बिजनेस

Adani Power Share: पहली बार ये काम करने जा रहे हैं अडानी, शेयर होल्डर्स पर होगा सीधा असर

Adani Power Share: पावर सेक्टर की बड़ी कंपनी अडानी पावर ने अपने निवेशकों को दो बड़ी खबरें दी हैं। पहली कंपनी ने 1:5 के रेशियो में स्टॉक स्प्लिट यानी शेयरों को टुकड़ों में बांटने का ऐलान किया है। दूसरी कंपनी के जून तिमाही के नतीजे भी सामने आए हैं। स्टॉक स्प्लिट का काम अडानी पहले बार करने जा रहे हैं जिसका सीधा असर निवेशकों पर पड़ेगा।

Image

Adani Power Share (Pic Credit: Canva)

Adani Power Share: अडानी ग्रुप की पावर सेक्टर से जुड़ी कंपनी Adani Power ने अपने शेयरधारकों के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। कंपनी पहली बार अपने शेयरों को टुकड़ों में बांटने जा रही है यानी स्टॉक स्प्लिट करने का फैसला लिया गया है। इसका असर सीधे तौर पर मौजूदा निवेशकों पर पड़ेगा क्योंकि उनके पास अब एक की जगह कई शेयर होंगे। साथ ही, शेयरों की कीमत भी छोटे निवेशकों के लिए और आकर्षक हो सकती है। यही नहीं पावर सेक्टर की बड़ी कंपनी अडानी पावर ने अपने निवेशकों को दो बड़ी खबरें दी हैं। पहली कंपनी ने 1:5 के रेशियो में स्टॉक स्प्लिट यानी शेयरों को टुकड़ों में बांटने का ऐलान किया है। दूसरी कंपनी के जून तिमाही के नतीजे भी सामने आए हैं।

स्टॉक स्प्लिट क्या है और इसका मतलब?

अडानी पावर ने बताया है कि वह अपने 10 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर को 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 5 शेयरों में बांटेगी। इसका मतलब ये है कि अगर आपके पास पहले 1 शेयर था, तो अब आपको 5 शेयर मिलेंगे। हालांकि, कुल निवेश की वैल्यू नहीं बदलेगी बस शेयरों की संख्या और प्रति शेयर कीमत में बदलाव आएगा। यह पहली बार है जब अडानी पावर ने स्टॉक स्प्लिट का ऐलान किया है। कंपनी ने रिकॉर्ड डेट की घोषणा अभी नहीं की है।

जून तिमाही के नतीजे

वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में अडानी पावर का मुनाफा 15.5% घटकर ₹3,305 करोड़ रहा। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹3,912 करोड़ था। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में मुनाफे में बढ़ोतरी देखी गई है। EBITDA (कमाई से पहले का लाभ) भी घटकर ₹5,744 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹6,290 करोड़ था। EBITDA मार्जिन भी 41.4% से घटकर 40.3% रह गया। कंपनी का रेवेन्यू भी 5.6% घटकर ₹14,109 करोड़ रहा।

बिजली उत्पादन और क्षमता में बढ़ोतरी

इस तिमाही में अडानी पावर ने 25.7 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन किया, जो पिछले साल से 1.6% ज्यादा है। कंपनी की स्थापित उत्पादन क्षमता भी सालाना 15% बढ़कर 17,550 मेगावाट हो गई है। हालांकि, प्लांट लोड फैक्टर (PLF) घटकर 67% रह गया, जो पिछले साल 78% था। इसका मतलब है कि प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल रहे हैं।

(Disclaimer: यह लेख केवल सूचना देने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है और इसे किसी प्रकार की निवेश सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल अपने पाठकों/दर्शकों को सलाह देता है कि किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।)

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article