Sitamarhi News: क्या है HIV के वायरल आंकड़ों सा सच? बिहार एड्स नियंत्रण समिति ने बताया हकीकत
- Curated by: Digpal Singh
- Updated Dec 11, 2025, 05:20 PM IST
Sitamarhi News: बिहार के सीतामढ़ी में अचानक बढ़ते HIV मरीजों के दावों ने चिंता बढ़ाई, जिनमें 7400 से अधिक मरीज सामने आने का दावा किया गया है। लेकिन बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति ने इन आंकड़ों को भ्रामक करार दिया है। समिति के अनुसार पिछले 20 वर्षों में कुल 6900 मरीज रजिस्टर हुए हैं, जबकि इस वर्ष सिर्फ 200 नए मरीज मिले।
सीतामढ़ी में HIV के मामलों में बढ़ाई चिंता, समिति ने बताई सच्चाई
Sitamarhi News: यह तो सभी जानते हैं कि HIV एक लाइलाज बीमारी है। ऐसे में अगर कहीं पर अचानक HIV मरीजों की बड़ी संख्या सामने आती है तो यह स्थानीय प्रशासन के साथ ही देश के लिए भी चिंता का विषय बन जाती है। बिहार के सीतामढ़ी जिले में HIV मरीजों की संख्या ने ऐसी ही चिंता बढ़ा दी है।
HIV मरीजों की संख्या के जो आंकड़े आए हैं, वह काफी चिंताजनक हैं। सामने आए आंकड़ों में 7400 से ज्यादा HIV पॉजिटिव मरीजों का दावा किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, यहां पर हर रोज 40-60 नए मरीजों की भी पहचान हो रही है। इससे बिहार के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
हालांकि, बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति (BSACS) ने इन आंकड़ों को तथ्यहीन और भ्रामक करार दिया है। समिति के मुताबिक 2025-26 के अक्टूबर माह तक सिर्फ 200 नए मरीजों की पहचान हुई थी। जिले के एंटी रेट्रो वायरल थैरेपी (ART) केंद्र में 4958 मरीज नियमित रूप से ARV दवाओं का सेवन कर रहे हैं।
BSACS ने साफ तौर पर कहा है कि 6900से ज्यादा मरीजों की संख्या का दावा सरासर गलत है। बताया गया कि यह आंकड़ा पिछले 20 वर्षों का कुल डाटा है। समिति की तरफ से बताया गया कि साल 2005 में सीतामढ़ी में ICTC की शुरुआत की गई थी और ART केंद्र की स्थापना 1 दिसंबर 2012 को हुई थी।
बताया गया कि पिछले 20 वर्षों में कुल 6900 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। इनमें से की लोगों की तो मृत्यु भी हो चुकी है या वे अन्य जिलों में चले गए हैं। समिति की तरफ से कहा गया है कि रोज नए मरीज मिलने और संख्या बढ़ने का दावा भ्रामक है, क्योंकि अस्पतालों में सिर्फ पुराने रजिस्टर्ड मरीज ही आते हैं।
समिति ने बताया कि छोटे बच्चों में भी संक्रमण के मामलों की संख्या सिर्फ 188 है और उनका नियमित तौर पर इलाज चल रहा है। समिति की तरफ से मीडिया में अपील की गई है कि वे विश्वनीय आंकड़ों की पुष्टि के बाद ही खबर प्रसारित करें।