बिजनेस

GST On Popcorn: पॉपकॉर्न पर GST के 3 अलग-अलग रेट, छिड़ गई बहस, नमकीन-कैरेमल वाले पर कितना टैक्स

GST On Popcorn In India: बिना पैक और लेबल वाले नमकीन पॉपकॉर्न पर 5% जीएसटी लगता है। पहले से पैक और लेबल वाले रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न पर 12% जीएसटी है, जबकि कैरेमल पॉपकॉर्न को 18% स्लैब में रखा गया है।

Image

भारत में पॉपकॉर्न पर जीएसटी

Photo : Times Now Digital
KEY HIGHLIGHTS
  • पॉपकॉर्न पर 3 अलग-अलग जीएसटी रेट
  • सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस
  • 5%, 12% और 18% की टैक्स रेट

GST On Popcorn In India: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कैरेमेल पॉपकॉर्न पर जीएसटी बढ़ाकर 18% कर दिया। इस मामले में सोशल मीडिया पर पॉपकॉर्न को लेकर बहस छिड़ गई है। दिलचस्प बात यह है कि अब पॉपकॉर्न पर तीन अलग-अलग स्लैब (5%, 12% और 18%) के तहत टैक्स लगाया जाएगा। ये एक ऐसा कदम माना जा रहा है जिसने GST रेट को तय करते समय लागू किए जाने वाले फॉर्मूले पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। बता दें कि 55वीं जीएसटी काउसिंल की बैठक के बाद वित्त मंत्री ने पॉपकॉर्न की दरों में बदलाव का ऐलान किया, जिससे बहस शुरू हुई।

ये भी पढ़ें -

किस पॉपकॉर्न पर कितना टैक्स

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पहले से पैक किए गए, लेबल वाले रेडी-टू-ईट स्नैक्स पर 12% जीएसटी लगता है, जबकि चीनी कन्फेक्शनरी के तहत आने वाले कैरेमल पॉपकॉर्न पर 18% टैक्स लगता है। सीतारमण ने इन अंतरों को सही ठहराया है।

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त चीनी वाले आइटम, जैसे कि कैरेमल पॉपकॉर्न, को नमकीन वेरिएंट से अलग माना जाता है क्योंकि वे चीनी कन्फेक्शनरी के लिए एक अलग श्रेणी के तहत आते हैं। नमकीन, कैरेमलाइज्ड, सादे पॉपकॉर्न को कुछ राज्यों में नमकीन के रूप में बेचा जा रहा है। कैरेमलाइज्ड पॉपकॉर्न में अतिरिक्त चीनी होती है, इसलिए नमकीन से अलग रेट पर विचार किया गया।"

किस पॉपकॉर्न पर लगेगा 5 फीसदी टैक्स

बिना पैक और लेबल वाले नमकीन पॉपकॉर्न पर 5% जीएसटी लगता है। पहले से पैक और लेबल वाले रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न पर 12% जीएसटी है, जबकि कैरेमल पॉपकॉर्न को 18% स्लैब में रखा गया है।

क्यों खड़ा हुआ विवाद

विवाद तब शुरू हुआ जब यह पता चला कि नमकीन पॉपकॉर्न को ‘नमकीन’ की श्रेणी में रखा गया है और उस पर कम रेट से टैक्स लगाया गया, जबकि कैरेमलाइज्ड पॉपकॉर्न को ‘मिठाई’ के रूप में वर्गीकृत किया गया, जिस पर अधिक टैक्स लगाया गया।

इस अंतर ने सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर इसलिए क्योंकि नए टाइप, जैसे कि शुगर-फ्री कैरेमलाइज्ड पॉपकॉर्न, अलग-अलग टैक्स ब्रैकेट के अंतर्गत आ सकते हैं।

Kashid Hussain
काशिद हुसैन author

<p>काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की बिजनेस टीम में वह शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और आर्थिक जगत से जुड़ी सभी तरह की स्टोरी और वेब स्टोरी करते हैं। रिसर्च आधारित स्टोरी के लिए नए एंगल तलाश करना और रीडर्स की रुचि के अनुसार कॉपी लिखने पर फोकस रहता है। शेयर बाजार में खास रुचि है और इससे जुड़ी रियल टाइम खबरें कम समय में लगाने में विशेषज्ञता है। मीडिया में काम करने का 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें गुडरिटर्न्स और शेयर मंथन वेबसाइटों के अलावा निवेश मंथन पत्रिका में भी काम किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन के बाद आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो एंव टेलीविजन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ग्रेजुएशन के दौरान सहारा समय और सिटी न्यूज में इंटर्नशिप के साथ-साथ अखबार और वेबसाइट के लिए लिखना शुरू कर दिया था। काशिद को किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और क्रिकेट में रुचि है। बिजनेस के अलावा खेल जगत और इंटरनेशनल खबरों में भी रुचि है।<br></p>

और पढ़ें
End of Article