कि शुल्क को केवल दी जाने वाली सेवाओं के आधार पर तय किया जाए और शिपिंग कंपनियों को विवाद के नाम पर कंटेनर रोकने से रोका जाए। साथ ही, भू-राजनीतिक संकट के समय माल ढुलाई के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं। हालांकि, सरकार के संबंधित विभाग ने शिकायतों को दर्ज कर लिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इससे भारत के समुद्री व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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