बिजनेस

8वां वेतन आयोग: 1947 से अब तक कितना बदला कर्मचारियों का वेतन, क्या घटेगा न्यूनतम और अधिकतम सैलरी का अंतर?

8th Pay Commission Salary: 8वें वेतन आयोग को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि न्यूनतम और अधिकतम वेतन का अंतर घटे, जिससे निचले कर्मचारियों को ज्यादा फायदा मिले।

Image

8वां वेतन आयोग: क्या घटेगी सैलरी की खाई? लाखों कर्मचारियों की बढ़ीं उम्मीदें

Photo : iStock

8th Pay Commission Salary : केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हर बार जब नया वेतन आयोग आता है, तो सबसे ज्यादा ध्यान दो चीजों पर जाता है। न्यूनतम बेसिक सैलरी कितनी बढ़ेगी और अधिकतम वेतन कितना होगा। इसी के साथ एक अहम सवाल यह भी उठता है कि क्या छोटे और बड़े कर्मचारियों की सैलरी के बीच का अंतर कम होगा? दरअसल, न्यूनतम और अधिकतम बेसिक सैलरी के बीच के अंतर को कम्प्रेशन रेशियो कहा जाता है। अभी 7वें वेतन आयोग में यह अनुपात 1:13.9 है। यानी सबसे ऊंचे पद पर बैठे कर्मचारी की बेसिक सैलरी, सबसे निचले स्तर के कर्मचारी से लगभग 14 गुना ज्यादा है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि 8वें वेतन आयोग में इसे घटाकर 1:8 किया जाए।

क्या होता है कम्प्रेशन रेशियो?

कम्प्रेशन रेशियो का मतलब है कि सबसे कम और सबसे ज्यादा वेतन के बीच कितना अंतर है। अगर यह अनुपात ज्यादा होता है, तो इसका मतलब होता है कि वेतन असमानता ज्यादा है। वहीं, अनुपात कम होने का मतलब है कि कर्मचारियों के बीच वेतन का अंतर कम है। सरकार जब नया वेतन आयोग लागू करती है, तो वह सिर्फ वेतन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि इस अंतर को संतुलित करने पर भी विचार करती है।

पहले वेतन आयोग में कितना था अंतर?

भारत का पहला वेतन आयोग 1946-47 में लागू हुआ था। उस समय न्यूनतम बेसिक सैलरी सिर्फ 55 रुपये थी, जबकि अधिकतम सैलरी 2,000 रुपये थी। उस समय कम्प्रेशन रेशियो 1:36.4 था। यानी वेतन में भारी अंतर था।

दूसरे वेतन आयोग में सबसे ज्यादा बढ़ी खाई

1957 में आए दूसरे वेतन आयोग में यह अंतर और बढ़ गया। न्यूनतम वेतन बढ़कर 80 रुपये हुआ, लेकिन अधिकतम वेतन 3,000 रुपये पहुंच गया। इससे कम्प्रेशन रेशियो 1:37.5 हो गया, जो अब तक का सबसे ज्यादा माना जाता है।

तीसरे वेतन आयोग से शुरू हुआ संतुलन

1973 में तीसरे वेतन आयोग ने पहली बार इस खाई को कम करने की कोशिश की। न्यूनतम वेतन 196 रुपये और अधिकतम 3,500 रुपये तय किया गया। इससे अनुपात घटकर 1:17.9 रह गया। यहीं से सरकार ने वेतन असमानता को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाना शुरू किया।

चौथे और पांचवें वेतन आयोग में और घटी दूरी

1986 में चौथे वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी 750 रुपये और अधिकतम 8,000 रुपये हुई। अनुपात 1:10.7 रहा। इसके बाद 1996 में पांचवें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 2,550 रुपये और अधिकतम 26,000 रुपये तय हुआ। इससे अनुपात 1:10.2 तक आ गया।

छठे और सातवें वेतन आयोग में फिर बढ़ा अंतर

छठे वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये और अधिकतम 80,000 रुपये रखी गई। इससे अनुपात 1:11.4 हो गया। इसके बाद 7वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये और अधिकतम 2.50 लाख रुपये किया गया। इससे यह अंतर बढ़कर 1:13.9 पहुंच गया।

8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीद?

अब कर्मचारी संगठनों की मांग है कि 8वें वेतन आयोग में न्यूनतम और अधिकतम वेतन के बीच का अंतर कम किया जाए। खासतौर पर Federation of National Postal Organizations (FNPO) जैसे संगठन चाहते हैं कि कम्प्रेशन रेशियो 1:8 हो।

अगर ऐसा होता है, तो निचले स्तर के कर्मचारियों की सैलरी में ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे वेतन असमानता कम होगी और लाखों कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों की आय और भविष्य दोनों पर बड़ा असर डाल सकता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article