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पटना में बनेगा अल्ट्रापॉड PRT सिस्टम, ये है क्या? जानिए कहां से कहां तक मिलेगी ये सुविधा

UltraPod Personal Rapid Transit System: बिहार की राजधानी पटना में प्रमुख सरकारी और प्रशासनिक भवनों को जोड़ने के लिए करीब 296 करोड़ रुपये की लागत से अल्ट्रापॉड्स पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (PRT) सिस्टम बनाई जाएगी। यह स्वचालित ट्रांसपोर्ट नेटवर्क यात्रियों को बिना रुकावट सीधे उनके गंतव्य तक पहुंचाएगा और शहर में यातायात दबाव और प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा।

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पटना में बनेगा ‘अल्ट्रापॉड्स पर्सनल रैपिड ट्रांजिट' सिस्टम, 296 करोड़ रुपये होंगे खर्च (तस्वीर-X)

UltraPod Personal Rapid Transit System: बिहार की राजधानी पटना में जल्द ही एक नई अल्ट्रापॉड्स पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (पीआरटी) सिस्टम बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य शहर के प्रमुख सरकारी और प्रशासनिक भवनों के बीच तेज और सुविधाजनक संपर्क स्थापित करना है। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 296 करोड़ रुपये होगी। सरकार के कैबिनेट सचिवालय के बयान के अनुसार मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इस प्रस्तावित सिस्टम को लेकर लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) की टीम के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें कंपनी ने परियोजना के बारे में जानकारी दी।

अल्ट्रापॉड्स क्या हैं?

अल्ट्रापॉड्स या अर्बन लाइट ट्रांजिट पॉड्स एक प्रकार का स्वचालित परिवहन नेटवर्क है। यह पॉड्स खासतौर पर निर्धारित मार्ग पर बिना अनियोजित ठहराव के चलेंगे और यात्रियों को सीधे उनके गंतव्य तक पहुंचाएंगे। इस परियोजना के तहत पॉड्स पर्यावरण अनुकूल होंगे और ‘कार्बन पॉजिटिव’ तरीके से काम करेंगे। अधिकारियों ने कहा कि ट्रैक बनाने के दौरान किसी भी पेड़ की कटाई नहीं की जाएगी।

परियोजना का मार्ग और लंबाई

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक अल्ट्रापॉड ट्रैक करीब पांच किलोमीटर लंबा होगा। यह ट्रैक विश्वेश्वरैया भवन से शुरू होकर विकास भवन और विधानसभा भवन से होते हुए पुराने सचिवालय तक जाएगा। परियोजना के तहत कुल नौ स्टेशनों का निर्माण होगा, जिनमें से दो स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा भी होगी।

पॉड्स की संख्या और संचालन

परियोजना के अनुसार ट्रैक पर कुल 59 पॉड चलेंगे, और हर पॉड में अधिकतम छह यात्री यात्रा कर सकते हैं। स्टेशनों पर हर सात सेकंड के अंतराल पर पॉड उपलब्ध होंगे, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साथ ही, एक नियंत्रण कक्ष और अल्ट्रापॉड पार्किंग सुविधा भी स्थापित की जाएगी।

समयसीमा और निर्माण लक्ष्य

बिहार सरकार का लक्ष्य है कि प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के 15 महीनों के भीतर इस प्रणाली का निर्माण पूरा कर लिया जाए। अधिकारियों ने कहा कि यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक होगी, बल्कि प्रशासनिक कामकाज के लिए मोटर वाहनों के इस्तेमाल को भी कम करेगी। इसके चलते उत्सर्जन में कमी आएगी और सुबह व शाम के समय कार्यालय क्षेत्र में ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

किराया और यात्रा सुविधा

अल्ट्रापॉड्स पीआरटी प्रणाली की सेवा का किराया नाममात्र रखा जाएगा। यात्री इसका इस्तेमाल टोकन या रिचार्जेबल कार्ड के जरिए कर सकेंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल भारत सरकार की ‘स्मार्ट, सतत और एकीकृत गतिशीलता’ की परिकल्पना के अनुरूप है।

पर्यावरण और सतत विकास

यह परियोजना पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ट्रैक और पॉड्स पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होंगे और इससे शहर में वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम होगा। अधिकारियों ने यह भी बताया कि निर्माण कार्य के दौरान पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी और यह पहल शहर को एक ‘स्मार्ट और हरा-भरा’ प्रशासनिक क्षेत्र बनाने में मदद करेगी।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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