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इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स जल्द भारत में हो जाएंगे महंगे, सरकार खत्म कर रही सब्सिडी!

  • Authored by: अंशुमन साकल्ले
  • Updated May 23, 2023, 07:42 PM IST

FAME II Subsidy: ज्यादातर कंपनियों को फेम के दायरे में लाने के लिए इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर मिलने वाली सब्सिडी को सरकार घटा सकती है। रिपोर्ट में सामने आया है कि 40 फीसदी तक मिलने वाली इस सब्सिडी को 15 प्रतिशत किया जाएगा।

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1 जून से सरकार फेम-2 सब्सिडी कम करने वाली है जो बहुत नजदीक है।

Photo : BCCL
KEY HIGHLIGHTS
  • जल्द महंगे होंगे सभी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स
  • सरकार घटाने जा रही इनकी कुल सब्सिडी
  • इससे ज्यादातर ग्राहकों को मिलेगा फायदा

Electric Two-Wheeler Subsidy: भारत सरकार बहुत जल्द इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर मिलने वाली फेम-2 सब्सिडी को घटाने वाली है। इसके घटते ही इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की कीमत में इजाफा होना तय है, अभी से बहुत सारे इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं ने अपने इलेक्ट्रिक दो-पहिया के दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द ही अन्य इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता भी टू-व्हीलर्स की कीमत बढ़ाएंगे। 1 जून से सरकार फेम-2 सब्सिडी कम करने वाली है जो बहुत नजदीक है। यहां अब तक इलेक्ट्रि्रक टू-व्हीलर की बैटरी क्षमता के हिसाब से प्रति किलोवाट-आर 10,000 रुपये की राहत दी जा रही थी।

खत्म भी हो सकती है सब्सिडी?

सूत्रों की मानें तो भारत सरकार अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म करने वाली है। इसी के चलते वाहन निर्माताओं ने सरकार से संपर्क किया है और उन्हें इस सब्सिडी को जारी रखने का सुझाव दिया है। हालांकि इसे लेकर अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई है। बता दें कि हाल में कथित रूप से सरकार को बड़े वाहन निर्माताओं की मीटिंग हुई है, इसमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कंपनियों को बीएस7 ईंधन नियमों की तैयारी के संकेत दे दिए हैं।

कितनी घटेगी इनकी सब्सिडी?

पिछली रिपोर्ट में सामने आया था कि अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर मिलने वाली सब्सिडी को 40 प्रतिशत से घटाकर सरकार 15 प्रतिशत करने का प्लान बना रही है। ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों को सब्सिडी दी जा सके, इसीलिए भारत सरकार को ये प्रपोजल भेजा गया है। सरकार को ये सिफारिश मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज ने भेजी है, जिसपर मंत्रालय के एक हाई लेवल पैनल फैसला लेगा। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों की मानें तो ईवी टू-व्हीलर निर्माताओं की संख्या में बढ़ा इजाफा हुआ है, ऐसे में बची हुई सब्सिडी की रकम का इस्तेमाल अन्य वाहनों को लाभ देने में किया जाएगा।

बढ़ेगी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की कीमत

अधिकारियों ने आगे बताया कि जिन तीन पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की सब्सिडी इस्तेमाल नहीं की गई है, उन्हें भी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के लिए यूज किया जाएगा। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो इलेक्ट्रिक दो पहिया वाहनों की कीमत में इजाफा होगा। लेकिन इससे ज्यादा ईवी ग्राहकों को सब्सिडी का फायदा मिल सकेगा। केंद्र सरकार फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों पर फेम इंडिया स्कीम के तहत 10,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है।

कितनी बढ़ेगी सब्सिडी की कुल रकम

सरकार के आला अधिकारी ने बताया कि फेम 2 स्कीम के तहत जहां इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर अभी 1,000 करोड़ की सब्सिडी अलॉट की गई है, उसे बढ़ाकर सरकार 3,500 करोड़ करने वाली है। ये तब संभव होगा जब प्रति यूनिट सब्सिडी गिरा दी जाए और ज्यादातर ईवी निर्माताओं को सब्सिडी के दायरे में लेकर आएं। इस मामले में फेम इंडिया की प्रोग्राम एंड सेंक्शनिंग कमेटी को सिफारिश भेजी जाएगी। इसके बाद यही कमेटी इस मामले पर अंतिम फैसला लेने वाली है।

अंशुमन साकल्ले
अंशुमन साकल्लेauthor

अंशुमन साकल्ले जून 2022 से टाइम्स नाउ नवभारत (www.timesnowhindi.com/) में बतौर सीनियर स्पेशल करेस्पॉन्डेंट कार्यरत हैं। ये ईएमएमसी, दैनिक भास्कर, एनडीटीवी और जी न्यूज डिजिटल में काम करने के बाद संस्थान से जुड़े। इन्हें सभी मुख्य बीट्स पर काम करने का अनुभव है और ये 12 वर्ष से भी ज्यादा इसी पेशे में गुजार चुके हैं। एक्सपर्टीज की बात करें तो ऑटो और टेक से जुड़ी तमाम खबरों का जिम्मा यही संभाल रहे हैं। ऑन ग्राउंड रिपोर्ट हो या वीडियो या फिर गाड़ियों का रिव्यू, ये हमेशा अलग-अलग एंगल से खबरों को रोचक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। भोपाल के रहने वाले अंशुमन बड़े घुमक्कड़ हैं और ये देश की लगभग सभी प्रचलित जगहों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर चुके हैं। एनडीटीवी से लेकर अब तक इन्होंने सिर्फ ऑटोमोबाइल जगत से जुड़ी खबरों पर ही काम किया है, हालांकि कोर बीट से इतर चुनाव, बजट या किसी भी बडे इवेंट पर इन्हें बड़ी और महत्वपूर्ण खबरों की जिम्मेदारी भी दी जाती है। इन सबके अलावा राजनीति में भी इन्हें खासी दिलचस्पी है, यही वजह है कि मध्यप्रदेश की पॉलिटिक्स को ये बहुत गहराई से जानते हैं।

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