भारत के समग्र इकोसिस्टम में उत्पादकता का सीधा संबंध मौसमी चक्रों से है, जहां गर्मी का मौसम अक्सर पशुपालकों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर सामने आता है। बढ़ता तापमान पशुओं में हीट स्ट्रेस, चारे की कम खपत और अंततः उत्पादन में गिरावट का कारण बनता है। वर्षों से इन चुनौतियों का सामना मुख्यतः रिएक्टिव तरीके से किया जाता रहा है यानी समस्या के प्रभाव दिखने के बाद ही कदम उठाए जाते हैं।
कपिला पशु आहार अपने चल रहे अभियान ‘तैय्यारी का मौसम’ के जरिए इस सोच को बदलने की दिशा में काम कर रहा है। यह अभियान समय रहते तैयारी के महत्व पर जोर देता है और इसे गर्मियों के दौरान निरंतर उत्पादकता बनाए रखने का एक प्रमुख आधार मानता है।
इस सोच के पीछे एक सरल समझ है गर्मी के प्रभाव भले ही अपरिहार्य हों, लेकिन समय पर हस्तक्षेप के जरिए उनके असर को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, कई पशुपालक तब तक इंतजार करते हैं जब तक पशुओं का स्वास्थ्य बिगड़ने न लगे या उत्पादन में गिरावट न दिखे। यह देरी अक्सर उत्पादकता और संसाधनों दोनों में टाले जा सकने वाले नुकसान का कारण बनती है।
कपिला पशु आहार अपने चल रहे अभियान ‘तैय्यारी का मौसम’ के माध्यम से इस अंतर को दूर करने का प्रयास करता है और पशुपालकों को समय से पहले तैयारी करने के लिए प्रेरित करता है, ताकि वे चरम गर्मी से पहले ही अपने पशुओं की देखभाल बेहतर तरीके से कर सकें। इसमें संतुलित पोषण बनाए रखना, पहले से फीडिंग प्लान तैयार करना और हीट स्ट्रेस के प्रभाव को कम करने के लिए निवारक उपाय अपनाना शामिल है।
“हमने देखा है कि गर्मियों के दौरान होने वाली अधिकांश उत्पादकता हानि अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती है। समस्या यह है कि हस्तक्षेप अक्सर बहुत देर से होता है। ‘तैय्यारी का मौसम’ के जरिए हम पशुपालकों को आगे सोचने और समय रहते कदम उठाने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं, क्योंकि असली फर्क वहीं से आता है,” कहा तरु शिवहरे, CMO और डायरेक्टर, कपिला पशु आहार ने।
इस बदलाव के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। समय रहते तैयारी पशुओं के स्वास्थ्य को स्थिर रखने में मदद करती है, चारे की नियमित खपत को बनाए रखती है और यह सुनिश्चित करती है कि चरम गर्मी के दौरान उत्पादन में अचानक गिरावट न आए। साथ ही, यह रिएक्टिव उपायों की जरूरत को भी कम करती है, जो अक्सर कम प्रभावी और ज्यादा संसाधन-खर्चीले होते हैं।
इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी और सहजता है। स्पष्ट और आसान भाषा में संदेश देने के कारण यह अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में आसानी से समझा और अपनाया जा सकता है, जिससे प्रोएक्टिव देखभाल एक व्यवहारिक और लागू करने योग्य कदम बन जाती है।
INDPNT (इंडिपेंडेंट) द्वारा कॉन्सेप्चुअलाइज किया गया यह अभियान जमीनी चुनौतियों को एक ऐसे नैरेटिव में बदलता है जो जागरूकता और व्यवहारिक बदलाव दोनों को बढ़ावा देता है। जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन पशुपालन को प्रभावित कर रहा है, वैसे-वैसे भविष्य की सोच और योजना की जरूरत और भी बढ़ती जा रही है।
कपिला पशु आहार अपने चल रहे अभियान ‘तैय्यारी का मौसम’ के जरिए प्रोएक्टिव सोच को आगे बढ़ाकर न केवल पशुपालकों को मौसमी चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने में मदद कर रहा है, बल्कि उन्हें लंबे समय तक उत्पादकता बनाए रखने और अधिक मजबूत बनने में भी सक्षम बना रहा है।
(No Times Now Journalists are involved in creation of this article.)
