किडनी की बीमारी का पता अक्सर तब चलता है, जब वह गंभीर अवस्था में पहुँच चुकी होती है। ऐसे में, गंभीर जटिलताएँ विकसित होने से पहले अपनी किडनी की सेहत का आकलन कैसे किया जा सकता है? Kidney Connect India के इस एपिसोड में गीतांजलि मेडिकल कॉलेज के डॉ. सूरज गुप्ता बताते हैं कि किडनी की बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाना एक बड़ी चुनौती क्यों है। साथ ही, वे उन जाँचों, जोखिम कारकों और इलाज तक पहुँच से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करते हैं, जिनके बारे में लोगों को जानकारी होनी चाहिए। डॉ. गुप्ता किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने और संभावित नुकसान की पहचान करने में दो महत्त्वपूर्ण जाँचों की भूमिका समझाते हैं — सीरम क्रिएटिनिन, जिसका उपयोग अनुमानित ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (eGFR) की गणना के लिए किया जाता है, और यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन रेशियो (ACR)। इस बातचीत में किडनी की बीमारी के जोखिम वाले लोगों की पहचान करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका, डायलिसिस का खर्च और उसकी उपलब्धता, तथा किडनी के मरीजों के खान-पान में प्रोटीन को लेकर प्रचलित गलत धारणाओं पर भी चर्चा की गई है।