भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि भरोसे और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। पहले लोग सोना गहनों या सिक्कों के रूप में खरीदते थे, लेकिन अब समय के साथ निवेश का तरीका भी बदल गया है। आज डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सोने में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। खासकर युवा वर्ग में डिजिटल गोल्ड का क्रेज काफी ज्यादा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या आप जो गोल्ड खरीद रहे हैं, वह पूरी तरह सुरक्षित और रेगुलेटेड है या नहीं? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप बिना रेगुलेशन वाला गोल्ड खरीद रहे हों?
डिजिटल गोल्ड क्या है और क्यों बढ़ रही है इसकी मांग
डिजिटल गोल्ड में निवेश का मतलब है ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या फिनटेक ऐप के जरिए सोना खरीदना, जिसे कंपनी आपकी ओर से सुरक्षित वॉल्ट में रखती है। इसमें न तो सोना घर लाने की जरूरत होती है और न ही लॉकर या स्टोरेज की चिंता रहती है। सबसे बड़ी बात यह है कि डिजिटल गोल्ड में निवेश की शुरुआत सिर्फ 1 रुपये से भी हो सकती है। यही वजह है कि पहली बार निवेश करने वाले लोग, मिलेनियल्स और जेन Z इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के मुताबिक, जनवरी से नवंबर के बीच भारतीय निवेशकों ने करीब 12 टन डिजिटल गोल्ड खरीदा। मौजूदा कीमतों के हिसाब से इसकी वैल्यू करीब 16,600 करोड़ रुपये बैठती है। यह आंकड़ा बताता है कि डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता कितनी तेजी से बढ़ी है।
ETF और डिजिटल गोल्ड में फर्क समझना जरूरी
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि गोल्ड ETF ही डिजिटल गोल्ड है, लेकिन ऐसा नहीं है। गोल्ड ETF पूरी तरह से सेबी (SEBI) द्वारा रेगुलेटेड होते हैं और शेयर बाजार के जरिए खरीदे-बेचे जाते हैं। वहीं डिजिटल गोल्ड फिलहाल सेबी या किसी अन्य वित्तीय रेगुलेटर के दायरे में नहीं आता। यही सबसे बड़ी चिंता की वजह है।
सेबी की चेतावनी क्यों है अहम
हाल ही में सेबी ने निवेशकों को चेतावनी दी कि डिजिटल गोल्ड न तो रेगुलेटेड सिक्योरिटी है और न ही कमोडिटी मार्केट के मौजूदा नियमों के तहत आता है। इसका मतलब यह है कि अगर भविष्य में किसी डिजिटल गोल्ड कंपनी में समस्या आती है, तो निवेशकों के पास मजबूत कानूनी सुरक्षा नहीं होगी। इस चेतावनी के बाद डिजिटल गोल्ड की खरीद में थोड़ी गिरावट जरूर आई, लेकिन अब भी कई लोग इसमें निवेश कर रहे हैं।
अनरेगुलेटेड गोल्ड में क्या हैं जोखिम
बिना रेगुलेशन वाले गोल्ड में सबसे बड़ा जोखिम भरोसे का होता है। निवेशक पूरी तरह इस बात पर निर्भर होता है कि कंपनी ने सच में उतना फिजिकल गोल्ड खरीदा है या नहीं, जितना उसने दिखाया है। अगर कंपनी बंद हो जाए या धोखाधड़ी सामने आए, तो निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही कारण है कि एक्सपर्ट्स निवेश से पहले पूरी जानकारी लेने की सलाह देते हैं।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के भारत प्रमुख सचिन जैन का कहना है कि डिजिटल गोल्ड ने सोने तक लोगों की पहुंच आसान बनाई है। फ्रैक्शनल ओनरशिप, पारदर्शी कीमतें और स्टोरेज की सुविधा इसकी बड़ी ताकत हैं। लेकिन वे यह भी मानते हैं कि डिजिटल गोल्ड को भरोसेमंद बनाने के लिए रेगुलेशन बेहद जरूरी है, ताकि निवेशकों का विश्वास बना रहे।
डिजिटल गोल्ड कंपनियों के लिए बनेंगे नियम
रेगुलेशन की कमी को देखते हुए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) अब एक सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (SRO) बनाने की तैयारी में है। इसके तहत डिजिटल गोल्ड कंपनियों को कुछ तय नियमों का पालन करना होगा। जैसे कि ग्राहकों का डिजिटल गोल्ड पूरी तरह फिजिकल गोल्ड से बैक्ड होना चाहिए, सुरक्षित वॉल्ट में स्टोरेज, नियमित ऑडिट और न्यूनतम नेटवर्थ जैसी शर्तें लागू होंगी। उम्मीद है कि 2026 की शुरुआत तक ये नियम पूरी तरह लागू हो सकते हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए
अगर आप सोने में निवेश करना चाहते हैं, तो पहले यह तय करें कि आपको रेगुलेटेड विकल्प चाहिए या नहीं। गोल्ड ETF, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स पूरी तरह सुरक्षित और रेगुलेटेड माने जाते हैं। डिजिटल गोल्ड में निवेश करते समय प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता, बैकिंग और नियमों की जानकारी जरूर लें।
