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इन देशों के पास है व्हाइट गोल्ड का खजाना, Yellow Gold से भी ज्यादा है खास

आजकल ज्वेलरी और निवेश की बात हो तो सिर्फ येलो गोल्ड ही नहीं, व्हाइट गोल्ड भी तेजी से लोगों की पसंद बनता जा रहा है। चांदी जैसी चमक और प्लेटिनम जैसा प्रीमियम लुक देने वाला व्हाइट गोल्ड अब स्टाइल और मजबूती दोनों का प्रतीक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में व्हाइट गोल्ड की सप्लाई और उसकी चमक किन देशों के दम पर बनी हुई है?

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Platinum copper

आज के दौर में जब भी सोने की बात होती है, तो व्हाइट गोल्ड (White Gold) का जिक्र जरूर होने लगा है। खासकर शादियों, एंगेजमेंट रिंग्स और डेली वियर ज्वेलरी में व्हाइट गोल्ड तेजी से लोगों की पहली पसंद बन रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है इसका स्टाइलिश लुक। व्हाइट गोल्ड की चमक चांदी जैसी होती है और यह प्लेटिनम जैसा रॉयल एहसास देता है, लेकिन इसकी कीमत प्लेटिनम से काफी कम रहती है। यही कारण है कि निवेश और फैशन, दोनों नजरिए से व्हाइट गोल्ड अब एक मजबूत विकल्प बनता जा रहा है।

व्हाइट गोल्ड क्या होता है और कैसे बनता है

व्हाइट गोल्ड कोई अलग धातु नहीं है, बल्कि यह शुद्ध सोने को दूसरे मेटल्स के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। आमतौर पर इसमें पैलेडियम, निकल या सिल्वर मिलाया जाता है। इन धातुओं के मिलने से सोने का पीला रंग हल्का होकर सफेद हो जाता है और उसकी मजबूती भी बढ़ जाती है। कई बार इसकी सतह पर रोडियम की कोटिंग भी की जाती है, जिससे इसकी चमक लंबे समय तक बनी रहती है। इसी वजह से व्हाइट गोल्ड टिकाऊ होता है और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए बेहतर माना जाता है।

चीन: व्हाइट गोल्ड की दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी

चीन दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। साल 2025 में चीन ने करीब 380 मीट्रिक टन सोने का उत्पादन किया। शानडोंग और इनर मंगोलिया जैसे इलाके सोने की खदानों और रिफाइनिंग के लिए मशहूर हैं। यहां से निकलने वाला सोना व्हाइट गोल्ड के अलॉय बनाने में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, जो दुनियाभर की ज्वेलरी इंडस्ट्री को सप्लाई किया जाता है।

रूस: पैलेडियम बेस्ड व्हाइट गोल्ड का मजबूत केंद्र

रूस हर साल लगभग 320 मीट्रिक टन सोना निकालता है। यहां की खासियत यह है कि रूस पैलेडियम जैसे मेटल के साथ सोने को मिलाने में काफी आगे है। साइबेरिया की खदानों से मिलने वाला सोना व्हाइट गोल्ड के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। पैलेडियम की वजह से रूस का व्हाइट गोल्ड ज्यादा मजबूत और हाई क्वालिटी माना जाता है।

ऑस्ट्रेलिया: हाई क्वालिटी माइनिंग के लिए मशहूर

ऑस्ट्रेलिया हर साल करीब 310 मीट्रिक टन सोने का उत्पादन करता है। यहां की माइनिंग इंडस्ट्री आधुनिक तकनीक और साफ-सुथरे तरीकों के लिए जानी जाती है। इसी वजह से यहां बना व्हाइट गोल्ड इंटरनेशनल मार्केट में काफी भरोसेमंद माना जाता है और लग्जरी ज्वेलरी में खूब इस्तेमाल होता है।

कनाडा

कनाडा में हर साल करीब 200 मीट्रिक टन सोना निकाला जाता है। यहां रिफाइनिंग प्रोसेस बहुत सख्त मानकों के तहत होती है। कनाडा का व्हाइट गोल्ड खासतौर पर हाई-एंड और प्रीमियम ज्वेलरी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ओंटारियो जैसे इलाके इसके प्रमुख केंद्र हैं।

अमेरिका: एलर्जी-फ्री व्हाइट गोल्ड का ट्रेंड

अमेरिका में हर साल लगभग 170 मीट्रिक टन सोना निकाला जाता है। यहां पैलेडियम बेस्ड व्हाइट गोल्ड ज्यादा बनाया जाता है, जिससे निकल एलर्जी की समस्या कम होती है। यही वजह है कि स्किन सेंसिटिव लोगों के बीच अमेरिकी व्हाइट गोल्ड की मांग ज्यादा है।

साउथ अफ्रीका, पेरू और मैक्सिको की भूमिका

साउथ अफ्रीका का सोने की माइनिंग में लंबा इतिहास रहा है और यहां से हर साल करीब 100 मीट्रिक टन सोना निकलता है। वहीं पेरू और मैक्सिको जैसे देश भी नई तकनीक में निवेश कर रहे हैं, जिससे व्हाइट गोल्ड का उत्पादन और एक्सपोर्ट लगातार बढ़ रहा है।

उज्बेकिस्तान

उज्बेकिस्तान हर साल लगभग 120 मीट्रिक टन सोना निकालता है। मुरुनताऊ जैसी बड़ी खदानों के कारण यह देश तेजी से ग्लोबल व्हाइट गोल्ड मार्केट में अपनी पहचान बना रहा है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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