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10 लाख से ज्यादा डीजल वाहनों पर गिरेगी गाज? 2027 तक सरकार कर सकती है बैन

  • Authored by: अंशुमन साकल्ले
  • Updated Jul 6, 2023, 12:42 PM IST

देशभर में कुल वाहनों का 40 फीसदी डीजल वाहनों से आता है और इनमें से 80 प्रतिशत ट्रांसपोर्ट वाहन हैं। ऐसे में प्रदूषण फैलाने की एक बड़ी वजह डीजल गाड़ियां है जिन्हें 2027 तक सरकार भारत में बैन कर सकती है।

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सरकार के कार्बन जीरो लक्ष्य को पूरा करने के लिए भी ये कदम उठाया जा सकता है।

Photo : ET Now Digital
KEY HIGHLIGHTS
  • डीजल वाहन मालिकों के लिए बुरी खबर
  • 2027 तक सरकार लगा सकती है बैन
  • 10 लाख से ज्यादा कारें होंगी प्रभावित

Diesel Vehicles Ban In India: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 2027 तक भारत के शहरों में डीजल वाहन बैन करने के लिए एक याचिका दायर की है। ये भारत के 10 लाख से भी ज्यादा डीजल कार मालिकों के लिए संकेत है कि वो जल्द से जल्द इलेक्ट्रिक या अल्टर्नेटिव फ्यूल की ओर बढ़ें। डीजल वाहनों पर प्रतिबंध के साथ सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और फेम स्कीम का विस्तार करना है। सरकार के कार्बन जीरो लक्ष्य को पूरा करने के लिए भी ये कदम उठाया जा सकता है। डीजल कारों को बैन करने के अलावा 2030 तक पेट्रोल-डीजल से चलने वाली बसों को भी बंद किया जा सकता है।

क्या-क्या शामिल है इस याचिका में

इस यात्रिका में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के लिए नेचुरल गैस के इस्तेमाल को बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है। नेट जीरो से मतलब प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को बंद कर ग्रीनहाउस गैस से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देना है। बता दें कि डीजल वाहन भारी मात्रा में प्रदूषण फैलाते हैं जो पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है। इससे फेफड़ों की बीमारी, अस्थमा अटैक और कई बार समय से पहले मौत जैसी भयानक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके अलावा सरकार रिन्युएबल गैसों से 40 प्रतिशत बिजली बनाने का भी प्लान लेकर चल रही है।

पेट्रोल और डीजल में नहीं रह गया फर्क

भारत में कुल वाहनों की संख्या का 40 प्रतिशत डीजल वाहनों से आता है और इनमें से भी 80 फीसदी ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियां हैं। मतलब प्रदूषण भारी मात्रा में डीजल वाहनों से फैल रहा है जो असल में एक चिंता की बात है। पहले के समय में पेट्रोल और डीजल की कीमत में बीच बड़ा फासला था जो करीब 20-25 रुपये तक था, लेकिन आज के समय में पेट्रोल और डीजल लगभग बरारब दाम पर बिक रहे हैं। ऐसे में 5-7 रुपये के अंतर को लेकर डीजल वाहनों को खरीदा जाना घाटे का ही सौदा है।

अंशुमन साकल्ले
अंशुमन साकल्लेauthor

अंशुमन साकल्ले जून 2022 से टाइम्स नाउ नवभारत (www.timesnowhindi.com/) में बतौर सीनियर स्पेशल करेस्पॉन्डेंट कार्यरत हैं। ये ईएमएमसी, दैनिक भास्कर, एनडीटीवी और जी न्यूज डिजिटल में काम करने के बाद संस्थान से जुड़े। इन्हें सभी मुख्य बीट्स पर काम करने का अनुभव है और ये 12 वर्ष से भी ज्यादा इसी पेशे में गुजार चुके हैं। एक्सपर्टीज की बात करें तो ऑटो और टेक से जुड़ी तमाम खबरों का जिम्मा यही संभाल रहे हैं। ऑन ग्राउंड रिपोर्ट हो या वीडियो या फिर गाड़ियों का रिव्यू, ये हमेशा अलग-अलग एंगल से खबरों को रोचक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। भोपाल के रहने वाले अंशुमन बड़े घुमक्कड़ हैं और ये देश की लगभग सभी प्रचलित जगहों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर चुके हैं। एनडीटीवी से लेकर अब तक इन्होंने सिर्फ ऑटोमोबाइल जगत से जुड़ी खबरों पर ही काम किया है, हालांकि कोर बीट से इतर चुनाव, बजट या किसी भी बडे इवेंट पर इन्हें बड़ी और महत्वपूर्ण खबरों की जिम्मेदारी भी दी जाती है। इन सबके अलावा राजनीति में भी इन्हें खासी दिलचस्पी है, यही वजह है कि मध्यप्रदेश की पॉलिटिक्स को ये बहुत गहराई से जानते हैं।

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