बिहार का एक छोटा कस्बा मरहौरा अब दुनिया के नक्शे पर अपनी पहचान बना रहा है। यहां की रेल इंजन फैक्ट्री में बने 150 पावरफुल इंजन जल्द ही अफ्रीका के गिनी देश में दौड़ते नजर आएंगे। ये इंजन वहां की एक बड़ी आयरन ओर (लौह अयस्क) परियोजना के लिए भेजे जाएंगे। यह डील करीब ₹3,000 करोड़ की है और भारत की गिनती अब रेल इंजन निर्यात करने वाले बड़े देशों में होने लगी है।
भारत से गिनी तक पहुंचेगा मरहौरा का बना इंजन
बिहार के सारण जिले के मरहौरा में स्थित रेलवे लोकोमोटिव फैक्ट्री में बने 150 दमदार इंजन अब अफ्रीका के गिनी देश में चलाए जाएंगे। ये इंजन सिमंडौ लौह अयस्क प्रोजेक्ट में काम आएंगे।

ES43ACmi Locomotive
तीन साल में पूरे होंगे डिलीवरी के टारगेट
पहले साल 37, दूसरे साल 82 और तीसरे साल 31 इंजन भेजे जाएंगे। यानी तीन साल में सारे इंजन अफ्रीका पहुंचा दिए जाएंगे।
इंजन में ताकत भी है और आराम भी
हर इंजन में 4500 हॉर्स पावर की ताकत है। एसी प्रणोदन सिस्टम, रिजनरेटिव ब्रेकिंग टेक्नोलॉजी, माइक्रोप्रोसेसर-आधारित कंट्रोल सिस्टम, फायर डिटेक्शन सिस्टम साथ ही ये इतने मॉडर्न हैं कि ड्राइवर के लिए माइक्रोवेव, फ्रिज और टॉयलेट जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं।
मरहौरा बना रोजगार का ठिकाना
इस फैक्ट्री में 285 लोग सीधे काम कर रहे हैं, जबकि करीब 1,200 लोग अलग-अलग सपोर्ट कामों से जुड़े हैं। देशभर से करीब 2,100 लोग इस प्रोजेक्ट से जुड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं।
बिहार की छवि बदल रही है, रोजगार का केंद्र बना मरहौरा
मरहौरा की इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि बिहार अब न केवल कृषि और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाएगा, बल्कि औद्योगिक और तकनीकी उत्कृष्टता का भी केंद्र बनेगा। देसी जमीन पर बना यह विदेशी सफर बिहार के गौरव की नई इबारत लिख रहा है। अब बिहार सिर्फ खेती या इतिहास के लिए नहीं, बल्कि रेल इंजन जैसे भारी तकनीकी सामान बनाने और दुनिया को सप्लाई करने के लिए भी जाना जाएगा। मरहौरा की ये कामयाबी पूरे राज्य का नाम रोशन कर रही है।
