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PPF, SSY और NSC के वो 3 सीक्रेट जो 90% निवेशक नहीं जानते, टैक्स सेविंग तो सिर्फ ट्रेलर है, असली खेल यहां समझें

बदलते दौर के साथ आन निवेशकों की धारणा में बदलाव आया है। आज छोटे निवेशक भी म्यूचअल फंड का चुनाव कर रहा है। नए टैक्स रिजीम लागू होने के बाद 80सी की जरूरत खत्म हो गई है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि आज भी स्मॉल सेविंग स्कीम बड़े काम की है।

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बचत योजनाएं

इनकम टैक्स विभाग द्वारा नए टैक्स रिजीम लाने के बाद से स्मॉल सेविंग के प्रति बहुत सारे निवेशकों का रुझान कम हुआ है। ओल्ड टैक्स रिजीम में अधिकांश निवेशक, आयकर की धारा 80सी के तहत टैक्स छूट पाने के लिए इनमें निवेश करते थे लेकिन अब उनको लगता है कि इसकी जरूरत नहीं। हालांकि, टैक्स एक्सपर्ट का यह नहीं मानना है कि पीपीएफ (PPF), सुकन्या समृद्धि (SSY) और एनएससी (NSC), टैक्स बचाने से कहीं आगे हैं। इसके फायदे को सिर्फ टैक्स बचत तक जोड़ कर नहीं देखना चाहिए। आइए जानते हैं कि वो ऐसा क्यों कह रहे हैं।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)

नए टैक्स रिजीम आने के बाद पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में सालाना 1.50 लाख रुपये तक किए गए निवेश पर आयकर की धारा 80सी के तहत टैक्स छूट नहीं मिलती है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि इसमें किए निवेश से मिले ब्याज और मैच्योरिटी रेवेन्यू, दोनों पर टैक्स छूट वैसी ही रहती है। यानी आपको कोई टैक्स नहीं देना होता है। यह कोई छोटा-मोटा फायदा नहीं है। PPF एक खास मामला है क्योंकि यह ऐसे देश में लंबे समय तक बिना टैक्स वाली कंपाउंडिंग की सुविधा देता है, जहां FD, डेट म्यूचुअल फंड और सरकारी बॉन्ड जैसे दूसरे फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट पर हर साल ब्याज पर टैक्स लगता है।

जब आप इस तरह से सोचते हैं, तो PPF का मतलब उस साल आपके टैक्स कम करना नहीं है जिसमें आप पैसा लगाते हैं, बल्कि यह समय के साथ आपके रिटर्न को सुरक्षित रखने के बारे में है। अगर आप इसे 15 से 25 साल तक बनाए रखने की उम्मीद करते हैं, तो यह टैक्स शेल्टरिंग आपको ज्यादा शॉर्ट-टर्म या मीडियम-टर्म ऑप्शन की तुलना में कहीं बेहतर असरदार यील्ड दे सकता है।

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)

SSY: जहां सोशल पॉलिसी और बिहेवियरल डिज़ाइन एक-दूसरे से मिलते हैं

सुकन्या समृद्धि योजना, जो बेटियों के नाम से निवेश की सुविधा देती है। इसमें 21 साल की मैच्योरिटी है, जल्दी बंद करने पर बड़ी पेनल्टी है, और 18 साल की उम्र तक कोई लिक्विडिटी नहीं है। लेकिन यह सख्ती जानबूझकर की गई है। इससे बहुत सारे लोगों को लगता है कि यह ठीक नहीं है। हालांकि, यह लक्ष्यों के आधार पर डिसिप्लिन देती है, जो एक बिहेवियरल डिजाइन का हिस्सा है जो यह पक्का करता है कि पैसा स्कूल या शादी के लिए बचाया जाए। इसमें निवेश पर अभी 8.2% की दर से सबसे ज्यादा ब्याज मिल रहा है।

नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)

नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट में 7.7% सालाना इंटरेस्ट रेट है और यह सरकार द्वारा सपोर्टेड है, लेकिन आपको इंटरेस्ट पर टैक्स देना होगा। अगर आप 80C डिडक्शन (मूलधन या उस इंटरेस्ट पर जिसे दोबारा इन्वेस्ट किया जाता है) का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो टैक्स के बाद रिटर्न बहुत कम हो जाता है। NSC अभी भी कुछ चीजों के लिए उपयोगी है, जिसमें तब शामिल है जब आपको लगातार पेमेंट के साथ 5-साल का लॉक-इन चाहिए हो या जब आप अभी भी पुराने टैक्स नियमों के तहत हों।

हालांकि, अगर कोई निवेशक ओल्ड टैक्स रिजीम में है तो उनके लिए आज भी ये तीनों निवेश माध्यम डबल फायदा देने वाले हैं। वहीं अगर आप अपने निवेश पर बिल्कुल जोखिम लेना नहीं चाहते हैं और फिक्स रिटर्न चाहते हैं तो ये स्मॉल सेविंग स्कीम बेस्ट हैं।

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Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभ... और देखें

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