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Stock Market Crash : निवेशकों के 12 लाख करोड़ स्वाहा, 5 वजहों से आया बिकवाली का तूफान

शेयर बाजार में गुरुवार को भयानक बिकवाली देखने को मिली, जिसकी वजह से निफ्टी और सेंसेक्स करीब 18 महीने के निचले स्तर पर आ गए। दिन के आखिर में बिकवाली के चलते निवेशकों को 12 लाख करोड़ की चपत लगी।

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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

Sensex Nifty Stock Market Crash : शेयर बाजार में गुरुवार का दिन तमाम निवेशकों के लिए निराशाजनक रहा। बिकवाली के तूफान ने कुछ ही घंटों में निवेशकों के पोर्टफोलिया को तहस-नहस कर दिया। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स Sensex जहां 1.44% यानी 1045.46 अंक की गिरावट के साथ 71,593.24 अंक पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 1.64% यानी 371.25 अंक लुढ़ककर 22,231 .80 पर बंद हुआ। बाजार में चौतरफा बिकवाली का असर मार्केट ब्रेड्थ पर देखने को मिला। BSE पर 4,654 स्टॉक्स में ट्रेडिंग हुई। इनमें से 1,018 स्टॉक्स में खरीदारी हुई, जबकि 3,412 में बिकवाली हुई। इसी तरह NSE पर 3,722 में ट्रेडिंग हुई, इनमें से 660 में खरीदारी और 2,950 में बिकवाली हावी रही।

12 लाख करोड़ साफ

शेयर बाजार में आई बिकवाली की सुनामी में निवेशकों के करीब 12 लाख करोड़ रुपये बह गए हैं। बुधवार 7 अक्टूबर, 2026 को BSE पर लिस्टेड कंपनियों का ऑल इंडिया मार्केट कैप 47235273.388 करोड़ रुपये रहा था, जो गुरुवार 8 अगस्त को घटकर 46057090.44 करोड़ रह गया। इस तरह निवेशकों को मार्केट कैप के हिसाब से 11,78,182.948 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

बिकवाली के तूफान में टिके रहे ये स्टॉक

निफ्टी और सेंसेंक्स सहित पूरे बाजार में बिकवाली के तूफान में भी कुछ स्टॉक ऐसे रहे, जो अड़िग खड़े रहे। F&O में शामिल बड़े शेयरों में 10 शेयर ऐसे रहे, जिनमें बाजार की व्यापक बिकवाली के बाद भी 1 फीसदी से ज्यादा की तेजी रही।

RankशेयरLTP (₹)तेजी
1LIC Housing Finance536.504.09%
2PNB Housing Finance1,153.001.95%
3ICICI Lombard General Insurance1,614.001.51%
4SRF2,497.001.50%
5Mphasis2,319.701.34%
6Anand Rathi Wealth2,149.001.02%

5 वजहों से बिखरा बाजार

शेयर बाजार में बिकवाली के पीछे कोई एक वजह नहीं रही। बल्कि घरेलू और बाहरी फैक्टर्स ने मिलकर निवेशकों के रिस्क सेंटिमेंट को कमजोर किया है।

1. RBI का Repo Rate बढ़ाना पड़ा भारी : बाजार के लिए सबसे बड़ा घरेलू झटका RBI की पॉलिसी से आया। RBI ने बुधवार को Repo Rate 25 Basis Points बढ़ाकर 5.50% कर दिया। इतना ही नहीं, पॉलिसी स्टांस को Neutral से बदलकर ‘Calibrated Tightening’ कर दिया गया। इसका मतलब बाजार ने आगे भी ब्याज दरों को लेकर सख्ती की संभावना के तौर पर लिया। ऊंची ब्याज दर का असर कंपनियों की कर्ज की लागत बढ़ने के साथ ही वैल्यूएशन पर असर पड़ सकता है।

2. $100 के पार Crude Oil ने बढ़ाई टेंशन : कच्चा तेल भारतीय बाजार के लिए दूसरी बड़ी चिंता बना हुआ है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच Brent Crude $102-104 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। कच्चा तेल भारत में महंगाई को ट्रिगर करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर है। यह मौजूदा हालात के साथ ही फ्यूचर आउटलुक भी खराब कर रहा है।

3. रुपये की बढ़ती कमजोरी : रिजर्व बैंक की तरफ से तमाम उपाय किए जाने के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले स्थिर होता हुआ नहीं दिख रहा है। यह एक बड़ी वजह है कि निवेशक भारत के बाजार में आने से कतरा रहे हैं।

4. FII की लगातार बिकवाली ने बढ़ाया दबाव : क्रूड और रेपो रेट की वजह से रुपये पर बढ़ते दबाव और घटते रिटर्न एक्सपेक्टेशन के चलते विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार से लगातार बिकवाली जारी रखे हुए हैं। पिछले सिर्फ 6 कारोबारी सत्रों में FII ने करीब ₹43,395 करोड़ की बिकवाली की है।

5. US Bond Yield और Global Market का झटका : गुरुवार को भारतीय बाजार अकेला कमजोर नहीं था। Global Markets में भी Risk-off Sentiment देखने को मिला। अमेरिकी Treasury Yields में तेज बढ़ोतरी ने ग्लोबल इक्विटी मार्केट्स पर दबाव बढ़ाया है। US 10-year Yield 5.3% और 30-year Yield 5.7% के ऊपर पहुंच गई है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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