भारतीय आमों का स्वाद अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने सात समंदर पार अमेरिका में भी अपनी धाक जमा ली है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोग और अब अमेरिकी नागरिक भी भारतीय आमों के लिए दीवाने हो रहे हैं। स्थिति यह है कि जैसे ही भारतीय आमों की खेप अमेरिका पहुंचती है, वह 'हॉट केक' की तरह मिनटों में बिक जाती है। लोग इन आमों को पाने के लिए लंबी कतारों में लग रहे हैं और ऊंची कीमतें चुकाने के लिए भी तैयार हैं।
क्यों है इतनी भारी डिमांड?
अमेरिका में मुख्य रूप से मैक्सिको और दक्षिण अमेरिका से आम आते हैं, लेकिन स्वाद के मामले में वे भारतीय आमों के सामने कहीं नहीं टिकते। भारतीय आम अपनी मिठास, खुशबू और मखमली बनावट के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। अमेरिकी बाजारों में भारतीय आमों की मांग इतनी बढ़ गई है कि लोग सोशल मीडिया ग्रुप्स और व्हाट्सएप कम्युनिटी के जरिए इनकी एडवांस बुकिंग कर रहे हैं। कुछ लोग तो आम के एक बॉक्स के लिए घंटों गाड़ी चलाकर दूसरे शहर जाने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं।
इन 5 किस्मों के दीवाने हुए अमेरिकी
भारतीय आमों की कई किस्में हैं, लेकिन अमेरिका में इन पांच किस्मों की सबसे ज्यादा मांग देखी जा रही है
- अल्फांसो (हापुस): इसे 'फलों का राजा' कहा जाता है। अपनी बेहतरीन खुशबू और केसरिया रंग के कारण यह अमेरिकियों की पहली पसंद बना हुआ है।
- केसर: गुजरात का केसर आम अपनी तेज खुशबू और मिठास के लिए जाना जाता है। अमेरिका में इसकी मांग सबसे ज्यादा है क्योंकि यह पल्प बनाने के लिए भी बेहतरीन माना जाता है।
- दशहरी: उत्तर प्रदेश का यह मशहूर आम अपनी पतली गुठली और मिठास के कारण विदेशों में खूब पसंद किया जा रहा है।
- लंगड़ा: बनारस का लंगड़ा आम अपने अनोखे स्वाद के कारण अमेरिकी ग्राहकों के बीच काफी चर्चा में है।
- चौसा: अपनी अधिक मिठास और रस के कारण चौसा आम का सीजन आते ही अमेरिका में इसकी मांग बढ़ जाती है।
बाजार में बढ़ती कीमतें और दीवानगी
अमेरिका में भारतीय आमों की कीमत स्थानीय या मैक्सिकन आमों की तुलना में काफी ज्यादा होती है, फिर भी लोग इसे खरीदने से पीछे नहीं हटते। एक-एक पेटी आम के लिए लोग 50 से 100 डॉलर तक खर्च कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि यह केवल एक फल नहीं, बल्कि भारतीयों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का एक इमोशन भी है। वहीं, अमेरिकियों के लिए यह एक ऐसा लग्जरी अनुभव है, जिसका स्वाद उन्हें बार-बार खींच लाता है।
भारत सरकार और निर्यातकों के प्रयासों के कारण अब अमेरिका के लिए मैंगो एक्सपोर्ट की प्रक्रिया पहले से आसान हुई है। बेहतर पैकेजिंग और रेडिएशन ट्रीटमेंट के बाद आमों को सीधे अमेरिकी स्टोर्स तक पहुंचाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आपूर्ति इसी तरह बनी रही, तो आने वाले समय में भारतीय आम अमेरिकी फल बाजार का एक बड़ा हिस्सा बन सकते हैं। मजेदार बात ये है कि भारत दुनिया का लगभग आधा आम अकेले पैदा करता है, यानी करीब 2 करोड़ मीट्रिक टन, लेकिन हम ठहरे पक्के खाने वाले, हम अपना 99% आम खुद ही डकार जाते हैं और सिर्फ 1% बाहर भेजते हैं। इसी बात पर विदेशी जनता चकरा गई है। एक यूजर ने तो यहां तक कह दिया, 'अगर मेरे पास केसर और हापुस जैसे आमों का खजाना होता, तो मैं भी किसी को एक दाना न दूं'। कुछ विदेशी तो ये भी कह रहे हैं कि, 'भारतीयों की चमकती त्वचा का राज शायद ये आम ही हैं, इसलिए थोड़ा हमारे साथ भी शेयर करो भाई, इतने मतलबी मत बनो।'
