बिजनेस

खरीदने जा रहे हैं 1 करोड़ का घर? स्मार्ट कैलकुलेशन से समझें कितना देना चाहिए डाउन पेमेंट

एक करोड़ रुपये का घर खरीदना एक बड़ा वित्तीय फैसला है, जिसमें डाउन पेमेंट की सही गणना आपकी ईएमआई और कुल ब्याज के बोझ को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। आइए स्मार्ट कैलकुलेशन से समझें कि आपको अपनी जेब से कितना भुगतान करना चाहिए।

Image

स्मार्ट कैलकुलेशन से समझें कितना देना चाहिए डाउन पेमेंट

अपने खुद के आशियाने का सपना हर इंसान देखता है, लेकिन मौजूदा समय में महानगरों या अच्छे इलाकों में एक करोड़ रुपये का घर खरीदना कोई आम बात नहीं है। इसके लिए अमूमन लोगों को बैंक से बड़ा होम लोन लेना पड़ता है। जब आप इतनी बड़ी संपत्ति खरीदने का मन बनाते हैं, तो सबसे पहला और महत्वपूर्ण वित्तीय फैसला डाउन पेमेंट (Down Payment) की रकम तय करने को लेकर होता है। बहुत से लोग कम से कम पैसा अपनी जेब से लगाकर बाकी की पूरी रकम लोन के जरिए चुकाना चाहते हैं, जबकि वित्तीय विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि डाउन पेमेंट का गणित जितना स्मार्ट तरीके से समझा जाए, भविष्य का आर्थिक बोझ उतना ही कम होता है। एक करोड़ के घर के लिए सही डाउन पेमेंट का चुनाव आपकी मासिक ईएमआई (EMI) और कुल ब्याज के बोझ को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

कितना मिलता है लोन?

आम तौर पर होम लोन देने वाले बैंक और वित्तीय संस्थान प्रॉपर्टी की कुल वैल्यू का 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा ही लोन के रूप में देते हैं। इसका मतलब यह है कि आपको अपनी जेब से कम से कम 20 से 25 प्रतिशत यानी करीब 20 से 25 लाख रुपये का इंतजाम डाउन पेमेंट के तौर पर करना ही होगा। हालांकि, कई लोग न्यूनतम सीमा यानी 20 लाख रुपये देकर बाकी 80 लाख रुपये का होम लोन ले लेते हैं। लेकिन वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि आप अपनी सेविंग्स से थोड़ा और अधिक पैसा यानी 30 से 40 प्रतिशत तक डाउन पेमेंट के रूप में चुकाते हैं, तो यह आपके लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसा करने से बैंक से लिया जाने वाला कर्ज कम हो जाता है, जिससे लंबी अवधि में आपको बैंक को लाखों रुपये के ब्याज के रूप में कम भुगतान करना पड़ता है।

डाउन पेमेंट करते समय रखें इस बात का ध्यान

दूसरी ओर, आपको इस बात का भी खास ख्याल रखना चाहिए कि डाउन पेमेंट के चक्कर में आपके पास मौजूद सारी बचत या इमरजेंसी फंड पूरी तरह खत्म न हो जाए। घर खरीदते समय सिर्फ डाउन पेमेंट ही खर्च नहीं होता, बल्कि रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी, लीगल फीस, ब्रोकरेज और घर में शिफ्ट होने व इंटीरियर पर भी एक बड़ा खर्च होता है, जो प्रॉपर्टी की कुल कीमत का लगभग 7 से 10 प्रतिशत तक हो सकता है। यदि आप अपनी पूरी लिक्विड सेविंग्स सिर्फ डाउन पेमेंट में झोंक देंगे, तो किसी भी आपातकालीन स्थिति में आपको भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, एक सही रणनीति यह होती है कि आप अपनी कुल बचत का एक संतुलित हिस्सा डाउन पेमेंट के लिए सुरक्षित रखें और बाकी पैसे को निवेश में बनाए रखें ताकि लोन के साथ तालमेल बैठाया जा सके।

टेन्योर का भी रखें ख्याल

अंत में, एक करोड़ रुपये के घर के लिए लोन लेते समय ब्याज दरों और टेन्योर (अवधि) का भी पूरा हिसाब-किताब लगाना बेहद जरूरी है। यदि आप 20 साल के बजाय 15 साल की अवधि का चुनाव करते हैं और थोड़ा बड़ा डाउन पेमेंट देते हैं, तो आपकी वित्तीय स्थिति पर लंबे समय में दबाव काफी कम हो जाता है। हमेशा अपने मासिक बजट का आकलन करें और यह सुनिश्चित करें कि आपके होम लोन की ईएमआई आपकी कुल मासिक आय के 40 से 45 प्रतिशत से अधिक न हो। समझदारी से किया गया यह वित्तीय नियोजन न केवल आपके सपनों के घर को सुरक्षित बनाता है, बल्कि भविष्य के सफर को भी आर्थिक रूप से बेहद आसान और तनावमुक्त कर देता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article