दिवालिया कार्यवाही: सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को दी राहत, SBI की अर्जी खारिज

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 17, 2020, 07:11 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई की एक याचिका खारिज कर दी। जिससे रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी (Anil Ambani) को राहत मिल गई है।

दिवालिया कार्यवाही: सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को दी राहत, SBI की अर्जी खारिज

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक याचिका खारिज कर दी, जो रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी (Anil Ambani) के व्यक्तिगत दिवालियेपन की कार्यवाही (Bankruptcy proceedings) पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा स्टे लगाए जाने के खिलाफ दायर की गई थी। जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 6 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट को इस मुद्दे पर विचार करने का निर्देश दिया है। जस्टिस हेमंत गुप्ता और एस. रवींद्र भट्ट की पीठ ने भी SBI को 27 अगस्त को हाईकोर्ट द्वारा पारित स्टे ऑर्डर में बदलाव करने की मांग करने की स्वतंत्रता दी। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि आप अनिल अंबानी मामले पर बहस करने के लिए हाईकोर्ट वापस क्यों नहीं जाते?

बीते 27 अगस्त को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक अंतरिम आदेश पारित किया था, जिसमें उन्होंने मुंबई दिवालियापन ट्रिब्यूनल के आदेश पर स्टे लगा दिया था। पीठ ने कहा था कि कॉर्पोरेट देनदारों के खिलाफ कार्यवाही जारी रहेगी और साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार, SBI और अन्य से नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा था। पीठ ने अंबानी पर अपनी किसी भी व्यक्तिगत संपत्ति को बेचने या स्थानांतरित करने से भी रोक दिया था और मामले को 6 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।

सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह दायर की गई याचिका में SBI ने कहा था कि हाईकोर्ट ने बैंक को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का अवसर नहीं दिया और अंबानी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही को रोकते हुए अंतरिम आदेश पारित करना उचित नहीं था, जिस पर बैंक का 1,707 बकाया है। अंबानी ने व्यक्तिगत गारंटी से संबंधित खंड की वैधता को चुनौती दी थी और पूछा था कि क्या इस तरह के आदेश के लिए इन्सॉल्वेंसी बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) में कोई सक्षम प्रावधान है।

इस साल मार्च में SBI ने अंबानी द्वारा जारी गारंटी के आधार पर व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए आईबीसी की धारा 95 के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ में याचिका दायर की थी। एनसीएली ने जितेंद्र कोठारी को रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) के रूप में नियुक्त किया था।

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