Biggest Valuable Company Market Cap in Rupees: भारत की टॉप-10 सबसे वैल्युएबल कंपनियों का मार्केट कैप पिछले सप्ताह भारी गिरावट का शिकार हुआ, जिससे ₹4,95,061 करोड़ का नुकसान हुआ। यह गिरावट इक्विटी बाजारों में मंदी के कारण आई, जो निवेशकों के बीच निगेटिव भावना फैलने से हुई। विशेष रूप से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सबसे बड़ी गिरावटें झेली।
टीसीएस और रिलायंस इंडस्ट्रीज में सबसे बड़ी गिरावट
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का बाजार पूंजीकरण ₹1,10,550.66 करोड़ घटकर ₹15,08,036.97 करोड़ हो गया। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण ₹91,140.53 करोड़ कम होकर ₹16,32,004.17 करोड़ पर पहुंच गया। अन्य प्रमुख कंपनियों ने भी नुकसान झेला, जिनमें एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, और अन्य बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
मुख्य कंपनियों में गिरावट
- HDFC बैंक: ₹76,448.71 करोड़ का नुकसान, अब ₹13,54,709.35 करोड़
- भारती एयरटेल: ₹59,055.42 करोड़ का नुकसान, अब ₹8,98,786.98 करोड़
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI): ₹43,909.13 करोड़ का नुकसान, अब ₹7,25,125.38 करोड़
- ICICI बैंक: ₹41,857.33 करोड़ का नुकसान, अब ₹9,07,449.04 करोड़
- इंफोसिस: ₹32,300.2 करोड़ का नुकसान, अब ₹7,98,086.90 करोड़
- जीवन बीमा निगम (LIC): ₹20,050.25 करोड़ का नुकसान, अब ₹5,69,819.04 करोड़
बाजार का कमजोर प्रदर्शन
यह गिरावट व्यापक बाजार प्रदर्शन को दर्शाती है, जिसमें BSE बेंचमार्क इंडेक्स 4,091.53 अंकों या 4.98% की गिरावट के साथ गिर गया। निफ्टी में भी 4.77% की गिरावट आई, जो जून 2022 के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है।
अमेरिका की फेडरल रिजर्व नीति का प्रभाव
इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों में बदलाव था। फेड चेयरमैन जेरेमी पॉवेल ने घोषणा की कि 2025 में केवल दो दरों में कटौती की जाएगी, जो पहले चार होने की उम्मीद थी। इस नीति परिवर्तन ने वैश्विक निवेशक विश्वास को प्रभावित किया और भारतीय शेयर बाजार में भी भारी गिरावट आई।
