Car Depreciation Value: कार या बाइक खरीदने के लिए लोग अपनी मेहनत की कमाई इन्वेस्ट करते हैं। लेकिन शोरूम से बाहर निकलते ही कार या फिर बाइक की कीमत में कमी होने लगती है। शोरूम से बाहर आते ही आपकी कार या बाइक की कीमत में 5% तक की कमी हो जाती है। इतना ही नहीं, हर साल आपकी कार और बाइक की कीमत पहले के मुकाबले कम होती जाती है। इसे ही कार/बाइक का डेप्रीसिएशन रेट कहते हैं। जब भी आप इंश्योरेंस खरीदते या क्लेम करते हैं तो आपकी कार या बाइक का डेप्रीसिएशन रेट कैलकुलेट किया जाता है। आइये जानते हैं कि आप अपनी कार या बाइक के डेप्रीसिएशन रेट को कैसे कैलकुलेट कर सकते हैं।
क्यों कम होती है कीमत?
समय के साथ-साथ इस्तेमाल की वजह से कार या बाइक की कीमत में कमी होती जाती है। एक वित्त वर्ष के दौरान किसी भी संपत्ति की कीमत में होने वाली कमी को डेप्रीसिएशन रेट कहा जाता है। किसी भी वाहन का डेप्रीसिएशन रेट उसके इस्तेमाल और उसकी लाइफ पर निर्भर करता है। किसी भी वाहन की कीमत में हुई कुल कमी को कार या बाइक वैल्यू कैलकुलेटर की मदद से मापा जा सकता है। किसी भी वाहन के डेप्रीसिएशन रेट की गणना सालाना 40% की अधिकतम दर से की जा सकती है।
इससे भी पड़ता है फर्क
क्लियर टैक्स के अनुसार अगर किसी भी दोपहिया वाहन या कार को किसी कंपनी के बिना किराये पर चलवाया जाता है तो उसकी कीमत पर सालाना 15% की दर से डेप्रिसिएशन रेट की गणना की जाती है। वहीं दूसरी तरफ अगर किसी कंपनी के माध्यम से दोपहिया वाहन या कार को किराए पर चलाया जाए तो उसके डेप्रिसिएशन रेट को 30% सालाना की दर से कैलकुलेट किया जाता है। अगर आपकी कार किसी कंपनी में नहीं चलती है तो उसकी कीमत हर साल 15% की दर से कम होगी। वहीं अगर आप अपनी कार को किसी कंपनी के माध्यम से किराए पर चलाते हैं तो उसकी कीमत में हर साल 30% की दर से कमी होगी। सरकार के नियमों के अनुसार आपकी कार की कीमत हर साल अधिकतम 40% ही कम हो सकती है।
