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भारतीय रिजर्व बैंक के नए नियम: अब बैंक दे सकेंगे अधिकतम इतना लोन

Bank Loan Limit: भारतीय रिजर्व बैंक ने अधिग्रहण के लिए फाइनेंसिंग संबंधी अंतिम दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। नए नियमों के तहत अब बैंक किसी डील के कुल मूल्य का अधिकतम 75 प्रतिशत तक लोन दे सकेंगे। पहले जारी मसौदा नियमों में यह सीमा 70 प्रतिशत तय की गई थी, जिसे अंतिम निर्णय में बढ़ा दिया गया है।

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अधिग्रहण के लिए ज्यादा कर्ज की अनुमति (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Bank Loan Limit: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को अधिग्रहण (एक कंपनी द्वारा दूसरी कंपनी को खरीदने) के लिए वित्तपोषण से जुड़े अंतिम दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इन नए नियमों के तहत अब बैंक किसी अधिग्रहण सौदे के कुल मूल्य का अधिकतम 75 प्रतिशत तक कर्ज दे सकेंगे। पहले जारी मसौदा नियमों में यह सीमा 70 प्रतिशत रखी गई थी, लेकिन अंतिम नियमों में इसे बढ़ा दिया गया है। इसका मतलब है कि अब कंपनियों को अधिग्रहण के लिए बैंकों से पहले की तुलना में ज्यादा वित्तीय सहायता मिल सकेगी।

अधिग्रहण मूल्य का 75 प्रतिशत तक मिलेगा कर्ज

आरबीआई ने साफ किया है कि किसी भी अधिग्रहण के लिए कुल बैंक वित्तपोषण उस सौदे के मूल्य के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इस सौदे के मूल्य का आकलन संबंधित बैंक खुद स्वतंत्र रूप से करेगा। यानी बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि अधिग्रहण की कीमत उचित और वास्तविक हो। बाकी बची हुई कम से कम 25 प्रतिशत राशि अधिग्रहण करने वाली कंपनी को अपने संसाधनों से जुटानी होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कंपनी भी अपने स्तर पर पर्याप्त निवेश करे और पूरा बोझ बैंक पर न पड़े।

प्रवर्तकों की हिस्सेदारी के लिए भी कर्ज संभव

नए नियमों के तहत बैंकों को यह भी अनुमति दी गई है कि वे अधिग्रहण के दौरान प्रवर्तकों (कंपनी के मालिक या प्रमोटर) की हिस्सेदारी के लिए भी कर्ज दे सकें। हालांकि इसके लिए एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है। अधिग्रहण के बाद कंपनी का ऋण-इक्विटी अनुपात (Debt-Equity Ratio) लगातार 3:1 से अधिक नहीं होना चाहिए। इसका अर्थ है कि कंपनी पर कर्ज उसकी अपनी पूंजी के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इस शर्त का उद्देश्य यह है कि कंपनियां जरूरत से ज्यादा कर्ज लेकर वित्तीय जोखिम में न पड़ें। इसके अलावा, जिन इक्विटी शेयरों या अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय डिबेंचरों (Compulsorily Convertible Debentures) को अधिग्रहित किया जाएगा, वे किसी भी प्रकार के बोझ या गिरवी से मुक्त होने चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि बैंक को दी जाने वाली सुरक्षा साफ और जोखिम रहित हो।

बैंकों को बनानी होगी स्पष्ट नीति

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अधिग्रहण वित्तपोषण के लिए अपने निदेशक मंडल से अनुमोदित एक स्पष्ट नीति तैयार करें। इसका मतलब है कि हर बैंक को यह तय करना होगा कि वह किन शर्तों पर और किन कंपनियों को अधिग्रहण के लिए कर्ज देगा। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही, अधिग्रहण के लिए कर्ज लेने वाली कंपनी की न्यूनतम शुद्ध संपत्ति 500 करोड़ रुपये होनी चाहिए। इसके अलावा कंपनी ने लगातार तीन वर्षों तक शुद्ध लाभ कमाया हो, यह भी जरूरी है। यह शर्त इसलिए रखी गई है ताकि केवल आर्थिक रूप से मजबूत और स्थिर कंपनियों को ही अधिग्रहण के लिए बैंक ऋण मिल सके।

गैर-लिस्टेड कंपनियों के लिए अतिरिक्त शर्त

अगर कोई कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) नहीं है, तो उसे निवेश-योग्य क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यानी किसी मान्यता प्राप्त रेटिंग एजेंसी से यह प्रमाणित होना चाहिए कि कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत है और उसमें निवेश करना सुरक्षित है। इससे बैंकों का जोखिम कम होगा।

कब से लागू होंगे नए नियम

आरबीआई ने बताया है कि ये सभी नए दिशा-निर्देश 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे। यानी इसके बाद होने वाले अधिग्रहण सौदों पर यही नियम लागू होंगे। इससे पहले, अक्टूबर के अंत में केंद्रीय बैंक ने पहली बार इसका मसौदा जारी किया था, जिसमें बैंकों को अधिग्रहण के लिए वित्तपोषण की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया था।

दरअसल, पहले बैंकों को इस तरह के अधिग्रहण वित्तपोषण की अनुमति नहीं थी। अब नए नियमों के लागू होने से कंपनियों को विस्तार और निवेश के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, आरबीआई ने सावधानी बरतते हुए ऐसे प्रावधान भी रखे हैं, जिससे बैंकिंग प्रणाली पर अत्यधिक जोखिम न आए और वित्तीय स्थिरता बनी रहे।

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रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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