Kisan Ki Khabren: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने बताया है कि देश के कई राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से किसानों की रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। अब तक करीब 2.49 लाख हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में आयोजित ‘उन्नत कृषि मेले’ से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कई जगह तेज बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलें गिर गईं और किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है।
तीन विभाग कर रहे हैं नुकसान का आकलन
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लिया है। नुकसान का सही आंकलन करने के लिए तीन अलग-अलग विभागों द्वारा सर्वे किया जा रहा है। इसके साथ ही सभी राज्य सरकारों को भी तुरंत अपने-अपने क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद किसानों को राहत देने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गेहूं और बागवानी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 8 अप्रैल तक जो नुकसान सामने आया है, उसमें गेहूं सबसे ज्यादा प्रभावित फसल है। इसके अलावा आम और लीची जैसी बागवानी फसलों को भी नुकसान हुआ है। कई इलाकों में तेज हवा और ओलावृष्टि के कारण पेड़ों से फल गिर गए और खेतों में खड़ी फसलें खराब हो गईं।
मौसम विभाग की चेतावनी पहले ही जारी थी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। इनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और मध्यप्रदेश जैसे राज्य शामिल थे। IMD के अनुसार कई जगहों पर तेज हवाओं के साथ ओले गिरे, जिससे फसलों को नुकसान हुआ।
किसानों के साथ सरकार खड़ी है: मंत्री
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार इस संकट की घड़ी में किसानों के साथ है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार हर स्थिति में किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार लगातार राज्यों से संपर्क में है और राहत कार्यों पर नजर रख रही है।
उर्वरक आपूर्ति और सब्सिडी पर भी जोर
उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों पर 41,534 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों को खाद की कमी न हो। इसके अलावा सरकार आयात के अलग-अलग स्रोतों से उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी काम कर रही है ताकि वैश्विक संकट का असर किसानों पर न पड़े।
डिजिटल खेती की ओर कदम
सरकार ने हरियाणा और मध्यप्रदेश में ‘एग्रीस्टैक’ नाम की एक पायलट योजना शुरू की है। इसके तहत किसानों की डिजिटल पहचान बनाई जा रही है, जिससे उन्हें खाद, बीज और सब्सिडी सीधे मिल सकेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसानों तक पहुंचेगा।
कृषि नीति का नया फोकस
मंत्री ने कहा कि अब सरकार का लक्ष्य सिर्फ अनाज उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि फल, सब्जी, दूध, दलहन और तिलहन जैसे उत्पादों को भी बढ़ावा देना है, ताकि देश पोषण के मामले में आत्मनिर्भर बन सके।
