बिजनेस

आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया...30 हजार की सैलरी वाले GenZ पर 40 लाख का कर्ज, क्या है असली कारण?

आज की युवा पीढ़ी यानी Gen Z की सैलरी भले ही 30 हजार हो लेकिन उनके शौक लाखों वाले हैं। इसी शौक को पूरा करने के चक्कर में ये जेनेरशन कर्ज के मकड़ जाल यानी Debt Trap में फंसती जा रही है। आइए आपको बताते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी

Image

Genz Debt Trap

आज के युवाओं, जिन्हें हम 'Gen Z' (1997-2012 के बीच जन्मे) कहते हैं, उनकी जीवनशैली को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। 'आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया' वाली कहावत इन पर सटीक बैठती है। CIBIL और यूनिफाइड फिनटेक फोरम (UFF) के हालिया आंकड़े बताते हैं कि महानगरों में रहने वाले युवा अपनी कमाई से कई गुना ज्यादा कर्ज लेकर जी रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि ₹30,000 महीना कमाने वाले युवाओं पर ₹40 लाख तक का कर्ज देखा जा रहा है। यह कर्ज घर या गाड़ी जैसे एसेट्स के लिए नहीं, बल्कि गैजेट्स, वेकेशन और लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए लिया जा रहा है।

कर्ज के मकड़जाल की शुरुआत

रोहन नाम के शख्स की कहानी इस संकट का सटीक उदाहरण है। महज 19 साल की उम्र में उन्होंने फोटोग्राफी के शौक के लिए एक छोटा सा लोन लिया। बिना गारंटी और बिना किसी मुश्किल कागजी कार्रवाई के मोबाइल ऐप से मिलने वाले 'इंस्टेंट लोन' ने उन्हें ऐसा लालच दिया कि 5 साल के भीतर उनके सिर पर 54 अलग-अलग लोन अकाउंट्स का बोझ आ गया और कुल कर्ज ₹40 लाख तक पहुँच गया। जब रिकवरी एजेंट्स के फोन और घर पर आने का सिलसिला शुरू हुआ, तब उन्हें अहसास हुआ कि वे एक गहरे कुएं में गिर चुके हैं।

क्यों कर्ज के जाल में फंस रहे हैं युवा?

1. क्रेडिट तक आसान पहुंच: आज फोन पर एक क्लिक करते ही ₹10,000 से ₹2 लाख तक का लोन मिल जाता है। BNPL (अभी खरीदें, बाद में चुकाएं) और 'क्रेडिट ऑन UPI' जैसी सुविधाओं ने उधार लेना इतना आसान बना दिया है कि युवा इसके ऊंचे ब्याज दर (18% से 48% तक) को नजरअंदाज कर देते हैं।

2. सोशल मीडिया का प्रेशर (FOMO): इंस्टाग्राम और फेसबुक पर साथियों की ट्रैवल रील्स और महंगे गैजेट्स देखकर युवाओं में वैसी ही लाइफस्टाइल जीने की होड़ मच गई है। पैसाबाजार के सर्वे के मुताबिक, 27% पर्सनल लोन सिर्फ घूमने-फिरने (Travel) के लिए लिए जा रहे हैं।

3. आमदनी और महंगाई का अंतर: जहां सैलरी में बढ़ोतरी 10% के आसपास स्थिर है, वहीं लाइफस्टाइल और महंगाई का खर्च कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। इस गैप को भरने के लिए युवा क्रेडिट कार्ड को 'रोटेट' करते रहते हैं।

RBI की चेतावनी और चौंकाने वाले आंकड़े

RBI की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, माइक्रोफाइनेंस और अनसिक्योर्ड लोन सेक्टर में 'स्ट्रेस्ड एसेट्स' (वो कर्ज जो समय पर नहीं चुकाए जा रहे) तेजी से बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, फिनटेक ऐप से लोन लेने वाले 65% लोग 26 से 35 साल के हैं, और इनमें से लगभग 26% लोग 90 दिनों से ज्यादा समय से अपनी किश्तें नहीं चुका पाए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां भी अपना रेवेन्यू बढ़ाने के चक्कर में युवाओं की रीपेमेंट क्षमता (चुकाने की ताकत) की जांच किए बिना अंधाधुंध कर्ज बांट रही हैं।

खतरे के संकेत (Red Flags)

मिनिमम ड्यू पेमेंट: अगर आप क्रेडिट कार्ड का सिर्फ न्यूनतम बिल भर रहे हैं, तो आप कभी मूल राशि नहीं चुका पाएंगे।

लोन रोटेशन: एक पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया और ज्यादा ब्याज वाला लोन लेना।

50% से ज्यादा DTI: अगर आपकी सैलरी का आधा हिस्सा सिर्फ EMI भरने में जा रहा है।

बुनियादी जरूरतों के लिए उधार: अगर किराया, बिजली बिल या राशन के लिए आपको लोन लेना पड़ रहा है।

इस जाल से कैसे बचें?

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि युवाओं को 'एसेट' बनाने (जैसे होम लोन या एजुकेशन लोन) और 'खर्च' करने (जैसे मोबाइल या वेकेशन लोन) वाले कर्ज के बीच फर्क समझना चाहिए। सुरक्षित रहने के लिए अपना डेट-टू-इनकम रेश्यो हमेशा 30% से कम रखें और अपनी क्रेडिट लिमिट का केवल 30% ही इस्तेमाल करें। याद रखें, 'YOLO' (You Only Live Once) के चक्कर में लिया गया आज का छोटा सा लोन आपके कल के सुकून को छीन सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article