एक नई कार खरीदने से पहले टेस्ट ड्राइव लेना बेहद जरूरी माना जाता है। कई लोग केवल कार का डिजाइन, फीचर्स और शोरूम एक्सपीरियंस देखकर गाड़ी बुक कर देते हैं, लेकिन असल एक्सपीरियंस टेस्ट ड्राइव के दौरान ही पता चलता है। यही वह समय होता है जब बायर समझ सकता है कि कार उसकी जरूरत और ड्राइविंग स्टाइल के हिसाब से सही है या नहीं। इसलिए टेस्ट ड्राइव के दौरान कुछ जरूरी चीजों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ड्राइविंग कंफर्ट पर दें ध्यान
सबसे पहले ड्राइविंग कंफर्ट पर ध्यान देना जरूरी है। कार चलाते समय सीट की पॉजिशनिंग, स्टीयरिंग पकड़ने में आराम और पेडल तक सही पहुंच होनी चाहिए। अगर ड्राइविंग पॉजिशन आरामदायक नहीं होगी, तो लंबी दूरी पर कार ड्राइविंग में परेशानी आ सकती है। इसलिए सीट एडजस्टमेंट और overall ergonomics को ध्यान से चेक कर लेना चाहिए।
इंजन परफॉर्मेंस को भी करें चेंक
इंजन परफॉर्मेंस को भी टेस्ट ड्राइव के दौरान अच्छे से महसूस करना चाहिए। Car acceleration smooth है या नहीं पिकअप कैसा है और ओवरटेकिंग के दौरान इंजन रिस्पॉन्सिव लगता है या नहीं, इन बातों पर ध्यान देना जरूरी माना जाता है। खासकर सिटी ट्रैफिक और हाइवे दोनों तरह की कंडीशन में इंजन बिहेवियर समझना जरूरी है।
स्टीयरिंग और ब्रेकिंग सिस्टम पर दें ध्यान
स्टीयरिंग और ब्रेकिंग सिस्टम की जांच भी बेहद जरूरी होती है। स्टीयरिंग बहुत ज्यादा हार्ड या बहुत हल्का नहीं लगना चाहिए। वहीं ब्रेकिंग के दौरान कार स्टेबल महसूस होनी चाहिए। अगर ब्रेक लगाने पर वाइब्रेशन या कुछ अलग आवाज आए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
स्पेंशन क्वालिटी को चेक करना न भूलें
टेस्ट ड्राइव के दौरान सस्पेंशन क्वालिटी को चेक करना भी जरूरी है। टेस्ट ड्राइव के दौरान स्पीड ब्रेकर और खराब सड़क पर कार चलाकर देखना चाहिए कि झटके कितने महसूस होते हैं। अच्छी सस्पेंशन वाली कार खराब रास्तों पर भी ज्यादा कंफर्टेबल राइड देती है।
विजिबिलिटी और ब्लाइंड स्पॉट्स पर दें ध्यान
विजिबिलिटी और ब्लाइंड स्पॉट्स पर भी ध्यान देना चाहिए। ड्राइवर सीट से आगे, पीछे और साइड व्यू साफ दिखना जरूरी है। कई बार स्टाइलिश डिजाइन की वजह से रियर विजिबिलिटी कम हो जाती है, जिससे पार्किंग और ट्रैफिक में परेशानी हो सकती है। ORVMs और rear camera की क्वालिटी भी चेक करना जरूरी है।
केबिन नॉइस और रिफाइनमेंट को न करें नजरअंदाज
इसके अलावा, केबिन नॉइस और रिफाइनमेंट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ड्राइविंग के दौरान अगर इंजन या टायर नॉइस या बाहर की आवाज केबिन में ज्यादा आ रही हो, तो लॉन्ग ड्राइव में यह परेशान कर सकता है। इसलिए विंडो बंद कर केबिन रिफाइनमेंट जरूर चेक करें।
nfotainment System की फंक्शनिंग भी करें चेक
टेस्ट ड्राइव के दौरान फीचर्स और Infotainment System की फंक्शनिंग भी टेस्ट ड्राइव के दौरान देखनी चाहिए। Touchscreen responsiveness, AC cooling, speaker quality और connectivity features को इस्तेमाल कर देखना बेहतर रहता है। कई बार brochure में दिए गए फीचर्स प्रैक्टिकल यूज में उतने स्मूद नहीं लगते।
