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Bank Strike: सरकार के साथ बातचीत विफल! बैंक यूनियनें 11 सितंबर को करेंगी देशव्यापी हड़ताल, जानिए क्यों?

Bank Strike Tomorrow in India: बैंक यूनियनों ने हफ्ते में 5 दिन काम (5-Day Banking) की मांग पर बात न बनने के कारण 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल का फैसला किया है, जिससे बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

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11 सितंबर को बैंकों में राष्ट्रव्यापी हड़ताल: जानिए क्यों ठप हो सकता है कामकाज (तस्वीर-AI)

Bank Strike Tomorrow in India: सरकारी अधिकारियों और बैंक यूनियनों के बीच हुई सुलह-सफाई की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद बैंक कर्मचारियों ने 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल पर जाने का अंतिम फैसला कर लिया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बैनर तले सात बड़े कर्मचारी और अधिकारी संघ इस हड़ताल में भाग ले रहे हैं। यूनियनों का साफ कहना है कि जब तक उनकी सबसे प्रमुख मांग हफ्ते में केवल पांच दिन काम (5-Day Banking Week) पर सरकार का कोई सकारात्मक रुख या स्पष्ट समय-सीमा सामने नहीं आती, तब तक हड़ताल टालने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

सुलह की दो दौर की बैठकें रहीं बेनतीजा

मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के दफ्तर में श्रम अधिकारियों, वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS), इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और UFBU के प्रतिनिधियों के बीच ऑनलाइन माध्यम से दो दौर की मैराथन बैठकें हुईं। बैठक के दौरान DFS अधिकारियों ने यूनियनों से अपील की कि 11 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है, इसलिए देश की अंतरराष्ट्रीय साख को देखते हुए हड़ताल वापस ले ली जाए। हालांकि, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (AIBOC) के महासचिव रूपम रॉय ने स्पष्ट किया कि 5-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह पर सरकार की तरफ से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, इसलिए हड़ताल अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगी।

हड़ताल का लंबा आंदोलन और मुख्य मांगें

11 सितंबर का यह विरोध प्रदर्शन बैंक यूनियनों के एक लंबे आंदोलन की पहली शुरुआत है। अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय हड़ताल की योजना बनाई है। इसके बाद भी हल न निकलने पर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है। यूनियनों की मुख्य मांगों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू करना, प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना की समीक्षा करना और अन्य लंबित द्विपक्षीय मुद्दों का समाधान निकालना शामिल है। कर्मचारियों का विरोध खासकर नई पीएलआई व्यवस्था को लेकर है, जिसे वे भेदभावपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि यह केवल वरिष्ठ अधिकारियों (स्केल IV और उससे ऊपर) को लाभ पहुंचाती नजर आती है। हालांकि सरकार ने हाल ही में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इस पीएलआई योजना को रोक दिया है, लेकिन यूनियनें इसे पूरी तरह सुलझाने की मांग कर रही हैं।

5-Day Banking आखिर क्यों चाहते हैं बैंक कर्मचारी?

हफ्ते में पांच दिन काम की मांग काफी सालों से पेंडिंग है। मार्च 2024 में हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते के तहत यह प्रस्ताव रखा गया था कि सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना काम के घंटे थोड़े बढ़ा दिए जाएं, ताकि शनिवार को मिलने वाली छुट्टी की भरपाई हो सके। IBA ने भी सरकार को इसकी सिफारिश की थी, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया है। यूनियनों का तर्क है कि अन्य कई वित्तीय संस्थान पहले से ही 5-दिवसीय सप्ताह पर चल रहे हैं। प्रतिदिन के घंटे बढ़ाने से ग्राहकों के काम के समय में कोई बड़ी कटौती नहीं होगी और कर्मचारियों को भी राहत मिलेगी।

आम जनता और बैंक सेवाओं पर असर

देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने शेयर बाजारों को सूचित किया है कि उसे हड़ताल का नोटिस मिल गया है। बैंक ने अपनी शाखाओं और कार्यालयों में कामकाज सामान्य रखने की व्यवस्था की है, लेकिन यह स्वीकार किया है कि इस दौरान बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे हड़ताल के दिन अपने जरूरी लेन-देन ऑनलाइन या डिजिटल बैंकिंग माध्यमों से निपटाएं, ताकि किसी असुविधा से बचा जा सके।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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