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तेल संकट के बीच आत्मनिर्भर भारत! 21 अप्रैल को PM Modi देंगे मेगा रिफाइनरी की सौगात

वैश्विक तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को राजस्थान की धरती से एक मेगा रिफाइनरी की सौगात देने जा रहे हैं। 9 MMTPA रिफाइनिंग क्षमता वाली यह रिफाइनरी देश की आत्मनिर्भरता में अहम साबित होगी।

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देश को मिलेगी बड़ी सौगात

Pachpadra Refinery Launch : तेल संकट और आयात निर्भरता के दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान दौरे पर रहेंगे, जहां वे पचपदरा रिफाइनरी का उद्धाटन करेंगे। PM Modi देश को हर लिहाज से आत्मनिर्भर बनाने की योजनाओं पर जोर दे रहे हैं। उनके इस विजन के लिहाज से यह परियोजना न सिर्फ राज्य बल्कि देश के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

क्यों अहम है पचपदरा रिफाइनरी?

तेल बाजार की अनिश्चितता और आयात पर भारी निर्भरता के दौर में पचपदरा रिफाइनरी सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि रणनीतिक एसेट के तौर पर तैयार की गई है। HPCL Rajasthan Refinery Limited की यह 9 MMTPA क्षमता वाली रिफाइनरी भारत की रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल वैल्यू चेन को एक ही प्लेटफॉर्म पर मजबूत करती है, जिससे इसका प्रभाव सीधे ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।

आयात निर्भरता घटाने का ठोस मॉडल

भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर बड़ी रिफाइनिंग क्षमता का मतलब है कि कच्चे तेल को देश के भीतर ही प्रोसेस कर वैल्यू एडिशन किया जाए। पचपदरा रिफाइनरी में 7.5 मिलियन टन आयातित और 1.5 मिलियन टन घरेलू क्रूड प्रोसेस करने की क्षमता है, जिससे सप्लाई चेन पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा और बाहरी झटकों का असर सीमित होगा।

‘क्रूड से केमिकल’ तक पूरा वैल्यू चेन

यह भारत के चुनिंदा प्रोजेक्ट्स में है, जहां रिफाइनरी के साथ पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी जुड़ा है। यानी सिर्फ पेट्रोल-डीजल नहीं, बल्कि पॉलीप्रोपलीन, पॉलीएथिलीन जैसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स भी यहीं बनेंगे। इससे भारत को पेट्रोकेमिकल्स के आयात पर निर्भरता कम करने और निर्यात बढ़ाने का मौका मिलेगा।

सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स में बदलाव

अब तक बाड़मेर का कच्चा तेल पाइपलाइन से गुजरात जाकर प्रोसेस होता था, जिससे टैक्स और वैल्यू एडिशन दूसरे राज्यों को मिलता था। पचपदरा में प्रोसेसिंग शुरू होने से यह पूरा आर्थिक लाभ राजस्थान के भीतर ही रहेगा। इससे न सिर्फ राज्य का राजस्व बढ़ेगा बल्कि लॉजिस्टिक्स कॉस्ट भी घटेगी।

वैश्विक तेल संकट के बीच सुरक्षा कवच

होर्मुज जैसे संवेदनशील रूट्स पर तनाव बढ़ने से सप्लाई बाधित होती है और कीमतें उछलती हैं। ऐसी स्थिति में मजबूत घरेलू रिफाइनिंग क्षमता एक ‘बफर’ का काम करती है। पचपदरा जैसी परियोजनाएं भारत को वैश्विक झटकों से आंशिक रूप से सुरक्षित रखने में मदद करती हैं।

रोजगार और औद्योगिक इकोसिस्टम

यह रिफाइनरी अकेले एक प्लांट नहीं, बल्कि पूरे औद्योगिक क्लस्टर की नींव है। डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल यूनिट्स, MSME, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज और सर्विस सेक्टर में बड़े स्तर पर रोजगार पैदा होंगे। इससे मारवाड़ क्षेत्र आर्थिक रूप से मजबूत होगा।

पर्यावरण और आधुनिक तकनीक का संतुलन

BS-VI ईंधन उत्पादन और Zero Liquid Discharge जैसी तकनीकें इस परियोजना को पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर बनाती हैं। इसका मतलब है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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