भारत के प्रीमियम ब्रॉडकास्ट नेटवर्क टाइम्स नेटवर्क (Times Network) ने 30 जुलाई बुधवार को क्वालकॉम के साथ साझेदारी में 'Snapdragon for India - Auto Day: Leadership Dialogues' कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम AWS के प्रेजेंटेशन और KPIT के को-पावर्ड समर्थन के साथ आयोजित हुआ। इसका उद्देश्य भारत के टेक्नोलॉजी-आधारित ऑटोमोटिव भविष्य को उजागर करना था।
इस ऐतिहासिक आयोजन में ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी सेक्टर की दिग्गज हस्तियां एक प्लेटफार्म पर आईं। इसमें Qualcomm, AWS, KPIT, Maruti, BMW, Renault, Mahindra, TATA Motors और Google जैसी भारत और विश्व की लीडिंग कंपनियों की भागीदारी रही। इस प्लेटफार्म के माध्यम से कई विचारोत्तेजक संवादों के जरिए यह बताया गया कि कैसे भारत तेजी से सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स का ग्लोबल हब बनने की दिशा में अग्रसर है, और किस तरह से देश स्मार्ट, सुरक्षित और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी को साकार कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दिया मुख्य भाषण
इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने कहा, "हमारी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री भारत की सबसे महत्वपूर्ण इंडस्ट्री है, जो अब जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बन चुकी है। इसका साइज 22 लाख करोड़ रुपये है, यह 4 करोड़ लोगों को रोजगार देती है और सबसे अधिक GST रेवेन्यू देती है। आने वाले समय में भारत दुनिया की नंबर-1 ऑटोमोटिव इंडस्ट्री बनेगा।"
गडकरी ने आगे कहा कि ऑटो सेक्टर अब सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इलेक्ट्रिक, एथनॉल, मेथनॉल, बायोडीजल, LNG, CNG और हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि Bajaj, TVS और Honda जैसी कंपनियों द्वारा दो-पहिया वाहनों का 50% तक एक्सपोर्ट हो रहा है। सड़क सुरक्षा पर मुख्य ध्यान दिया जा रहा है। भारत NCAP, ABS, और ₹40,000 करोड़ की लागत से ब्लैक स्पॉट्स को हटाने जैसी पहलें कर रहा है। साथ ही उन्होंने 'Zero Fatality Corridor' और 22 भाषाओं में चलाए जा रहे रोड सेफ्टी अवेयरनेस कैंपेन का भी जिक्र किया।
नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन 2030
हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन बताते हुए उन्होंने कहा कि TATA, रिलायंस, IOCL और अशोक लेलैंड जैसी कंपनियों के साथ बड़े स्तर पर हाइड्रोजन ट्रकों के ट्रायल शुरू हो चुके हैं। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2030 तक 5 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) हाइड्रोजन उत्पादन है, जिससे भारत 1 लाख करोड़ रुपये की फ्यूल इम्पोर्ट की बचत करेगा और 6 लाख रोजगार पैदा होंगे।
इस कार्यक्रम में लोकल इनोवेशन, स्मार्ट व्हीकल्स, इम्बेडेड सिस्टम्स, और EV इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को मजबूती देने की बात की गई। भारत को ग्लोबल ऑटो-टेक लीडर बनाने के लिए अब पूरा ध्यान स्वदेशी तकनीक और टैलेंट पर केंद्रित किया जा रहा है। स्वदेशी बौद्धिक संपदा (IP) को बढ़ावा देने यानी भारत अपनी खुद की तकनीक बनाए, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) की ढांचागत सुविधाओं को आगे बढ़ाने, और एंबेडेड सिस्टम व स्मार्ट वाहनों के प्लेटफॉर्म पर भविष्य के लिए तैयार कौशल के साथ प्रतिभा को सशक्त करने पर जोर दिया गया।
