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विवाद में Bournvita:74 साल पहले बॉर्नविटा की भारत में एंट्री,एक गांव से है खास नाता

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Apr 19, 2023, 02:51 PM IST

Bournvita History and Sugar Controversy:साल 1824 में जॉन कैडबरी ने पहला ग्रॉसरी आउलेट खोला था। और उन्हीं के नाम से कैडबरी की शुरूआत हुई। कैडबरी की लोकप्रियता में इजाफा तब हुआ जब उसने चॉकलेट को बाजार में उतारा।

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बॉर्नविटा विवाद और उसका भारत में इतिहास

Bournvita History and Sugar Controversy:घर-घर में हेल्थ पाउडर ड्रिंक के लिए मशहूर बॉर्नविटा (Bournvita) इस समय विवादों में हैं। सोशल मीडिया में यह विवाद छिड़ गया है कि कंपनी जिस बॉर्नविटा को लोगों तक पहुंचा रही है, उसमें शक्कर की मात्रा ज्यादा है और वह लोगों को नुकसान पहुंचा रही है। हालांकि कंपनी ने इन दावों को पूरी तरह से नकार दिया है। लेकिन इस विवाद में बॉर्नविटा और उसे बनाने वाली कंपनी मॉन्डीलेज (Mondelez) चर्चा में हैं। कंपनी का इतिहास करीब 200 साल पुराना है और उसने दुनिया में पहली बार साल 1920 में बॉर्नविटा को हेल्थ ड्रिंक के रुप में पेश किया था। और खास बात यह है कि बॉर्नविटा की पहचान एक गांव से जुड़ी हुई है।

एक गांव से मिला बॉर्नविटा नाम

Mondelez की वेबसाइट के अनुसार साल 1824 में जॉन कैडबरी ने पहला ग्रॉसरी आउलेट खोला था। और उन्हीं के नाम से कैडबरी की शुरूआत हुई। कैडबरी की लोकप्रियता में इजाफा तब हुआ जब उसने चॉकलेट को बाजार में उतारा। उसमें भी साल 1905 में आए Dairy Milk ने कंपनी की किस्मत बदल दी। और वह इंटरनेशनल ब्रांड बनता चला गया।

जहां तक बॉर्नविटा की बात है तो साल 1920 में ब्रिटेन में इसकी शुरुआत हुई है। और वहां से शुरू हुआ सफर साल 1948 में भारत में पहुंचा। भारत में कैडबरी ने 1948 में एंट्री की और उसके साथ ही बॉर्नविटा ब्रांड भारत पहुंचा। बॉर्नविटा की पहचान का कनेक्शन एक गांव से जुड़ा हुआ है। असल में बर्मिंघम के पास Bournville lane में फैक्ट्री खोली गई। और यह गांव ही बॉर्नविटा की पहचान गया। और बॉर्नविटा का नाम इसी गांव के नाम पर रखा गया।

अभी क्या है विवाद

सोशल मीडिया एंफ्लुएंसर और न्यू्ट्रिनिस्ट रेवंत हिमतसिंग्का पर अपने वीडियो में बॉर्निवीटा में ज्यादा शक्कर का इस्तेमाल करने की बात कही थी। हिमतसिंग्का ने दावा किया था कि बॉर्नविटा (Bournvita) में शुगर, कोको सॉलिड्स और कैंसर पैदा करने वाले कलरेंट हैं। जिसको अभिनेता परेश रावल से लेकर राजनीतिज्ञ कीर्ति आजाद ने भी शेयर किया। मामला तूल पकड़ने पर कंपनी के तरफ से सफाई आई । उसके अनुसार कंपनी ने 70 सालों में ग्रहकों का भरोसा जीता है। बॉर्नविटा (Bournvita) को पूरी तरह साइंटफिक और देश में फूड को लेकर बने कानून के हिसाब से बनाया गया है जो टेस्टी के साथ हेल्दी भी होता है। मोंडेलेज इंडिया कहा कि उसके बोर्नबीटा में प्रत्येक 20 ग्राम की मात्रा में 7.5 ग्राम चीनी होती है, जो लगभग डेढ़ चम्मच होती है। यह बच्चों के लिए चीनी की रोजाना खाने की सीमा से बहुत कम है और देश के नियामक दिशानिर्देशों के अनुसार है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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