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विलय और अधिग्रहण पर क्यों बोले एसबीआई चेयरमैन? सतर्क और धीरे-धीरे कदम बढ़ाएगा SBI

Mergers and Acquisitions: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने कहा कि बैंक अब विलय और अधिग्रहण (M&A) में फाइनेंसिंग के लिए सतर्क और चरणबद्ध रुख अपनाएगा। हाल ही में RBI ने बैंकों को लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने के लिए लोन देने की अनुमति दी है।

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एसबीआई विलय और अधिग्रहण में सतर्क, धीरे-धीरे कदम बढ़ाएगा (तस्वीर-istock)

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Mergers and Acquisitions: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने कहा है कि बैंक अब विलय और अधिग्रहण (M&A) के लिए फाइनेंसिंग में सतर्क रुख अपनाएगा और यह कदम चरणबद्ध तरीके से उठाएगा। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को इस प्रकार की फाइनेंसिंग की अनुमति दी है, जिससे बैंक अब लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने के लिए लोन दे सकते हैं।

जोखिम भरे कदमों में सतर्कता

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक शेट्टी ने बताया कि एसबीआई हमेशा नए क्षेत्र में कदम रखने से पहले सावधानी बरतता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि होम लोन जैसे सुरक्षित क्षेत्र में भी बैंक ने जल्दबाजी नहीं की और धीरे-धीरे विस्तार किया। आज बैंक का होम लोन पोर्टफोलियो 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जिससे एसबीआई इस क्षेत्र में सबसे बड़ा कर्जदाता बन गया है।

RBI के नए दिशानिर्देश

आरबीआई ने अक्टूबर में मसौदा दिशानिर्देश जारी किए थे, जिनके तहत बैंक अब कंपनियों को उनकी रणनीतिक हिस्सेदारी खरीदने के लिए लोन दे सकते हैं। नए नियमों के अनुसार, अधिग्रहण मूल्य का 70 प्रतिशत तक बैंक लोम के रूप में देगा और बाकी 30 प्रतिशत खरीदार की अपनी पूंजी से आएगा। शेट्टी ने कहा कि बैंक अपनी जोखिम लेने की क्षमता और विलय एवं अधिग्रहण नीति बोर्ड द्वारा तय करेगा, जो नियामकीय दिशानिर्देशों के अनुरूप होगी।

समझ और सहयोग पर आधारित रणनीति

एसबीआई केवल उन्हीं सौदों में शामिल होगा जिन्हें वह अच्छी तरह समझता है और जिनमें सहयोग की संभावना हो। शेट्टी ने बताया कि कई बहुराष्ट्रीय बैंक पहले से ही विलय एवं अधिग्रहण के लिए फाइनेंसिंग करते हैं और एसबीआई भी उनके साथ सहयोग करेगा। इसके अलावा, बैंक को विदेशों में अपने कार्यालयों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहणों को वित्तपोषण करने का अनुभव भी है।

विशेषज्ञता और जोखिम प्रबंधन

शेट्टी ने कहा कि बैंक नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है, लेकिन उसका दृष्टिकोण पूरी तरह जोखिम आकलन और हर सौदे की गहन समझ पर आधारित रहेगा। विशेषज्ञता और सहयोग की तत्परता के आधार पर ही बैंक किसी भी सौदे में कदम बढ़ाएगा।

रेपो दर कटौती और बैंक की तैयारी

देश के सबसे बड़े बैंक के चेयरमैन ने यह भी कहा कि दिसंबर में RBI द्वारा रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती के बावजूद बैंक अपनी तीन प्रतिशत शुद्ध ब्याज मार्जिन का लक्ष्य हासिल कर लेगा। पिछले सप्ताह RBI ने आर्थिक वृद्धि को और मजबूती देने के लिए रेपो दर को 5.25 प्रतिशत कर दिया था।

पूंजी पर्याप्तता और ऋण वृद्धि

शेट्टी ने यह भी विश्वास जताया कि बैंक अगले 5-6 वर्षों तक 15 प्रतिशत की पूंजी पर्याप्तता दर बनाए रखेगा और ऋण वृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त इक्विटी पूंजी की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

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रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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